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PGI Rohtak में आठ घंटे दिल का ऑपरेशन करके बचाई मरीज की जान

प्रोफेसर डॉ. एसएस लोहचब और उनकी टीम ने दिल के रोगी का जटिल ऑपरेशन (Operation) करके उसकी जान बचाई। कोविड-19 (COVID-19) के बीच सांस संबंधी परेशानी वाले मरीज का यह ऑपरेशन 8 घंटे चला।

PGI Rohtak में आठ घंटे दिल का ऑपरेशन करके बचाई मरीज की जान
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रोहतक। दिल के रोगी के साथ कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एसएस लोहचब व उनकी टीम।

हरिभूिम न्यूज : रोहतक

पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एसएस लोहचब और उनकी टीम ने दिल के रोगी (Heart patient) का जटिल ऑपरेशन करके उसकी जान बचाई। कोविड-19 के बीच सांस संबंधी परेशानी वाले मरीज का यह ऑपरेशन 8 घंटे चला। टीम को सफलता मिली और अब मरीज बिल्कुल स्वस्थ्य है। जटिल ऑपरेशन की सफलता पर कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक डॉ. रोहताश यादव ने डॉ. लोहचब, उनकी टीम और बेहोशी विभाग की डॉ. टीना अग्रवाल को बधाई दी।

कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष और डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. एसएस लोहचब ने बताया कि 14 जुलाई को मरीज दिल्ली रोड स्थित एक अस्पताल में सांस की समस्या के चलते आईसीयू में वेंटिलेटर पर था। वहां मरीज की एंजयोग्राफी की गई तो पता चला कि मरीज को दिल की बीमारी की शिकायत है। इस पर परिजनों ने पीजीआईएमएस के

कार्डियक सर्जरी विभाग पर विश्वास जताया और वहां आप्रेशन करवाने की बात की। डॉ. लोहचब ने बताया कि जब मरीज को गंभीर हालत में पीजीआई लाया गया तो जांच में पता चला कि मरीज को प्लमोनरी एडिमा हो गया है, जिसकी वजह से उसके फेफडों में पानी भर गया है और मरीज का तुरंत आप्रेशन करना पडेगा। डॉ. लोहचब ने बताया कि यह समस्या तब ज्यादा होती है जब मरीज को हार्ट अटैक की समस्या होने पर तीन घंटे के अंदर खून के थक्के को पिघलाने वाला इंजेक्शन नहीं दिया जाता या फिर स्टंट नहीं डाला जाता, ऐसे में हार्ट का वाल्व लीक हो जाता है। इस कारण शरीर में खून का संचार कम होता चला जाता है, फेफडों में पानी भर जाता है, शरीर में आक्सीजन की कमी हो जाती है और बीपी बहुत कम हो जाता है। हार्ट के दो चैबरों का पर्दा फट सकता है। ऐसे में मरीज का तुरंत ऑपरेशन करना पडता है और सफलता का प्रतिशत भी केवल 60 के करीब ही है। उन्होंने कहा कि लोकडाउन में अभी तक करीब तीन मरीज इस प्रकार की बीमारी के आ चुके हैं।

अस्पताल से छुट्टी

डॉ. एसएस लोहचब ने बाया कि संस्थान में लाते ही मरीज को वेंटिलेटर पर लिया गया और हार्ट असिस्ट डिवाइस-आईएपीपी-पर रखा गया। 17 जुलाई को मरीज का आठ घंटे का जटिल आप्रेशन किया गया। इसके बाद मरीज को छह दिन आईएबीपी पर रखा गया और मरीज ने धीरे-धीरे रिकवर किया और दस दिन बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया कि आज फिर मरीज जांच के लिए आया था, जिस पर उसके सभी टेस्ट करवाए गए और मरीज स्वस्थ है।

इनका रहा सहयोग

डॉ. लोहचब ने बताया कि उनके साथ ऑपरेशन में डॉ. कुलदीप सिंह लालर, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. राजेश नांदल, विभागाध्यक्ष डॉ. सविता सैनी, डॉ. सुशीला तक्षक डॉ. अप्रेश, डॉ. वरुण, डॉ. फ्रैकलीना ने सहयोग दिया और डॉ. टीना अग्रवाल ने मरीज की बेहोशी के दौरान मरीज की आक्सीजन का स्तर बनाए रखा, जिससे मरीज की जान बच सकी। डॉ. टीना अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सक के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि उसने गंभीर मरीज की जान बचाने में सफलता हासिल की है।

हार्ट अटैक का हल्के में न लें

आमजन से अपील है कि हार्ट अटैक को हल्के में ना लें और तुरंत चिकित्सक से अपनी जांच करवाएं। जब पूरे देश का ध्यान कोरोना की तरफ ऐसे में संस्थान में मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा उपलबध करवाई गई अत्याधुनिक मशीनों से संस्थान में नॉन कोरोना के गंभीर मरीजों का तत्परता के साथ से इलाज किया जा रहा है। -प्रोफेसर डॉ. एसएस लोहचब, कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष।

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