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विवि संशोधन विधेयक में हस्ताक्षर का आग्रह लेकर राजभवन पहुंचे मंत्री, राज्यपाल बोलीं-यूजीसी से लेंगी मार्गदर्शन

राजभवन और राज्य सरकार में टकराव के हालात, विधेयक को मंजूरी दिलवाने चार मंत्रियों ने की मुलाकात

विवि संशोधन विधेयक में हस्ताक्षर का आग्रह लेकर राजभवन पहुंचे मंत्री, राज्यपाल बोलीं-यूजीसी से लेंगी मार्गदर्शन
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रायपुर. राजभवन और राज्य सरकार के बीच टकराव के हालात टले नहीं है। गुरुवार को राज्य सरकार के विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम को राज्यपाल की मंजूरी दिलाने के सिलसिले में सरकार के चार मंत्री रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, डॉ. शिवकुमार डहरिया, और उमेश पटेल गुरुवार को राज्यपाल अनसुईया उईके से मिले।

राज्यपाल ने मंत्रियों से चर्चा के दौरान ही साफ कर दिया कि वे इस मामले में यूजीसी से मार्गदर्शन लेने और आवश्यक हुआ तो राष्ट्रपति से चर्चा के बाद ही हस्ताक्षर करेंगी। इसी अवसर पर मीडिया से चर्चा में राज्यपाल ने सरकार के साथ किसी भी तरह के टकराव की बात से इनकार किया है।

ये है मामला

राज्य सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित किए थे। ये विधेयक मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजे गए थे लेकिन राज्यपाल ने इन विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। कई महीने बीतने के बाद आखिरकर गुरुवार को सरकार के चार मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल के पास इस आग्रह के साथ पंहुचा था कि वे विधेयक पर हस्ताक्षर कर अपनी मंजूरी दें लेकिन राज्यपाल का वक्तव्य सामने आने के बाद माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को मंजूरी के मामले में कुछ समय और लग सकता है।

संशाेधन विधेयक में ये प्रावधान

कुलपति चयन और हटाने का अधिकार कुलाधिपति के स्थान पर मंत्रीपरिषद काे हाेगा

कुलपति चयन के लिए गठित समिति में कार्यपरिषद द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के साथ राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित किसी भी दूसरे विश्वविद्यालय का कुलपति और राज्य 8शेष पेज 5 पर

सरकार द्वारा नामनिर्देशित व्यक्ति शामिल हाेंगे

कुलपति तब तक अपने पद पर बना रह सकेगा जब तक मंत्रीपरिषद उसकी सेवा लेना उचित समझे

मंत्रीपरिषद के निर्णय के अनुसार कुलाधिपति कुलपति काे किसी भी समय उसके पद से हटा सकेंगे

मंत्रीपरिषद कुलपति की नियुक्ति काे किसी भी समय निरस्त कर सकती है

राज्यपाल काे इसलिए है आपत्ति

कुलाधिपति के रूप में कुलपति चयन और हटाने के अधिकाराें में सीधी कटाैती

यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक यह अधिकार कुलाधिपति काे, विधेयक के प्रावधान उससे अलग

समिति गठित करने और उसमें शामिल हाेने वाले लाेगाें के चयन का अधिकार भी मंत्रीपरिषद काे।

यूजीसी से मार्गदर्शन के बाद हस्ताक्षर

मंत्रियाें से मुलाकात के बाद राज्यपाल अनसुइया उईके भी मीडिया से रूबरू हुईं। उन्हाेंने दाे टूक लहजे में कहा कि फाइलें राेकने की उनकी काेई मंशा नहीं है। चूंकि विधेयक काे लेकर वे संतुष्ट नहीं थीं इसलिए कुछ बिंदुओं पर सरकार से जवाब चाहा था। जवाब एक दाे दिन पहले ही मिला इसलिए मंत्रियाें से चर्चा की। उन्हाेंने यह भी साफ कर दिया कि विधेयक में कुलाधिपति के अधिकाराें काे मंत्रीपरिषद काे देने का उल्लेख है इस कारण सरकार से जानना चाहा था कि इसका औचित्य क्या है। राज्यपाल ने कहा कि यूजीसी ने कुलाधिपति काे ही कुलपति चयन के लिए समिति गठित करने का अधिकार दिया है, ऐसे में नए संशाेधन विधेयक के लिए यूजीसी से मार्गदर्शन लेने के बाद ही वे इस पर हस्ताक्षर करेंगी। राज्यपाल ने जानकारी भी दी कि यूजीसी की गाइडलाइन में यह भी उल्लेख है कि इसके विपरीत प्रावधान लागू हाेने पर अनुदान राेके जा सकते हैं, इसलिए यूजीसी से इस संबंध में मार्गदर्शन मिलने के बाद अगर लगा कि यह प्रदेश के लिए अच्छा है ताे ही वे हस्ताक्षर करेंगी।

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