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International Yoga Day : हजारों शिष्यों को योग सिखा चुके 30 साल के युवा हठयोगी

अपने पिता से सात वर्ष की उम्र में योग की बारीकियां सीख विवेक ने राज्य व देश स्तर पर आयोजित कई प्रतियोगिताओं में जिले का मान बढ़ाया है। योग की उपासना करने का संकल्प कर जीवन का एक ही लक्ष्य चुना कि दुनियाभर के लोगों को योग की विशेषताओं से परिचय कराते हुए जीवन समर्पित कर देंगे। महज 30 साल के इस युवा योग प्रशिक्षक के वर्तमान में हजारों शिष्य हैं, जिन्हें उन्होंने प्रशिक्षित किया है।

International Yoga Day : हजारों शिष्यों को योग सिखा चुके 30 साल के युवा हठयोगी
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अश्वनी मिश्रा. कोरबा. अपने पिता से सात वर्ष की उम्र में योग की बारीकियां सीख विवेक ने राज्य व देश स्तर पर आयोजित कई प्रतियोगिताओं में जिले का मान बढ़ाया है। योग की उपासना करने का संकल्प कर जीवन का एक ही लक्ष्य चुना कि दुनियाभर के लोगों को योग की विशेषताओं से परिचय कराते हुए जीवन समर्पित कर देंगे। महज 30 साल के इस युवा योग प्रशिक्षक के वर्तमान में हजारों शिष्य हैं, जिन्हें उन्होंने प्रशिक्षित किया है।

योग प्रशिक्षक विवेक वैष्णव कहना है कि योग प्राचीन भारत की प्राचीनतम धरोहर है, जिसकी आज पूरी दुनिया कायल है। योग और उसकी महत्ता से विश्व को परिचित कराना ही उसके जीवन का एकमात्र उद्देश्य है। योग के प्रति उसकी रुचि के जनक पिता व बालयोगी स्वामी हजारू वैष्णव हैं, जिनके सानिध्य में उसने 7 वर्ष की उम्र से ही योगाभ्यास शुरू किया। सतत अभ्यास और योग को लेकर ऊंचाइयां छूने का जुनून लेकर उसने सतत प्रयास किया। पंपहाउस कॉलोनी में बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों को योग का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे विवेक ने अब तक हजारों लोगों को योग की बारीकियों से प्रशिक्षित करते हुए नियमित जीवन में योग से जुड़ने प्रेरित किया है। विवेक वर्तमान में दीपका स्थित इंडस पब्लिक स्कूल में योग शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे बच्चों को प्रशिक्षण देते हैं। विवेक योग के सभी प्रमुख मुद्राओं ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, अर्ध उष्टासन, शशांकासन, मरिच्यासन, वक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, मकरासन, पवनमुक्तासन, शवासन, कपाल भारती क्रिया, उज्जायी प्राणायाम, नाड़ीशोधन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, नांदयोग समेत अन्य में पारंगत हैं।

हठयोग देखकर शंकराचार्य हुए मंत्रमुग्ध

तीन साल पहले रायपुर में आयोजित अखिल भारतीय समारोह के दौरान अपने हठयोग का प्रदर्शन कर पुरस्कृत भी हुए। विवेक के योग अभ्यास का प्रदर्शन देख मंत्रमुग्ध हुए समारोह के मुख्य अतिथि व शंकराचार्य स्वामी रामानंदाचार्य ने पुरस्कृत किया। विवेक ने बताया कि संत पवन दीवान के रूप में पहचाने जाने वाले स्वर्गीय अमृतानंद सरस्वती उनके पिता के गुरु रहे हैं, इसलिए वे योग को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने संत के नाम पर एक योगाश्रम की नींव रखना उनके पिता का सपना है। इस आश्रम का नाम वे अमृत आनंद बालविवेक योग दीक्षालय रखना चाहते हैं। पिता का सपना पूरा करने ही विवेक सतत संघर्ष कर रहे हैं।

प्रतिदिन एक साथ योग करता है परिवार

चार भाई-बहनों में सबसे बड़े विवेक को शुरू से ही पिता के साथ योगाभ्यास में लीन रहना ही अच्छा लगता है। पंपहाउस कॉलोनी में रहने वाले विवेक के पिता बालयोगी स्वामी हजारू वैष्णव का बचपन से ही अध्यात्म की ओर झुकाव रहा। वे बाल्यकाल में ही घर छोड़ ज्ञान की तलाश में निकल गए।

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