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ओपी धनखड़ बोले- कृषि कानूनों का विरोध अंदेशे पर हो रहा है न कि संदेशे पर

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने पलवल में कहा कि कृषि कानून आज के समय मे सबसे चर्चित विषय है। इन्ही कानूनों से कृषि की एडवांस मार्किटिंग हो पाएगी और अधिक मुनाफा मिलेगा।

ओपी धनखड़ बोले- कृषि कानूनों का विरोध अंदेशे पर हो रहा है न कि संदेशे पर
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने आज पलवल में कहा कि कृषि कानून आज के समय मे सबसे चर्चित विषय है। इन कानूनो का अंदेशे पर विरोध हो रहा है ना कि संदेशे पर। इन्ही कानूनो से कृषि की एडवांस मार्किटिंग हो पाएगी और किसानों को अधिक मुनाफा मिलेगा।

भाजपा सरकार किसान हितैषी सरकार है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों द्वारा किसानों को भ्रमित किया जा रहा है कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में किसानों की जमीन छीन जाएगी जबकि सत्य ये है कि इस क़ानून की धारा 8 व धारा 15 में किसानों की ज़मीन को ही सुरक्षित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को पलवल के धतिर गॉव में किसानों की एक बैठक को सम्बोधित किया।

प्रदेश अध्यक्ष ने कृषि कानून के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि कानून में किसान पक्ष को अधिक मजबूती दी गई है। किसान करार रदद् कर सकता है, ना कि व्यपारी। यदि करार के बाद व्यापारी करार रदद् कर देता है तो व्यापारी को करार की 150% राशि किसान को देनी पड़ेगी और यदि किसान करार रद्द करता है, तो उसको व्यापारी की सर्फि लागत ही देनी पड़ेगी। मंडी के बाहर मार्केट फीस नही देनी पड़ती। ये तो किसान की मर्जी है कि वो अपनी उपज घर पर बेचे, बाहर बेचे अपने राज्य में बेचे या दूसरे राज्य में बेचे वो इस सबके लिए पूर्ण स्वतंत्र है।

धनखड़ ने किसानों को बताया कि एस डी एम को फैसले का अधिकार कानून में इसलिए दिया कि वो 30 दिन के अंदर-अंदर फैसला देने के लिए बाध्य हो। कोर्ट को सरकार फैसले जल्दी देने का आदेश नही दे सकता जबकि एस डी एम को दे सकती है। लेकिन माननीय नरेंद्र तोमर ने किसानों की मांग पर इसमें कोर्ट को भी सम्मिलित कर लिया। मंडी के आढ़तियों को भी नए कानून से नुकसान नही होगा वो मंडी के बाहर जाकर भी खरीदारी करेगा। सरकारी खरीद सर्फि मंडी के अंदर ही होगी। एफ सी आई, हैफेड, वेयरहाउस सबसे बड़ा खरीदार है वो चलते रहने के लिए खरीद इनसे ही कराएगी और ये सर्फि मंडी से ही खरीदेंगे। एमएसपी जैसा था वैसे रहेगा, ये एम एस पी खत्म नही होगी। एमएसपी खत्म होने का सर्फि भर्म मात्र है। 78 करोड़ क्विंटल सरकारी संस्थानों द्वारा खरीद की गई है और आगे भी एम एस पी पर मंडियों के माध्यम से ही होगी।

कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए धनखड़ ने कहा कि आज हमारी सरकार किसान को 12 हजार प्रति एकड़ मुआवजा दे रही है जबकि पंजाब में कांग्रेस सरकार मात्र 8 हजार, हरियाणा में कांग्रेस के वक्त में 2 रुपये 3 रुपये के चैक दिए गए ' फिर भी वो खुद को किसान हितैषी, और हमें किसान विरोधी बताते हैं। इस बात का आकलन किसान खुद लगाए। खाते में सीधा सम्मान निधि के तौर पर 6 हजार रुपये और कांग्रेस के वक्त ज़ीरो।

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