रायपुर। छत्तीसगढ़ को धर्मांतरण के अभिशाप से मुक्त करने और कमजोर वर्गों को प्रलोभन व दबाव आधारित गतिविधियों से बचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026’ पारित किया। यह कानून अवैध धर्मांतरण पर कड़ी रोक लगाते हुए धार्मिक स्वतंत्रता को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सुरक्षित बनाता है। सख्त दंड, अनिवार्य जांच और स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था के साथ यह अधिनियम राज्य की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में साय सरकार की निर्णायक कार्रवाई को दर्शाता है।
विधेयक का मुख्य उद्देश्य
सरकार का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में कई बार आर्थिक, सामाजिक या मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर प्रलोभन, धोखे या दबाव का इस्तेमाल होता है, जिससे समाज में असंतुलन और असुरक्षा की स्थिति बनती है। इसी समस्या को रोकने के लिए इस विधेयक में जबरन या अवैध धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध घोषित किया गया है।

संस्कृति और आस्था की रक्षा- CM साय
विधेयक पारित होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक संतुलन के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाओं के साथ कहा कि प्रलोभन या भ्रम के जरिए होने वाले धर्मांतरण से समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता रहा है, जिसे यह नया कानून प्रभावी रूप से नियंत्रित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी और कानूनसम्मत होगी, जिसमें पूर्व सूचना और प्रशासनिक जांच अनिवार्य होगी।
सख्त दंड का प्रावधान
साय सरकार ने दंड के प्रावधान इस तरह तय किए हैं कि अवैध धर्मांतरण करने वालों में कानून का स्पष्ट भय स्थापित हो।
•सामान्य मामलों में- 7 से 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना
•महिलाओं, नाबालिगों, SC/ST और OBC से जुड़े मामलों में- 10 से 20 वर्ष तक की कठोर सजा व 10 लाख रुपये या उससे अधिक जुर्माना
•संगठित धर्मांतरण की स्थिति में- आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक का दंड
•पुनरावृत्ति पर सीधे उम्रकैद

स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया अब होगी पारदर्शी
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे पहले प्रशासन को सूचना देनी होगी। इसके बाद अधिकारी यह जांच करेंगे कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भ्रम के तहत नहीं किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
परंपराओं और मूल्यों की रक्षा के लिए अहम- सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 सहित अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने पर विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि यह विधेयक प्रदेश की परंपराओं और मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने में अहम साबित होगा।

विपक्ष की आलोचना और सरकार का स्पष्ट उत्तर
जहाँ विपक्ष इस विधेयक को राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ सरकार ने इसे पूरी तरह जनहित और सुरक्षा आधारित निर्णय बताया है। सरकार का कहना है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन अवैध गतिविधियों के खिलाफ है जो लोगों की स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करती हैं।
सामाजिक स्थिरता की ओर बड़ा कदम
‘धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026’ केवल एक कानून नहीं बल्कि साय सरकार के सुशासन, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक एकता की नीति का प्रतिबिंब है। यह राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए अवैध धर्मांतरण पर कठोर रोक लगाने का प्रयास है, जिससे स्थिरता, सुरक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूती मिलेगी।

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