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हरियाणा : सवा लाख किसानों का 25 करोड़ रुपये बिजली बिल माफ, प्रदेश में जल्द लगाए जाएंगे 10 लाख स्मार्ट मीटर

बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने बताया कि डिजीटलकरण को बढ़ावा देने के लिए जिन गावों में 90 प्रतिशत या इससे अधिक बिलों का भुगतान डिजीटल रूप में किया जा रहा है, उन गावों की पंचायतों को 5 लाख रूपये की राशि ईनाम के रूप में दी जा रही है।

हरियाणा : सवा लाख किसानों का 25 करोड़ रुपये बिजली बिल माफ, प्रदेश में जल्द लगाए जाएंगे 10 लाख स्मार्ट मीटर
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राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मिलने पहुंचे बिजली मंत्री रणजीत सिंह।

हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को बिल जमा कराने, मीटर रीडिंग ठीक कराने व नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करने से सम्बन्धित डिजीटल सुविधाएं प्रदान करने से विभाग की प्रणाली में और अधिक पारदर्शिता आएगी। यह बात उन्होंने बिजली मंत्री रणजीत सिंह से कही। रणजीत सिंह शिष्टाचार मुलाकात के लिए राजभवन पहुंचे थे।

इस दौरान बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने बताया कि ''म्हारा गांव जगमग गांव'' योजना के तहत प्रदेश के 80 प्रतिशत गांव यानि 5600 गांवों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। राज्यपाल दत्तात्रेय ने बताया कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन लागत कम करने के लिए किसानों को गत वर्ष के दौरान 6649.33 करोड़ रूपये की राशि का सब्सिडी के लिए प्रावधान किया गया था। इसके साथ-साथ प्रदेश में सरचार्ज माफी योजना के तहत लगभग सवा लाख किसानों के बिजली बिलों की 25 करोड़ रूपये की राशि माफ की गई है। रणजीत सिंह ने बताया कि प्रदेश में बिजली की चोरी रोकने के लिए शीघ्र ही 10 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

डिजीटलकरण को बढ़ावा देने के लिए जिन गावों में 90 प्रतिशत या इससे अधिक बिलों का भुगतान डिजीटल रूप में किया जा रहा है, उन गावों की पंचायतों को 5 लाख रूपये की राशि ईनाम के रूप में दी जा रही है। इस योजना को अपनाने में उपभोक्ता स्वयं आगे आ रहे हैं। प्रदेश में सौर उर्जा और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सोलर पाॅवर प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं। सोलर पम्प स्थापना के क्षेत्र में भी हरियाणा देश के अग्रणी राज्य में है। रणजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश में बिजली से सम्बन्धित अधिकतर गतिविधियों व सेवाओं को डिजीटल किया गया है, जिसकी वजह से प्रदेश में बिजली लाईन-लाॅस घटकर मात्र 13 प्रतिशत रह गया है इसी कारण वर्तमान विभाग में सभी निगम फायदे में चल रहे हैं।

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