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मनेन्द्रगढ़ तक था समुद्र का दायरा, करोड़ों वर्ष पूर्व के जीवाश्म पर होगा रिसर्च

छत्तीसगढ़ की धरा में करोड़ों वर्ष पूर्व समुद्र होने की पुष्टि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने की है। राज्य के कोरिया मनेंद्रगढ़ स्थित हसौद नदी के तट पर भू-गर्भ वैज्ञानिकों ने मेराइल फासिल्स की खोज की है। अध्ययन में दावा किया गया है कि नदी किनारे मिले जीवाश्म दो करोड़ 80 से 40 लाख साल पुराने हैं। नदी तट पर मिले जीवाश्म के आधार पर भू-गर्भ वैज्ञानिक क्षेत्र में समुद्र होने की पुष्टि कर रहे हैं।

मनेन्द्रगढ़ तक था समुद्र का दायरा, करोड़ों वर्ष पूर्व के जीवाश्म पर होगा रिसर्च
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गिरीश केशरवानी. रायपुर. छत्तीसगढ़ की धरा में करोड़ों वर्ष पूर्व समुद्र होने की पुष्टि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने की है। राज्य के कोरिया मनेंद्रगढ़ स्थित हसौद नदी के तट पर भू-गर्भ वैज्ञानिकों ने मेराइल फासिल्स की खोज की है। अध्ययन में दावा किया गया है कि नदी किनारे मिले जीवाश्म दो करोड़ 80 से 40 लाख साल पुराने हैं। नदी तट पर मिले जीवाश्म के आधार पर भू-गर्भ वैज्ञानिक क्षेत्र में समुद्र होने की पुष्टि कर रहे हैं।

हसौद नदी के तट पर मिले जीवाश्म को लेकर मनेंद्रगढ़ वनमंडल के वनमंडलाधिकारी ने बायोडायवर्सिटी बोर्ड को 24 मई को बायोडायवर्सिटी हैरिटेज घोषित कर संरक्षित करने के लिए पत्र लिखा है। पत्र के जवाब में बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने इलाके को संरक्षित करने जैव विविधता संरक्षण अधिनियम के तहत जारी दिशा निर्देश का पालन करते हुए जरूरी कदम उठाने के लिए कहा है। साथ ही आने वाले समय में क्षेत्र में इस तरह के जीवाश्म की खोज करने की बात का उल्लेख किया है।

महानदी रिस्क जोन के पास मिला जीवाश्म

पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के भू-गर्भ शास्त्री और विभाग के एचओडी निनाद बोधनकर के मुताबिक मनेंद्रगढ़ में नदी किनारे जो जीवाश्म मिला है, वह महानदी रिस्क जोन के तलहटी में मिला है। भू-गर्भ शास्त्री के अनुसार जो जीवाश्म मिले हैं, वह समुद्री जीवाश्म है। जीवाश्म भू-गर्भ शास्त्री ने जीवाश्म के दो करोड़ 80 से 40 लाख वर्ष पुराना होने का दावा किया है। भू-गर्भ शास्त्री के बताए अनुसार तब समुद्र जमीन के अंदर आ गया था। जहां गंगा का पठार दिखता है, कभी वहां समुद्र था। इसी आधार पर मनेंद्रगढ़ के नदी तट पर मिले जीवाश्म को लेकर भू-गर्भ शास्त्री ने मनेंद्रगढ़ में करोड़ों वर्ष पूर्व समुद्र होने का दावा किया है। भू-गर्भ शास्त्री के अनुसार पत्थर की उम्र की गणना करने के बाद जीवाश्म के उम्र की गणना की जाती है।

पेड़ों के कार्बनीकरण से बना कोल खदान

भू-गर्भ शास्त्री ने यह भी बताया है कि पेड़ों का जो जीवाश्म मिला है, वहां कभी घना जंगल हुआ करता था। पेड़ों के कार्बनिकरण होने की वजह से वह कोयले में तब्दील हो गया। इस वजह से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कोयले का भंडार है। भू-गर्भ शास्त्री के मुताबिक क्षेत्र में खोज करने पर और बड़े पैमाने पर जीवाश्म मिलने की उम्मीद है।

पत्र मिला है, सर्वे किया जाएगा

मनेंद्रगढ़ में हसदो नदी के किनारे मिले जीवाश्म को संरक्षित करने बायोडायवर्सिटी हैरिटेज घोषित कर जैव विविधता पार्क बनाने के लिए वनमंडलाधिकारी का पत्र मिला है। इस आधार पर क्षेत्र को जैव विविधता पार्क बनाने की कार्यवाही की जा रही है। साथ ही नदी किनारे सर्वे का कार्य किया जाएगा।

- अरुण कुमार पाण्डेय, एपीसीसीएफ, चेयरमैन बायोडायवर्सिटी बोर्ड

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