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अध्यापक बनेंगे अपने-अपने विद्यालय के हेल्थ एंबेसडर

यह कार्यक्रम स्वास्थ्य मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय का सांझा कार्यक्रम है जिसमें ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाना निश्चित है। जिला जींद के विद्यालयों के 2-2 अध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाना है जिसमें एक महिला अध्यापक का होना आवश्यक है इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किशोर, किशोरियों को पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य की पूर्ण जानकारी देना है।

अध्यापक बनेंगे अपने-अपने विद्यालय के हेल्थ एंबेसडर
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 ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लेते हुए अध्यापक।

हरिभूमि न्यूज. जींद

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ईक्कस के तत्वावधान में चल रहेहेल्थ एवं वेलनेस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के जिला किशोरावस्था स्वास्थ्य अधिकारी डा. पुष्पा नेरिप्रोडक्टिव हेल्थ एंड एचआईवी एड्स पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। इसमें 50 अध्यापक- अध्यापिकाओं ने अपनी प्रतिभागिता की।

यह कार्यक्रम स्वास्थ्य मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय का सांझा कार्यक्रम है जिसमें ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाना निश्चित है। जिला जींद के विद्यालयों के 2-2 अध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाना है जिसमें एक महिला अध्यापक का होना आवश्यक है इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किशोर, किशोरियों को पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य की पूर्ण जानकारी देना है। किशोरावस्था में अधिकतर छात्र-छात्राएं किसी भी विषय में सही निर्णय लेने में असफल हो जाते हैं जो उनके जीवन के लिए घातक सिद्ध होता है। इस प्रशिक्षण का टारगेट यही है कि किशोर छात्र-छात्राएं अपने उद्देश्य से भटकें ना तथा अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को स्वयं निपटाने में कुशल साबित हों।

इस प्रशिक्षण में 11 माड्यूल पर चर्चा की गई है जो छात्र-छात्राओं में पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समाज के प्रति दायित्व, माता-पिता के प्रति कर्तव्य तथा देश के प्रति सेवा भावना को जागृत करना है। प्रथम सत्र में डा. पुष्पा ने सभी अध्यापकों को रीप्रोडक्टिव हैल्थ तथा एचआईवी एवं एड्स से किशोर-किशोरियों को कैसे जागरूक करना है, यह सिखाया तथा पूर्ण जानकारी दी।

दूसरे सत्र के प्रारंभ में पूनम यादव विषय विशेषज्ञ एससीईआरटी गुरुग्राम ने हिंसा और चोट के खिलाफ सुरक्षा विषय पर छात्रों के लिए क्या-क्या आवश्यक है, कैसे हिंसा से बचें, चाहे वह मानसिक पीड़ा हो या शारीरिक या सामाजिक उसे कैसे सुरक्षा करें इस पर चर्चा की।

संस्थान के प्राचार्य नवीन नारा ने कहा कि यह कार्यक्रम निश्चित रूप से हमारे किशोर एवं किशोरियों के लिए लाभदायक होगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक डा. सुरेंद्र गौड ने बताया कि यह प्रशिक्षण समूचे जिले के 650 अध्यापक-अध्यापिका को दिया जाना है जो अपने-अपने विद्यालय के हैल्थ अंबेसडर बनेंगे।

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