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यमुना के पानी में अमोनिया पर हरियाणा और दिल्ली आमने-सामने

दिल्ली सरकार व आप नेताओं द्वारा पानी को लेकर हरियाणा पर दबाव बनाने के लिए बयानबाजी की जा रही है। दिल्ली आप नेताओं का आरोप है कि यमुना के पानी में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिसके लिए वे हरियाणा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

यमुना के पानी में अमोनिया पर हरियाणा और दिल्ली आमने-सामने
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योगेंद्र शर्मा : चंडीगढ़

हरियाणा और दिल्ली के बीच में कड़ाके की ठंड के बावजूद यमुना के पानी को लेकर सियासी गर्मी बढ़ गई है। खासतौर पर दिल्ली सरकार व आप नेताओं द्वारा पानी को लेकर हरियाणा पर दबाव बनाने के लिए बयानबाजी की जा रही है। दिल्ली आप नेताओं का आरोप है कि यमुना के पानी में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिसके लिए वे हरियाणा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस क्रम में हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव विजय वर्धन ने वीरवार को कईं विभागों के अफसरों की बैठक बुला ली है। जिसमें वर्तमान माहौल और दिल्ली की ओर से किए जा रहे दावों की सच्चाई को लेकर सभी का फीडबैक लिया जाएगा।

भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव विजयवर्धन की ओऱ से दोपहर 12 बजे इस संबंध में हरियाणा सचिवालय कमेटी रूम में अहम बैठक बुलाई है। जिसमें हरियाणा प्रदूषण विभाग और सूचना विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल के अलावा हरियाणा शहरी निकाय विभाग, हरियाणा सिंचाई विभाग, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित काफी अफसरों को बुलाया गया है। इस दौरान दिल्ली आम आदमी पार्टी की सरकार और इनके नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को लेकर मंथन होगा। इतना ही नहीं इस समस्या को लेकर ग्राउंड रिुपोर्ट औऱ फीडबैैक भी मुख्य सचिव सभी अफसरों से लेंगे, ताकि सच्ची तस्वीर सभी के सामने रखी जा सके।

एक बार फिर से हरियाणा में पानी पर एक बार फिर सियासत गर्माती हुई नजर आ रही है। दिल्ली जल बोर्ड की ओर से शिकायत करते हुए हरियाणा को यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहाराया है। हरियाणा के मुख्य सचिव विजयवर्धन और पर्यावरण विभाग की एसीएस की संयुक्त अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में आने वाले समय के लिए तैयारी की जाएगी। आरोप है कि दिल्ली में जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दिल्ली जल बोर्ड उपाध्यक्ष और आप विधायक राघव चड्ढा लगातार हरियाणा पर आरोप लगा रहे हैं। यमुना में गंदा पानी छोड़ने का आरोपों को लेकर हरियाणा की ओर से तैयारी की जा रही है ताकि तथ्यों के साथ में जवाब दिया जा सके।

दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने इस संबंध में वीडियो जारी कर यमुना में गंदगी फैलाने और अमोनिया बढ़ने का जिम्मेदार हरियाणा को ठहराया है। दावा है कि यमुना में बिना ट्रीट किया गया दूषित पानी छोड़कर अमोनिया का स्तर बढ़ाया जा रहा है। लेकिन हरियाणा के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दिल्ली को यह पानी पीने के लिए प्रयोग करना है, तो उनको खुद ट्रीट करना होगा। दूसरी तरफ राघव चड्ढा ने कहा कि साफ पानी लेना दिल्ली का हक बनता है और दिल्ली को जरूरत से कम पानी मिल रहा है और उसमें भी इतना अमोनिया मिल रहा है, जिसके कारण डीजेबी में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में बार-बार दिक्कतें आ रही हैं कईं बार प्लांट बंद भी करना पड़ता है। बोर्ड का दावा है कि प्रभावित इलाकों में पानी की किल्लत दूर करने के लिए टैंकर का प्रबंध किया गया है।

दिल्ली के कई क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित

यमुना के पानी में 7 पीपीएम तक अमोनिया दिल्ली की ओऱ से दावा किया जा रहा है कि यमुना के पानी में 7 पीपीएम तक अमोनिया था, जिसकी वजह से वजीराबाद, चंद्रावल प्लांट की क्षमता 50 प्रतिशत तक कम हो गई और ओखला प्लांट पर भी काफी असर पड़ा है और पिछले एक साल से यमुना नदी में अमोनिया के स्तर में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। बोर्ड का कहना ने जानकारी दी है कि हरियाणा की डीडी-1 और डीडी-2 दो नहरों से दूषित पानी यमुना में पहुंचता है। डीडी-2 नहर में इंडस्ट्रीज से निकला डाई ज्यादा मात्रा में होता है जिसके कारण इसे डाई ड्रेन कहा जाता है। डीडी-1 और डीडी-2 दोनों नहरें हरियाणा के पानीपत जिले के शिमला गुजरन गांव के पास एक-दूसरे से मिल जाती हैं।शिमला गुजरन गांव से ये नहरें आगे बढ़ते हुए खोजकीपुर गांव के पास यमुना नदी में गिरती हैं। इस स्थान को यमुना में प्रदूषण का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां पर कई बार अमोनिया का स्तर 25 से 40 पीपीएम हो जाता है।

हरियाणा सरकार का जवाब

हरियाणा सरकार ने कहा है कि वह यमुना नदी के दिल्ली खंड में पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाने के सुझाव से सहमत नहीं है क्योंकि इससे राज्य में पर्यावरण आपदा पैदा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार पर्यावरणीय प्रवाह पारिस्थितिकी और उनके फायदों को बनाये रखने के लिए नदी, आर्द्रभूमि या तटीय क्षेत्र में प्रवाहित जल है और प्रवाह को विनियमित किया जाता है। रूड़की के राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआईएच) ने अपने अध्ययन में सिफारिश की थी कि जनवरी और फरवरी में हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथनीकुंड बैराज से प्रति सेंकेंड 10 घनमीटर के स्थान पर 23 घनमीटर पानी छोड़ा जाए ताकि यमुना नदी के अगले हिस्से में पारिस्थितिकी बरकरार रहे। हथनीकुंड बैराज क्रमश: पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर के माध्यम से हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश में सिंचाई तथा दिल्ली में निगमीय जलापूर्ति के लिए नदी में प्रवाह को विनियमित करता है।

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को यमुना नदी के प्रदूषण का स्वत: संज्ञान लिया और इस मामले में हरियाणा से जवाब तलब किया। इससे पहले, दिल्ली जल बोर्ड ने आरोप लगाया था कि हरियाणा से यमुना नदी में दूषित जल छोड़ा जा रहा है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ दिल्ली जल बोर्ड की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा अमोनिया की अत्यधिक मात्रा वाला दूषित जल यमुना नदी में छोड़ रहा है जो क्लोरीन के साथ मिलने पर कैंसरकारी बन जाता है। पीठ ने कहा कि हम बगैर किसी बहस के नोटिस जारी कर रहे हैं। हम समूची यमुना नदी में प्रदूषण के मामले का स्वत: संज्ञान ले रहे हैं।

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