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पीएम केयर्स फंड की जानकारी ना देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने CIC और PMO से किया जवाब तलब

कपूरथला निवासी याचिकाकर्ता-अधिवक्ता नितिन मित्तू ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने 7 जून, 2020 को पीएम केयर फंड के संबंध में लोक सूचना अधिकारी, पीएमओ से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कुछ जानकारी मांगी थी।

पीएम केयर्स फंड की जानकारी ना देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने CIC और PMO से किया जवाब तलब
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हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ( Punjab and Haryana High Court ) ने पीएम केयर्स फंड ( Pm Cares Fund ) के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी न देने के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एचएस मदान की बेंच ने केंद्रीय सूचना आयोग ( Central Information Commission ) और प्रधानमंत्री ऑफिस ( prime minister office ) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस मामले में कपूरथला निवासी याचिकाकर्ता-अधिवक्ता नितिन मित्तू ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने 7 जून, 2020 को पीएम केयर फंड के संबंध में लोक सूचना अधिकारी, पीएमओ से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 ( right to Information ) के तहत कुछ जानकारी मांगी थी।

याचिकाकर्ता ने पीएम केयर फंड के बारे कैबिनेट प्रस्ताव से संबंधित जानकारी और सरकारी डोमेन की वेबसाइट पर पीएम केयर फंड के विज्ञापन से संबंधित अन्य जानकारी मांगी थी। याचिकाकर्ता ने अनुमति पत्र और पीएम केयर्स फंड द्वारा पूरे भारत में सरकारी वेबसाइटों और यहां तक कि विभिन्न अन्य विश्व मंचों की वेबसाइटों पर इसके विज्ञापन जारी करने व भुगतान की गई राशि की जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी, पीएमओ की तरफ से उसे 15 जून, 2020 को जवाब दिया गया कि चूंकि जानकारी पीएम केयर फंड से संबंधित है, इसलिए वह सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के दायरे में नहीं आती है।

इसके बाद याची ने पहली अपील दायर करके प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ,पीएमओ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की हालांकि, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने लोक सूचना अधिकारी, पीएमओ के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने इस आदेश के खिलाफ मुख्य सूचना आयोग के समक्ष दूसरी अपील की। लेकिन दो रिमाइंडर नोटिस दिए जाने के बावजूद उस पर आज तक निर्णय नहीं लिया गया है। इस लिए अभी याची ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले में आदेश देने की मांग की है। याचिका में बताया गया कि 23 सितम्बर 2020 से उसकी अपील विचाराधीन है उस पर आज तक सुनवाई नहीं हो पाई। कोर्ट से इस मामले में उचित आदेश देने का आग्रह किया गया है।

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