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निकाय की जंग, दिग्गजों पर दांव- भाजपा का घोषणापत्र बनाने विधायकों की ड्यूटी, कांग्रेस ने अपने मंत्रियों को झोंका

नगरीय निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा कमर कसकर मैदान में उतर गए हैं। दोनों ही दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। वहीं बीरगांव जैसे मजबूत क्षेत्र में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भी गुपचुप बिसात बिछाने की शुरुआत कर दी है। पढ़िए पूरी ख़बर...

निकाय की जंग, दिग्गजों पर दांव- भाजपा का घोषणापत्र बनाने विधायकों की ड्यूटी, कांग्रेस ने अपने मंत्रियों को झोंका
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रायपुर: कांग्रेस ने जहां पहले ही अपने प्रत्याशियों के चयन के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी के प्रभारियों का ऐलान कर उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी है। वहीं अब मतदाताओं को लुभाने जन घोषणापत्र तैयार करने के लिए भी समिति का गठन कर दिया है। इस समिति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें चार मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री मोहम्मद अकबर इसके अध्यक्ष बनाए गए हैं। मंत्रियों के साथ संगठन के रणनीतिकारों की भी ड्यूटी लगाई गई है, जिससे पार्टी का जन घोषणापत्र न सिर्फ प्रभावी बने, बल्कि इससे मतदाता आकर्षित हों और कांग्रेस 10 नगरीय निकायों में परचम लहराने के अपने रिकॉर्ड को फिर से दोहरा सके।

दूसरी ओर भाजपा ने भी प्रभारी और सहप्रभारी के रूप में दिग्गजों पर दांव आजमाया है। भाजपा ने जहां अजय चंद्राकर और अमर अग्रवाल को चुनाव की कमान सौंपी है। वहीं अलग-अलग निकायों के मुताबिक भी प्रभारी और सहप्रभारी नियुक्त किए हैं। भाजपा ने दिग्गज नेताओं के साथ ही हर निकाय में विधायकों और संगठन के नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी है। चूंकि यह चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। इसलिए दोनों ही दलों की कोशिश है कि अधिक से अधिक पार्षद जीतकर आएं, ताकि महापौर और अध्यक्ष बनाने में आसानी हो। इधर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का प्रयास है कि बीरगांव जैसे क्षेत्र, जहां उनके नेताओं की अच्छी पकड़ है, वहां पार्टी पार्षद पद पर अधिक संख्या में जीत सके, ताकि मेयर और सभापति चयन में उनकी भूमिका बनी रहे।

अब प्रत्याशी चयन पर टिकी निगाहें

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार भी बायोडाटा नहीं, बल्कि क्षेत्र में पकड़ और परफॉर्मेंस के आधार पर टिकट वितरण होगा। इसके लिए पार्टी ने आंतरिक सर्वे का भी सहारा लिया है। माना जा रहा है कि पहले दौर में पार्टी का सर्वे हो चुका है। अब नामों की स्कूटनी कर जिला कमेटियों के माध्यम से पीसीसी को नाम भेजे जाएंगे। इसके बाद पीसीसी सर्वे और क्षेत्र में पकड़ के आधार पर नाम तय करेगी। इस बार भी पार्टी के दिग्गज नेताओं को मेयर और सभापति बनने पार्षद का चुनाव लड़ना होगा। दूसरी ओर भाजपा में भी टिकट वितरण को लेकर मापदंड तैयार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रभारियों और संगठन के समन्वय से प्रत्याशी तय किए जाएंगे। दोनों ही दलों के टिकट वितरण पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।

भाजपा ने 15 निकायों के लिए दिग्गज नेताओं को जिम्मा दिया है। बीरगांव का जिम्मा खूबचंद पारख के साथ विधायक नारायण सिंह चंदेल को दिया गया है। इसी तरह भिलाई का भूपेंद्र सवन्नी, संतोष बाफना, रिसाली का किरण देव, पुरंदर मिश्रा, भिलाई-चरोदा का शिवरतन शर्मा, अशोक बजाज, जामुल का नीलू शर्मा, सुरेंद्र पाटनी, बैकुंठपुर का भीमसेन अग्रवाल, कमलभान सिंह, शिवपुर चरचा का अनुराग सिंहदेव, ओमप्रकाश जायसवाल, सारंगढ़ का सौरभ सिंह, राजेश शर्मा, खैरागढ़ का संजय श्रीवास्तव, ओपी चौधरी, प्रेमनगर का अखिलेश सोनी, प्रबोध मिंज, मारो का विजय शर्मा, अजय राव, नरहरपुर का लता उसेंडी, रामू रोहरा, कोंटा का संजय पांडेय, भैरमगढ़ का श्रीनिवास मद्दी, धनीराम बारसे और भोपालपट्टनम का लच्छूराम कश्यप व दीपक बाजपेयी को जिम्मा दिया गया है।

नगरीय निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा गठित घोषणापत्र समिति में मंत्री मोहम्मद अकबर अध्यक्ष, मंत्री रविंद्र चौबे, मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, मंत्री अमरजीत भगत, राज्यसभा सांसद छाया वर्मा, प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन, प्रभारी महामंत्री प्रशासन रवि घोष, प्रभारी महामंत्री संगठन चंद्रशेखर शुक्ला, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र साहू, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र साहू, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, प्रदेश कांग्रेस आईटी सेल के अध्यक्ष जयवर्धन बिस्सा सदस्य बनाए गए हैं।

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