Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

ग्राउंड रिपोर्ट : अस्पतालों में रेडमेसिविर का टोटा, नए ऑक्सीजन सिलेंडर देने पर सप्लायरों ने किए हाथ खड़े

प्रशासनिक दावों के बीच कोरोना के उपचार के लिए इंतजामों के बारे पड़ताल की तो एक चौकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि जिला प्रशासन मीटिंग लेकर स्वास्थ्य विभाग को जहां निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों के लिए अलग से आरक्षित बैड की व्यवस्था करने के निर्देश दे रहा है। वहीं, इन सबके बीच शहर के चार नामी अस्पतालों को कोविड मरीजों के उपचार की मंजूरी नहीं मिल रही है।

हिमाचल में ऑक्सीजन की कमी हुई दूर, केंद्र से मिले 500 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
X
प्रतीकात्मक तस्वीर

डॉ. अनिल असीजा : हिसार

आप यह जानकर अचम्भित होंगे कि कोरोना में जीवनरक्षक दवा रेडमेसिविर का स्टॉक न तो जिला के नागरिक अस्पताल में है, न अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में है। शहर के करीब 60 बड़े निजी अस्पतालों में भी अधिकतर अस्पतालों में कोरोना में काम आने वाली रेडमेसिविर दवा का बिल्कुल भी स्टॉक नहीं है। आप डाक्टर की पर्ची लेकर शहर के किसी कैमिस्ट शॉप पर रेडमेसिविर दवा लेने जाएंगे तो वहां भी निराशा हाथ लगेगी। ऑक्सीजन सिलेंडरों के बारे में यह आलम है कि निजी अस्पतालों को नए सिलेंडर की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।

आक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति करने वाले इंडस्ट्रियल एरिया के सप्लायर ने एक दिन पहले ही शहर के सभी बड़े अस्पतालों को नए ऑक्सीजन सिलेंडर की डिमांड करने पर हाथ खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह है कि शहर के तमाम अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले वाली इस फर्म ने अस्पतालों को ऑक्सीजन के खाली सिलेंडरों को भरने के लिए मना नहीं किया है। यह सप्लायर अस्पतालों को उनके पहले के ऑक्सीजन के खाली सिलेंडरों को रिफिल कर रहा है।

हरिभूमि ने प्रशासनिक दावों के बीच कोरोना के उपचार के लिए इंतजामों के बारे पड़ताल की तो एक चौकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि जिला प्रशासन मीटिंग लेकर स्वास्थ्य विभाग को जहां निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों के लिए अलग से आरक्षित बैड की व्यवस्था करने के निर्देश दे रहा है। वहीं, इन सबके बीच शहर के चार नामी अस्पतालों को कोविड मरीजों के उपचार की मंजूरी नहीं मिल रही है। यह चार अस्पताल इस समय कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए मंजूरी की इंतजार में है। नागरिक अस्पताल प्रशासन उन्हें यह जवाब मिला है कि स्वास्थ्य महकमे में जिस अधिकारी ने अप्रूवल से पहले अस्पतालों में निरीक्षण के लिए टीम का गठन करना था। वह इस समय खुद होम क्वारंटाइन है। उसकी जगह अभी तक किसी अन्य को चार्ज नहीं दिया गया है।

