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एक साथ आंदोलन के मंच पर उभरे मिट्टी से जुड़े कलाकार

इसी रिश्ते ने किसान आंदोलन में अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिए कलाकारों, गीतकारों और गायकों को प्रेरित किया है। पंजाबी लोकसंस्कृति और हक की लड़ाई की परंपरा से उनकी एक जीवंत अभिन्नता भी सर्वविदित है।

एक साथ आंदोलन के मंच पर उभरे मिट्टी से जुड़े कलाकार
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बहादुरगढ़। कृषि सुधार कानून के विरोध में किसानों की ओर से केंद्र सरकार खिलाफ जारी आंदोलन में पंजाबी गायक व कलाकार भी पीछे नहीं हैं। किसान आंदोलन को नए तेवर और ताप देने वाले पंजाब के गायक, गीतकार और कलाकार शनिवार को टीकरी बॉर्डर पहुंचे। इन कलाकारों ने कहा कि यह वक्त मिट्टी का कर्ज चुकाने का है और वे इसमें कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। विदित है कि किसान आंदोलन में अलग अलग आवाजों में पंजाबी अस्मिता और आत्मसम्मान की गूंज जमकर सुनाई दे रही है।

बता दें कि अधिकांश गायक, गीतकार, कलाकार व अभिनेता का किसी न किसी रूप में गांवों की मिट्टी से नाता रहा है। इसी रिश्ते ने किसान आंदोलन में अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिए कलाकारों, गीतकारों और गायकों को प्रेरित किया है। पंजाबी लोकसंस्कृति और हक की लड़ाई की परंपरा से उनकी एक जीवंत अभिन्नता भी सर्वविदित है।

शनिवार दोपहर कंवर ग्रेवाल, हरभजन मान, स्वरा भास्कर, जैजी बी, हर्फ चीमा, संधू सुरजीत, पवन शर्मा, श्रेया कुमार, मूसे जट्टाना, गौरवदीप सिंह, नूर चहल, रौनी रमन, आर्य बब्बर, जस बाजवा, गुरप्रीत सैनी व रबी शेर गिल आदि कला जगत से जुड़े स्टॉर एक साथ टीकरी बॉर्डर स्थित मुख्य मंच पहुंचे और किसानों का उत्साह बढ़ाया। गौरतलब है कि पंजाबी गायकों ने किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए करीब एक दर्जन गीत गए हैं, जो आजकल किसानों के धरनों में खूब गूंज रहे हैं।

एक-एक कर प्रस्तुति देने के साथ ही उन्होंने कहा कि असल में यह लड़ाई अकेले किसानों की नहीं है, बल्कि अपनी धरती बचाने की लड़ाई बन चुकी है। बेशक इनमें से कई किसान परिवार से संबंधित नहीं है, मगर वे पंजाबियत और खेती को बचाने के लिए किसानों के संघर्ष में आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब का कलाकार कहीं भी चला जाए, अपनी जड़ों को कभी भूल ही नहीं सकता।

चूंकि उसकी कला उसी मिट्टी से निकली है, जिसे बचाने के लिए आज धरतीपुत्र डेढ़ महीने से दिल्ली की सीमाओं पर बर्फीली ठंड में डटे हुए हैं। उनका मानना है कि पंजाब के समाज में एक खास बात आत्मसम्मान को लेकर बहुत अधिक संवेदनशीलता का होना है। कृषि कानूनों के विरोध के बीच आंदोलनकारियों को खालिस्तानी, देशद्रोही, भ्रमित आदि के आरोपों ने पंजाबी कलाकारों और बुद्धिजीवियों को व्यथित और विचलित किया है। यही कारण है कि सभी ख्याति प्राप्त कलाकार भी किसानों के इस संघर्ष में पीछे नहीं हैं।



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