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Sunday Special: दिल्ली अपने अस्तित्व के बाद से 7 बार उजड़ी और बसी, जानिए कैसे

Sunday Special: सात बार आबाद होने के दौरान अलग-अलग शासकों ने यहाँ पर सात शहर बसाए। इसी दौरान विदेशी आक्रमणकारी तैमूरलंग, नादिरशाह और अंग्रेजों ने यहाँ भीषण नरसंहार मचाए। आइए इन सात शहरों के जरिए जानते है दिल्ली के बार-बार बसने और उजड़ने की कहानी।

Sunday Special: दिल्ली अपने अस्तित्व के बाद से सात बार उजड़ी और बसी, जानिए कैसे
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 दिल्ली अपने अस्तित्व के बाद से सात बार उजड़ी और बसी, जानिए कैसे

Sunday Special हमारे देश की राजधानी दिल्ली ज्यादातर समय सुर्खियों में रहती है। इसकी एक या दो नहीं बल्कि कई वजह हैं, लेकिन दिल्ली आज से ही नहीं बल्कि आजादी से पहले और मुंगलों के समय से ही सभी की चहेती रही है। इस दिल्ली ने आजादी से पहले क्या क्या देखा। इस बारे में शायद ही ज्यादा लोग जानते होंगे। इसी कारण... आज हम आप को दिल्ली की कहानी (Story Of Delhi) बताने जा रहे है। इसे अंग्रेजों और मुगलों (British And Mughals) ने कई बार लूटा। हालांकि लूटने के बाद भी इसे यहां के लोगों ने हर बार बड़ी खूबसूरती से बसाया। शायद इसलिए आज दिल्ली को दिलवालों का शहर कहा जाता है। आज हम आपको इसी दिल्ली की कहानी बताने जा रहे है। जिसने अपने अस्तित्व के लिए न जाने कितना दर्द झेला है।

दिल्ली को इंद्रप्रस्थ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी नींव पर ही हुमायूं ने पुराना किला बनवाया था। नीली छतरी और निगमबोध इलाके में भी इंद्रप्रस्थ के होने के सबूत मिले हैं। वहीं, हम बात करे ऐतिहासिक साक्ष्यों की तो दिल्ली के बारे में पहला जिक्र 737 ईसवीं में मिलता है। तब से लेकर अंग्रेजों के शासन काल तक, दिल्ली को सात बार लूटा गया और उतनी ही बार बसाई गई। अलग-अलग शासकों ने यहाँ पर सात शहर बसाए। इसी दौरान विदेशी आक्रमणकारियों ने यहां नरसंहार मचाया था। जिसकी गवाह ये दिल्ली है। आइस इसी सात शहरों के बारे में जानें:-

पहली बार तोमर राजा ने शहर लालकोट को बसाया

दिल्ली के इतिहास में राजा अनंगपाल तोमर की अहम भूमिका मानी जाती है। क्योंकि इंद्रप्रस्थ से 10 मील दक्षिण में अनंगपुर बसाया। यहां दिल्ली का गांव था। कुछ साल बाद उस पर राजा ने लालकोट नगरी बसाई। लेकिन दिल्ली का गांव का नाम चलता रहा।

दूसरी बार कुतुबुद्दीन ने इस शहर को महरौली में बसाया

शहाबुद्दीन ने अपने भरोसेमंद सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक को कमान सौंपी थी। इसके बाद कुतुबुद्दीन ने 1206 में दिल्ली सल्तनत की शुरुआत की थी। कुतुब ने महरौली बसाई थी। यह दिल्ली का दूसरा शहर था। चार साल बाद ऐबक की घोड़े से गिरकर मौत हो गई। ऐबक का दामाद इल्तुतमिश दिल्ली का सुल्तान बन गया था।

तीसरी बार इस शहर को अलाउद्दीन खिलजी ने बसाया था

1296 में अलाउद्दीन खिलजी ने गद्दी पर बैठते ही दिल्ली में प्रवेश किया। उधर, मंगोल शासकों ने उन पर हमला किया तो खिलजी ने उसके सैनिकों के सिर कलम कर दीवारों में चिनवा दिए थे। इस वजह से उसके किले का नाम सिरी पड़ा। खिलजी ने रेवेन्यू सिस्टम बनाया। फौज और बाजारों पर उसका ध्यान था। अस्पताल भी बनवाए। इन कामों में लगे लोग सिरी फोर्ट के अंदर ही रहते थे। किले के अंदर ही पूरी दिल्ली बसा दी गई थी।

चौथी बार गयासुद्दीन तुगलक ने इस शहर को बसाया

गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलकाबाद किले और गयासपुर के आसपास शहर बसाया। यह दौर तुगलक से ज्यादा मशहूर सूफी निजामुद्दीन औलिया और उनके शागिर्द अमीर खुसरो की वजह से जाना गया। औलिया तो महबूब-ए-इलाही कहलाए। वहीं, खुसरो ब्रजभाषा को अरबी-फारसी में पिरोकर हिंदवी जुबान को रंगते रहे। उन्होंने बंदिशें लिखीं। दिलचस्प पहेलियों वाले सुखन लिखे। कव्वाली भी शुरू कराई।

पांचवीं बार फिरोजशाह तुगलक ने फिरोजशाह कोटला बसाया

गयासुद्दीन तुगलक के बाद मोहम्मद बिन तुगलक सुल्तान बना। वह अपनी राजधानी को दौलताबाद ले जाने के बाद दिल्ली लौट आया। इसके बाद उसके चाचा सुल्तान फिरोजशाह तुगलक गद्दी पर बैठे। फिरोजशाह ने यमुना के किनारे कोटला बसाया।

छठीं बार हुमायूं ने शहर दीन पनाह को बसाया

बाबर द्वारा इब्राहिम लोदी के हारने के बाद लोदी जंग में मारा गया। इसके बाद बाबर ने आगरा को राजधानी बनाया, लेकिन उसकी मौत के बाद हुमायूं दिल्ली आ गया। दिल्ली के पुराने किले के पास वाले इलाके को हुमायूं ने दीन पनाह नाम दिया। जिसे 1539 में शेरशाह सूरी ने बदलकर शेरगढ़ कर दिया।

सातवीं बार शाहजहां ने शहर शाहजहानाबाद को बसाया था

जहांगीर और शाहजहां के समय भी आगरा ही मुगलों की राजधानी रही, लेकिन शाहजहां ने बाद में दिल्ली को अपनी राजधानी बना लिया। उन्होंने यमुना किनारे शाहजहानाबाद की नींव रख नए शहर का निर्माण किया था।

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