बीते चार-पांच दिन से अप्रूवल की इंतजार में फाइल अटकी पड़ी है। अपू्रवल की इंतजार कर रहे इन अस्पतालों का कहना है कि औसतन रोजाना उनके पास 10 से ज्यादा कोरोना संक्रमित उपचार करवाने के लिए आ रहे हैं। उपचार करवाने वाले इन मरीजों की हालत गंभीर होती है। इसलिए उनके परिजन मरीज को लेकर अस्पतालों का रूख करते हैं। चूंकि इन संक्रमितों या उनके परिजन पहले से ही किसी अन्य बीमारी का उपचार उनके यहां करवा चुके होते हैं। ऐसे में उनका विश्वास पहले से परिचित अस्पताल पर ही रहता है। अपू्रवल के लिए प्रतीक्षारत इन अस्पताल से जुड़े सूत्रों का का कहना है कि तमाम सेफ्टी उपकरणों और अन्य व्यवस्थाओं के प्रबंधों के बावजूद वह कोविड मरीजों को अपने यहां नहीं ले सकते हैं। प्रशासन से अव्रूवल कब तक मिलती है, इस पर ही उनकी नजरें टिकीं हैं। ऐसे समय में जब चार दिनों से ही अकेले हिसार जिला में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा रोजाना 500 के पार जा रहा है। चार बड़े अस्पतालों को कोविड मरीजों के उपचार की अप्रूवल नहीं मिलना तमाम व्यवस्थाओं की हकीकत से रूबरू करवाने वाला है।

स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

जिंदल अस्पताल रोड पर दो अस्पताल और ऋषि नगर सेवक सभा एरिया के दो अस्पताल संचालकों ने सीएमओ को कोविड मरीजों के उपचार के लिए फाइल दी है। एक अस्पताल की फाइल तो बीते आठ दिन से अटकी है। स्वास्थ्य विभाग से अपू्रवल नहीं मिलने पर यह अस्पताल संचालक अब डीसी से मिलकर गुहार लगाएंगे। एक सूत्र का दावा है कि अस्पतालों को कोविड मरीजों की इजाजत में भी भेदभाव किया जा रहा है। उसका कहना है कि तोशाम रोड स्थित एक निजी अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने अप्रूवल दी है। उस अस्पताल का संचालक तो इस समय सिवानी मंडी में प्रेक्टिस कर रहा है। ऐसे में जो चिकित्सक हिसार से दूर रहकर प्रेक्टिस कर रहा है। उसके अस्पताल को किस आधार पर अप्रूवल मिली है। जबकि चार अन्य अस्पताल अभी कतार में हैं।

ऐसे लड़ी जा रही कोरोना से लड़ाई!

प्रशासनिक अमले का इन दिनों कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बैठकों का दौर जारी है। प्रदेश सरकार ने कोविड महामारी से निपटने के लिए जिला उपायुक्तों को जिम्मेदारियां दीं। डीसी ने बैठक लेकर सीएमओ को कोरोना की तैयारियों के लिए जिम्मेदारी दे दी। हरिभूमि की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि सीएमओ तो अपनी ड्यूटी निभाने में जोरों से जुटी हैं। वह स्वयं डाटा लेकर अधीनस्थ अधिकारियोंको व्यवस्था बनाने के लिए प्रत्यनशील हैं। मगर कई अधिकारी सीएमओ के निर्देशों को अमलीजामा पहनाने की बजाए जिम्मेदारियों से दूर भाग रहे हैं।

हमारी तैयारियां पूरी

कोरोना के बढ़ते केसों के बीच हमारा तंत्र मजबूत है, कोरोना के ज्यादातर मरीज होम आइसोलेटिड हैं। जो अस्पतालों में आ रहे हैं, उन सभी मरीजों के लिए बेड उपलब्ध हैं। रेडमेसिविर दवा आज ही खत्म हुई है। दवा लाने के लिए गाड़ी आज रवाना हो चुकी है। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की अलग सप्लाई होनी है। उन्हें भी जल्द दवा मिलेगी। सबसे पहले सिविल अस्पताल में वेटिंग सूची के हिसाब से मरीजों को रेडमेसिविर दी जाएगी। रही बात निजी अस्पतालों की अप्रूवल फाइल की तो हमारी प्राथमिकता सभी मरीजों को बेड मुहैया कराने के साथ उपचार दिलाने की है। प्रतीक्षारत निजी अस्पतालों की फिजीकल इंस्पेक्शन का काम होते ही उन्हें अप्रूवल दिलाई जाएगी।- डॉ. रत्ना भारती, सीएमओ, हिसार







Next Story