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आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए नए सेंटर खोलने की तैयारी में जुटा शिक्षा विभाग, ट्रेनिंग शुरू

34 सेंटरों में आउट ऑफ स्कूल बच्चों की स्टडी काराई जा रही है। लेकिन हाल ही में एक सर्वे किया गया। इसमें कई बच्चे और भी ऐसे सामने आए जो किन्ही कारणों से स्कूल नहीं जा पा रहे थे। इन बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिले इसी लिए अब सेंटरों की संख्या और अधिक बढ़ाई जा रही है। जिले में 16 और नए सेंटर बनाए जाएंगे

आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए नए सेंटर खोलने की तैयारी में जुटा शिक्षा विभाग, ट्रेनिंग शुरू
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हरिभूमि न्यूज़, अंबाला

जो बच्चे किन्ही कारणों से स्कूल नहीं जा सके। उनके लिए बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए शिक्षा विभाग (education Department) प्रयासरत है। इसी के चलते अंबाला के लगभग एक हजार बच्चों को ब्रिज कोर्स करवाए जा रहे हैं। अंबाला में पहले ऐसे सेंटरों की संख्या मात्र 34 थी। लेकिन अब इस संख्या में बढ़ोतरी करते हुए नए सेंटर बनाए जा रहे हैं जिसको लेकर इन दिनों अंबाला शहर के प्रेम नगर स्थित सरकारी स्कूल में ट्रेनिंग भी दी जा रही है। 34 सेंटरों में आउट ऑफ स्कूल बच्चों की स्टडी काराई जा रही है। लेकिन हाल ही में एक सर्वे किया गया। इसमें कई बच्चे और भी ऐसे सामने आए जो किन्ही कारणों से स्कूल नहीं जा पा रहे थे। इन बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिले इसी लिए अब सेंटरों की संख्या और अधिक बढ़ाई जा रही है। जिले में 16 और नए सेंटर बनाए जाएंगे तथा सेंटरों की संख्या 50 की जाएगी।

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुधीर कालड़ा ने बताया कि विभाग वॉलंटियर के जरिए इन बच्चों को शक्षिा उपलब्ध करवाएगा। इन एजुकेशन वॉलंटियर की भर्ती प्रक्रिया विभाग द्वारा तय की गई है। यह जेबीटी या बीएड होंगे तथा इन्हें पूरा स्कूल टाइम बच्चों को पढ़ाना होगा। इसके लिए जहां हमें अधिक बच्चे मिलते हैं। उसी क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल के कमरे को एक सेंटर बना दिया जाता है। जिसके बाद बच्चों को ब्रिज कोर्स करवाया जाता है। उसके बाद यह बच्चे जिस कक्षा के काबिल होते हैं उम्र के हिसाब से ब्रिज कोर्स कंपलीट होने के लिए उन्हें उक्त कक्षा में भर्ती करवा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि शिक्षा की ओर सरकार की यह नई पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को शक्षिति करवाना है। उन्होंने बताया कि पहले जो सर्वे हुआ था। उसमें लगभग 750 बच्चे ऐसे सामने आए थे। जो किन्ही कारणों से स्कूल ही नहीं गए थे। ऐसे में उन बच्चों के परिजनों से बात कर शिक्षा का महत्व बताया। ऐसे में यह परिवार वाले बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए राजी हुए।

वर्दी से लेकर खाने तक की मिलेगी सुविधा : बच्चों का ध्यान केवल शिक्षा की तरफ ही रहे इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को प्रत्येक सुविधा दी जाएगी। शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को किताबें, पेंसिल, बैग, वर्दी आदि सभी जरूरत की चीजें मुहैया करवाई जाएगी। इसके साथ ही दोपहर के खाने का प्रबंध भी किया जाएगा ताकि बच्चे स्कूल से दूर न भागे। जब छह माह तक बच्चों की पढ़ाई अच्छे से हो जाएगी तो बच्चों की शिक्षा प्रगति को देखते हुए उन्हें उसी स्कूल में कक्षा के अनुसार दाखिला दिलवा दिया जाएगा। शिक्षकों के अनुसार जो छात्र योजना के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी मिल रही है।

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