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गुरुग्राम में नकली दवाओं का भंडाफोड़ हुआ, जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री किराए के फ्लैटों पर इटली की नामी कंपनी के नकली इंजेक्शन बनाया जा रहा था जिसमें दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। ड्रग कंट्रोल विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे केवल लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं या अस्पतालों से ही जीवन रक्षक इंजेक्शन खरीदें।

गुरुग्राम नकली इंजेक्शन कांड: साइबर सिटी गुरुग्राम में नकली दवाओं के एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम ने सेक्टर-62 की एक पॉश सोसाइटी में छापा मारकर नकली इंजेक्शन बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। यह गिरोह चीन से कच्चा माल मंगवाकर गुरुग्राम के किराए के फ्लैटों में इटली की नामी कंपनी के नकली इंजेक्शन तैयार कर रहा था। मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपी अवि शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है।

इटली का लेबल और गुरुग्राम का फ्लैट
ड्रग कंट्रोल अधिकारी अमनदीप चौहान ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से काम कर रहे थे। वे चीन से इंजेक्शन का कच्चा माल (रॉ ड्रग्स) और सस्ती सीरिंज मंगवाते थे। इसके बाद गुरुग्राम के सेक्टर-62 और डीएलएफ फेज-4 के फ्लैटों में पानी मिलाकर नकली इंजेक्शन तैयार किए जाते थे। फर्जी पैकेजिंग, बारकोड और लेबलिंग का पूरा काम मशीनों के जरिए फ्लैट के अंदर ही होता था ताकि किसी को शक न हो।

क्यों था इस इंजेक्शन का क्रेज?
आरोपी इटली की मूल कंपनी की दवा ‘माउनजारो’ का नकली संस्करण बना रहे थे। मूल रूप से यह दवा टाइप-2 डायबिटीज के लिए है, लेकिन तेजी से वजन घटाने (वेट लॉस) के लिए इसकी भारी मांग है। पब्लिक हेल्थ एनालिस्ट समीर भाटी के अनुसार, कई बॉलीवुड सितारों द्वारा मोटापे के लिए इसका इस्तेमाल किए जाने की चर्चा के बाद आम लोगों में भी इसका क्रेज बढ़ गया। इसी मांग का फायदा उठाकर आरोपियों ने 70 लाख की खेप तैयार कर डाली।

सेहत के लिए बेहद खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन नकली इंजेक्शनों के इस्तेमाल से चेहरे पर सूजन और गंभीर एलर्जी हो सकती है। लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर लीवर की गंभीर बीमारियां होने का खतरा है। विभाग अब इस पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रहा है कि ये नकली इंजेक्शन किन-किन शहरों और क्लीनिकों तक पहुंचाए गए।

लाइसेंसधारी से ही खरीदें दवा
ड्रग कंट्रोल विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे केवल अधिकृत लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं या अस्पतालों से ही जीवन रक्षक इंजेक्शन खरीदें। हरियाणा एफडीए ने नकली दवाओं के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है और इस रैकेट के बाकी सदस्यों की तलाश जारी है।

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