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अयोध्या में सरयू आरती को भव्य और अनुशासित बनाने के लिए प्रशासन ने पुजारियों के लिए 'ड्रेस कोड' लागू कर दिया है।

प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या की पहचान बन चुकी 'मां सरयू की संध्या आरती' अब एक नए, सुसंगठित और भव्य स्वरूप में दिखाई देगी। प्रशासन और आरती समिति ने आरती की गरिमा को बढ़ाने के लिए पुजारियों के लिए एक विशेष 'ड्रेस कोड' लागू करने का निर्णय लिया है।

अब तक पुजारी अपनी सुविधा के अनुसार वस्त्र धारण करते थे, लेकिन अब वे सप्ताह के प्रत्येक दिन के लिए निर्धारित विशेष रंगों के परिधानों में ही आरती संपन्न करेंगे। इसका उद्देश्य आरती को अधिक अनुशासित और आध्यात्मिक रूप से आकर्षक बनाना है।

​सात दिन और सात रंग: क्या है नया ड्रेस कोड 

​​​​​​नई व्यवस्था के तहत, सात बेदियों पर विराजमान रहने वाले सभी पुजारी एक समान वेशभूषा में नजर आएंगे। सप्ताह के हर दिन के लिए रंगों का चयन धार्मिक महत्व और ग्रहों की स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया है:

सोमवार और शुक्रवार: इन दो दिनों के लिए 'श्वेत' (सफेद) रंग के वस्त्र निर्धारित किए गए हैं, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक हैं।

मंगलवार: बजरंगबली और शक्ति के प्रतीक के रूप में पुजारी 'भगवा' रंग के वस्त्र धारण करेंगे।

बुधवार: इस दिन के लिए 'हरा' रंग तय किया गया है।

गुरुवार: भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए 'पीतांबर' (पीला) रंग निर्धारित है।

शनिवार: इस दिन पुजारी 'नीले' रंग के परिधानों में आरती करेंगे।

रविवार: सूर्य देव की आभा और ऊर्जा को दर्शाने के लिए 'लाल' रंग के वस्त्र तय किए गए हैं।

​घाटों का सुंदरीकरण और भव्य आरती का स्वरूप 
​ड्रेस कोड के साथ-साथ सरयू के घाटों की भव्यता में भी इजाफा किया गया है। प्रशासन की ओर से 'आरती घाट' का विशेष सुंदरीकरण कराया गया है:

संगमरमर की बेदियां: सरयू तट पर संगमरमर के पत्थरों से सजी 9 नई बेदियां बनाई गई हैं, जो घाट की सुंदरता को चार चाँद लगाती हैं।

छतरीनुमा आकृतियाँ: लाल पत्थरों से निर्मित विशेष छतरीनुमा आकृतियाँ और सेल्फी पॉइंट तैयार किए गए हैं, जहाँ से श्रद्धालु आरती का विहंगम दृश्य देख सकते हैं।

रामायण की झांकियां: घाटों पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों की झांकियां लगाई गई हैं, जो यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

​अनुशासन और आध्यात्मिक सौंदर्य का अनुभव

संध्या होते ही जब सरयू तट दीपों की पंक्तियों से जगमगाता है और शंखनाद की ध्वनि गूँजती है, तो पुजारियों की एकरूप वेशभूषा इस दृश्य को और भी अलौकिक बना देगी। स्थानीय पुजारियों और भक्तों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

उनका मानना है कि इस व्यवस्था से आरती के दौरान एकरूपता दिखेगी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अयोध्या की छवि को और अधिक सुदृढ़ और अनुशासित पेश करेगी।

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