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Big News : CGPSC की चयन सूची में खामियां, हाईकोर्ट ने शासन और आयोग से मांगा जवाब

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि परीक्षा परिणाम आने के बाद प्रतियोगियों का इंटरव्यू हुआ। इसके बाद चयन सूची जारी होने पर प्रावधान के अनुसार सभी प्रतियोगियों को उनके अंक बताना चाहिए, लेकिन आयोग ने कॉमर्स विषय के प्रतियोगियों को अंक नहीं बताए गए हैं। पढ़िए पूरी खबर-

Big News : CGPSC की चयन सूची में खामियां, हाईकोर्ट ने शासन और आयोग से मांगा जवाब
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रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा परिणाम में कॉमर्स अभ्यर्थियों को बिना नंबर बताए चयन सूची जारी कर दी गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य शासन और आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रतिभागियों को नंबर नहीं बताए गए। आयोग ने जनवरी 2019 को सहायक प्राध्यापक के 27 विषयों के 1384 पद निकाले थे। इसमें कॉमर्स विषय के 184 पदों के लिए 5 नवंबर 2020 को परीक्षा हुई थी। जब परिणाम आया तो 179 प्रतियोगियों की सूची जारी की गई, जबकि 5 पद की सूची ही जारी नहीं की गई है।

सूची में जिन अभ्यर्थियों का नाम नहीं है। उन्होंने अपने अंक जानने के लिए सीजी पीएससी के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किए। लेकिन, तीन माह बाद भी उन्हें अंक नहीं बताए जा रहे हैं। आयोग की ओर से जानकारी नहीं देने पर रायपुर के प्रतियोगी रितेश जायसवाल और निलेश वर्मा ने अधिवक्ता वरुण शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जस्टिस रजनी दुबे ने राज्य शासन व सीजी पीएससी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि परीक्षा परिणाम आने के बाद प्रतियोगियों का इंटरव्यू हुआ। इसके बाद चयन सूची जारी होने पर प्रावधान के अनुसार सभी प्रतियोगियों को उनके अंक बताना चाहिए, लेकिन आयोग ने कॉमर्स विषय के प्रतियोगियों को अंक नहीं बताए गए हैं। इससे भर्ती में गड़बड़ी होने की आशंका जताई जा रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कॉमर्स विषय में राज्य शासन के प्रभावशाली लोगों के परिजन भी शामिल हुए हैं। उनका चयन सूची में नाम है।

सीजी पीएससी के माध्यम से सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर हाईकोर्ट में अब तक दर्जन भर से अधिक याचिकाएं लंबित है। इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने कुछ प्रतियोगियों के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए उन्हें साक्षात्कार में शामिल करने का आदेश भी दिया है। इनमें से एक याचिका में आरक्षण नियमों का पालन नहीं करने का भी आरोप है। इसके चलते अनारक्षित वर्ग के 45 प्रतियोगी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। उन्होंने भी हाईकोर्ट में भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी है। ऐसे ही अलग-अलग विषयों में प्रतियोगियों को वंचित करने का मामला भी है। इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।

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