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धर्म संसद के बवाल में कूदे ओवैसी: आयोजक दोबारा करेंगे धर्म संसद का आयोजन, आवैसी ने कांग्रेस पर दागे सवाल

"कांग्रेसियों ने हिस्सा क्यों लिया" असदुद्दीन ओवैसी ने कहा ऐसे सम्मेलन में कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय, कांग्रेस के प्रमोद दुबे (रायपुर नगर निगम के सभापति) ने शिरकत की और अब बवाल के बाद खामोश हैं। सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं है। कांग्रेस ने इस सम्मेलन में हिस्सा क्यों लिया? AIMIM सांसद ने कहा- सम्मेलन कांग्रेस के बिना मुमकिन नहीं था; मुस्लिमों के खिलाफ कही बातों की अनदेखी हुई। पढ़िए पूरी ख़बर..

धर्म संसद के बवाल में कूदे ओवैसी: आयोजक दोबारा करेंगे धर्म संसद का आयोजन, आवैसी ने कांग्रेस पर दागे सवाल
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रायपुर। धर्म संसद में महात्मा गांधी को गाली देने से उठे विवाद में AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े। असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा, रायपुर के 'नर संहारी सम्मेलन' में कालीचरण ने गांधी जी को गाली दी और गोडसे की तारीफ की। इस बात पर आपत्ति जताते हुए राम सुंदर रूठ कर सम्मेलन से चले गए। लेकिन राम सुंदर के संरक्षण में ना सिर्फ महात्मा गांधी को गाली दी गई, बल्कि ये भी कहा गया कि इस्लाम का मकसद राष्ट्र पर कब्जा करना है।

हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने सोशल मीडिया पर धर्म संसद को 'नर संहारी सम्मेलन' बताते हुए कांग्रेस को इन सबके लिए जिम्मेदार ठहराया है। ओवैसी ने कहा, "कालीचरण चाहते हैं कि सांसद, विधायक, मंत्री-प्रधानमंत्री ऐसा होना चाहिए जो कट्‌टर हिंदुत्ववादी हो। लोगों को ऐसा राजा चुनना चाहिए जो कट्‌टर हिंदुत्ववादी हो, चाहे राजनीतिक दल कोई भी हो। क्या राम सुंदर को यह बयान आपत्तिजनक नहीं लगा? क्या ये बयान निंदनीय नहीं है? क्या कालीचरण का ये बयान आपत्तिजनक नहीं लगा? उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में गांधी के खिलाफ कही गई बातों का विरोध हुआ। एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन मुसलमानों के खिलाफ जो कुछ कहा गया उसकी अनदेखी की गई है।

जब दोनों हाथ जोड़कर कालीचरण ने गोडसे को नमस्कार किया तो भीड़ नारे लगाकर तालियां बजाने लगीं, लेकिन राम सुंदर के भाषण को ऐसा समर्थन नहीं मिला। इससे वहां मौजूद लोगों की मानसिकता साफ समझ में आती है। जब कालीचरण यह भाषण दे रहा था तो दर्शकों के बीच कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे, भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने और नंद कुमार साय भी मौजूद थे। किसी ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। कांग्रेस के कैबिनेट मिनिस्टर रैंक के नेता के संरक्षण में हिंदू राष्ट्र, मुसलमानों के नर संहार, लव जिहाद की बातें हुईं। FIR सिर्फ गांधी जी वाले बयान पर दर्ज हुई। क्या हम समझें कि हमारे नर संहार की बात चिंताजनक नहीं है?"

" कांग्रेसियों ने हिस्सा क्यों लिया"

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा ऐसे सम्मेलन में कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय, कांग्रेस के प्रमोद दुबे (रायपुर नगर निगम के सभापति) ने शिरकत की। सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं है। कांग्रेस ने इस सम्मेलन में हिस्सा क्यों लिया?

इधर रायपुर में धर्म संसद के बवाल के बीच आयोजकों ने कालीचरण के बयान से किनारा कर लिया है. मंगलवार को नीलकंठ सेवा संस्थान के फाउंडर नीलकंठ त्रिपाठी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर कहा कि कालीचरण ने जिस भाषा का प्रयोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए किया हम उसकी निंदा करते हैं. उन्होंने जो कुछ कहा इसमें हमारी गलती नहीं है. प्रशासन को हमने एक आवेदन दिया है, हम चाहते हैं कि इस मामले में उन पर कार्रवाई हो.

त्रिपाठी ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कार्यक्रम में सभी संतों से पहले ही कह दिया गया था कि मंच से सिर्फ सनातन धर्म पर बात करें. मगर कालीचरण ने राजनीतिक बात की. मैंने उन्हें टोका तो उन्होंने मंच से ही मुझे डांट दिया और कहा कि साइड हटो, बैठो. इसके बाद जो कुछ उन्होंने कहा वो उनके व्यक्तिगत विचार हैं.

नीलकंठ त्रिपाठी ने एक मीडिया समूह से बातचीत में कहा कि धर्म संसद के बाद प्रस्ताव लाए जाने थे. जिसमें युवाओं को धर्म से जोड़ने, सनानत संस्कृति का प्रचार करने जैसी बातें थीं मगर इस विवाद की वजह से कार्यक्रम बिना किसी निष्कर्ष के खत्म हुआ. मगर हम पीछे नहीं हटेंगे, हम फिर से कार्यक्रम का आयोजन करेंगे. फिर से संत आएंगे और समाज को धर्म और सनातन संस्कृति से जोड़कर दिशा देंगे. कार्यक्रम कब होगा हम जल्द ही तय करेंगे.

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