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बिजली संयंत्रों को बनी रहे कोयले की आपूर्ति

बिजली उत्पादक संयंत्रों की जरूरत को पूरा करने के लिए कोल इंडिया के पास 24 दिनों की कोयले की मांग के बराबर 43 मिलियन टन का कोल का पर्याप्त स्टॉक है।’ लेकिन आंकड़े कोयले व गैस की आपूर्ति की कमी की ओर इशारा कर रहे हैं।

देशभर में बिजली संकट गहराया- पंजाब, केरल समेत महाराष्ट्र में 20 से ज्यादा थर्मल पावर स्टेशन बंद, जानें कितने दिन का बचा कोयला
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बिजली संकट 

Haribhoomi Editorial : देश में अगर बिजली संकट गहराएगा तो अर्थव्यवस्था को गहरी चोट लगेगी। कोरोना महामारी से प्रभावित देश की अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर लौट रही है। इसके लिए बिजली की आपूर्ति का सुचारू बने रहना जरूरी है। सरकारी कंपनी गेल और निजी कंपनी टाटा के गैस व कोयले की कमी से बिजली आपूर्ति बाधित होने के संदेश के चलते आने वाले वक्त में बिजली संकट होने की आशंका व्याप्त हुई है। गेल ने गैस आपूर्ति में कमी की चेतावनी दी थी तो टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर संभावित बिजली कटौती को लेकर सचेत किया था।

यूं तो केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्री आरके सिंह और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि देश में कोयला की कोई कमी नहीं है, इसलिए बिजली संकट गहराने का सवाल ही नहीं है। सिंह ने कहा कि 'संकट न तो कभी था, न आगे होगा। पहले की तरह कोयले का 17 दिन का स्टॉक नहीं है लेकिन हमारे पास चार दिन का स्टॉक है।' प्रह्लाद जोशी ने कहा कि 'बिजली आपूर्ति बाधित होने का बिल्कुल भी खतरा नहीं है। बिजली उत्पादक संयंत्रों की जरूरत को पूरा करने के लिए कोल इंडिया के पास 24 दिनों की कोयले की मांग के बराबर 43 मिलियन टन का कोल का पर्याप्त स्टॉक है।' लेकिन आंकड़े कोयले व गैस की आपूर्ति की कमी की ओर इशारा कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े बिजली उत्पादन संयंत्र ऊंचाहार के छह यूनिट में उत्पादन बाधित है। ऊंचाहार ताप बिजली संयंत्र से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तरांचल को बिजली की आपूर्ति की जाती है। इस संयंत्र की किसी यूनिट के बंद होने से इन राज्यों में बिजली आपूर्ति पर असर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के कुछ हिस्सों में बिजली की कटौती हो भी रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में कोयले की कमी के कारण बिजली संकट और ब्लैकआउट के खतरे को देखते हुए इन राज्यों की सरकारों से केंद्र सरकार को लिखित पत्र भेजकर कोयले की आपूर्ति की मांग की है। भारत में कोयले से चलने वाले 135 पावर प्लांट में से आधे से ज्यादा ऐसे हैं, जहां कोयले का स्टॉक खत्म होने वाला है। इनमें से कई पावर प्लांट में केवल 2-4 दिन का ही स्टॉक बचा है। कोयला आधारित संयंत्र, थर्मल पावर प्लांट की कैटेगरी में आते हैं। भारत में इस्तेमाल होने वाली बिजली की आपूर्ति 71 फीसदी थर्मल पावर प्लांट्स के जरिए की जाती है। भारत ही नहीं चीन, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, रूस, लेबनान आदि देश पहले से ही ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। लेबनान अंधेरे में डूबा है। चीन की बढ़ती ऊर्जा भूख ने आपूर्ति तंत्र में असंतुलन पैदा कर दिया है।

यूरोप में नेचुरल गैस के उत्पादन में कमी, कोरोना के दौरान कोयले के उत्पादन की सुस्त रफ्तार, पिछले 18 महीने में जीवाश्म ईंधन को निकालने की दिशा में बहुत कम काम, चक्रवाती तूफानों के चलते खाड़ी देशों की कुछ तेल रिफाइनरी का बंद होना, रूसी गैस निर्यात में गिरावट, चीन और ऑस्ट्रेलिया के तनावपूर्ण संबंध व समुद्र में कम हवा चलने से दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत के संदर्भ में देखें तो आयातित कोयला कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की वजह से आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्र अपनी क्षमता के कम बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि राज्यों के बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति लगतार बनाए रखे, ताकि बिजली उत्पादन रुके नहीं। केंद्र को राज्यों की शिकायतें भी दूर करनी चाहिए।

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