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कृषि कानूनों पर बुकलेट का लोकार्पण, वकील ने मुफ्त में बांटने के लिए 10 हजार बुकलेट छपवाई

टीकरी बॉर्डर पर जारी बुकलेट का शीर्षक है 'मनुष्य का रेटी से रिश्ता तोड़ने वाले तीन कृषि कानूनों की व्याख्या, लेखा-जोखा और समीक्षा'। इस 32 पृष्ठ की बुकलेट के लोकार्पण के बाद किसानों को संबोधित करते हुए पटियाला के एडवोकेट जोगिंद्र सिंह जिंदू ने कहा कि कृषि कानूनों से खेती बर्बाद हो जाएगी।

किसान नेता
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बहादुरगढ़ : मुख्य मंच पर बुकलेट का विमोचन करते किसान नेता।

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों के आंदोलन के रविवार को 80 दिन पूरे हो गए। टीकरी बॉर्डर स्थित मुख्य मंच से रविवार को एडवोकेट जोगिंद्र सिंह जिंदू द्वारा लिखी गई बुकलेट का लोकार्पण किया गया। उनके द्वारा 10 हजार बुकलेट मुफ्ट में बांटकर किसानों के साथ ही आमजन को कृषि कानूनों के नुकसान से अवगत करवाया जाएगा।

टीकरी बॉर्डर पर जारी बुकलेट का शीर्षक है 'मनुष्य का रेटी से रिश्ता तोड़ने वाले तीन कृषि कानूनों की व्याख्या, लेखा-जोखा और समीक्षा'। इस 32 पृष्ठ की बुकलेट के लोकार्पण के बाद किसानों को संबोधित करते हुए पटियाला के एडवोकेट जोगिंद्र सिंह जिंदू ने कहा कि कृषि कानूनों से खेती बर्बाद हो जाएगी। वकीलों सहित समाज के अन्य वर्गों को किसानों के साथ खड़े रहना होगा। उन्होंने सरकार को चेताया कि किसानों को न थकाया जा सकता है और न हराया जा सकता है। सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़ेंगे। इन कानूनों के जरिए केवल पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने इस बुकलेट को धरती माता, खेत, कृषि, अन्न और अन्नदाता को समर्पित किया है। उन्होंने 5 जून 2020 को कोरोना काल में लाए गए तीनों अध्यादेशों से लेकर 26-27 सितंबर को संसद में कानून बनाने तक के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए विभिन्न तकनीकी तथ्यों पर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि संवैधानिक रूप से केंद्र सरकार को कृषि से संबंधित कानून बनाने का कोई अधिकारी नहीं है।

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