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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुरुक्षेत्र में गीता संग्रहालय के प्रारम्भिक चरण का शुभारंभ किया

शुभारंभ अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गीता ही सही जीवन जीने का ज्ञान देती है। जीवन में गीता को उतरना जरूरी है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुरुक्षेत्र में गीता संग्रहालय के प्रारम्भिक चरण का शुभारंभ किया
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हरिभूमि न्यूज : कुरुक्षेत्र

मुख्यमंत्री मनोहर लाल (Cm Manohar Lal) ने रविवार को गीता ज्ञान संस्थानम केन्द्र में बने गीता संंग्रहालय एवं म्यूजियम के प्रारम्भिक चरण का शुभारंभ किया। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र मेंं बनने वाला यह गीता लघु संग्रहालय देश का पहला संग्रहालय है।

शुभारंभ अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गीता ही सही जीवन जीने का ज्ञान देती है। जीवन में गीता को उतरना जरूरी है। वे भी अपने साथ एक छोटी गीता अपनी जेब में रखते हैं। इससे अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलती है।

मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि जीओ गीता संस्थान, जिस प्रकार इसका नाम है, उसी के अनुरुप यह संस्थान गीता का संदेश पूरे विश्व को दे रहा है और पवित्र ग्रंथ गीता को पूरे विश्व में प्रचारित करने का काम कर रहा है। श्रीमदभगवद गीता एक ऐसा ग्रंथ है, जिसको केवल सुनने, पढऩे या स्मरण करने से काम नहीं चलता है, बल्कि इस ग्रंथ के सार को जीवन में उतारकर इसका लाभ लिया जा सकता है। पवित्र ग्रंथ गीता का अपना एक आभा मंडल है, हम इसके आभा मंडल में रहेंगे तो जीवन में कोई भी गलत काम नहीं करेंगे, हमेशा अच्छा कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी और जीवन शुध्द होगा।

उन्होंने बताया कि इस ग्रंथ के 16वें अध्याय का पहला श्लोक निर्भयता के बारे में ही है। ज्ञान और योग का तभी लाभ होगा जब निर्भय होकर जाप करेंगे, स्वाध्याय करेंगे, तभी समस्याओं का हल होगा। जीओ गीता संग्रहालय और पुस्तकालय इस पावन स्थली पर गीता-ज्ञान की जिज्ञासा लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की पिपासा को शांत करने में तो उपयोगी होंगे, इसके साथ-साथ यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में भी सहायक सिद्घ होंगे। जीओ गीता संस्थान की स्थापना ही गीता के विश्वस्तरीय अध्ययन केन्द्र के रूप में की गई है। यह संग्रहालय व पुस्तकालय इस अध्ययन केन्द्र की नींव का पत्थर साबित होंगे।

स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि गीता में ही विश्व की सभी समस्याओं का समाधान है। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि आज गीता के प्रचार में नया चरण शुरू हुआ है। सभी ग्रंथों का सार भगवद गीता में है। हर देश की विशेषता है हमारी विशेषता है कि हम आध्यत्मिक हैं। हर मनुष्य मानता है कि परमात्मा है। भारत भक्ति के लिए प्राचीन काल से ही ज्ञान ओर परमात्मा की तलाश ओर साधना में है। गीता कहती है परमात्मा सभी के अंदर है फिर द्वेष कैसा है। देश ने आध्यात्म को जीना सीखा है। कुछ भी काम करो निर्भय होकर करो। 16वें अध्याय का पहला श्लोक निर्भय होने का ही संदेश देता है।

इस संग्रहालय की खास बात यह है कि इसमे आजादी की लड़ाई में गीता के महत्व और विश्व के प्रमुख चिंतनकारों की कही बातों को दर्शाया गया है। यह संग्रहालय दो साल मेें बनकर तैयार होगा। महाभारत काल से लेकर वर्तमान भारत के दर्शन इस संग्रहालय में होंगे। संग्रहालय में आचार्य परम्परा, देश की महान हस्तियों के पवित्र ग्रंथ गीता के बारे में विचारों, स्वतंत्रता सेनानियों, विदेशी चिंतकों को भी दिखाया जाएगा। इस संग्रहालय में भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप आकर्षण का केन्द्र रहेगा। संग्रहालय में प्राचीन पांडू लिपियों का भी संग्रह होगा। संग्रहालय के बाहर लकडी से बना रथ आकर्षण का केन्द्र रहेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ आरएसएस के सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, केंद्रीय मंत्री रत्न लाल कटारिया, खेल मंत्री संदीप सिंह, विधायक सुभाष सुधा, घरौंडा विधायक हरविंदर कल्याण, पानीपत से प्रमोद विज, पूंडरी से रणधीर गोलन, कुरुक्षेत्र सांसद नायब सिंह सैनी मौजूद रहे।

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