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Delhi Electricity Bill: दिल्ली में आने वाले दिनों में बिजली महंगी होने की संभावना है, क्योंकि ट्रिब्‍यूनल ने 30,000 करोड़ के बकाया को लेकर समय बढ़ाने वाली DERC की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

Delhi Electricity Bill: दिल्लीवासियों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि राजधानी में आने वाले दिनों में बिजली के बिल में बढ़ोतरी हो सकती है, ऐसा बिजली अपीलीय ट्रिब्यूनल (APTEL) के एक अहम फैसले के बाद संभव हो सकता है।

दरअसल ट्रिब्यूनल ने दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें लगभग करीब 30,000 करोड़ रुपए के बकाया को चुकाने के समय को बढ़ाने की मांग की गई थी। यह बकाया बिजली बांटने वाली कंपनियों (जिन्हें डिस्कॉम भी कहा जाता है) को किए जाने वाले उन भुगतानों से जुड़ी हुई है, जो अभी शेष है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पैसा बिजली के क्षेत्र में ‘रेगुलेटरी असेट्स’ (regulatory assets) के नाम से जाने वाले बकाया को चुकाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। DERC की ओर से इस बकाया का भुगतान करने के लिए APTEL से समय की मांग उठाई थी कि, अगर इस रकम को चुकाने का समय बढ़ा दिया जाए, तो कंज्यूमर्स के बिजली बिलों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से बचा जा सकता है। लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट की माने तो  ट्रिब्यूनल द्वारा इस अपील को खारिज किए जाने के बाद, अब दिल्ली को बकाया चुकाने के लिए पहले से तय समय का पालन करना पड़ सकता है।  

यह पूरा मामला 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है। कोर्ट ने सभी राज्यों के बिजली नियामकों को निर्देश देते हुए कहा था कि वे  अप्रैल 2024 से इस तरह के बकाया को चुकाना शुरू कर दें, और अप्रैल 2028 तक प्रोसेस को पूरा कर लें। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोर्ट ने नियामकों को छूट दी थी कि अगर बकाया रकम वसूली के लिए जरूरी हो, तो वे बिजली की दरों में भी बदलाव कर सकते हैं।

दिल्ली में हाल के वर्षों में बिजली की दरों में कमी देखी गई है, वहीं दूसरी तरफ  बकाया रकम लगातार बढ़ती रही है, वहीं दिल्ली के हालात दूसरे राज्यों से भी अलग है। दिल्ली में बिजली वितरण का काम प्राइवेट कंपनियों द्वारा किया जाता है, ऐसे में आने वाले महीनों में इस बकाया को चुकाने का बोझ कंज्यूमर्स पर पड़ सकता है। इस बोझ को बिजली के बढ़े हुए बिलों, सरकारी सब्सिडी में कटौती, या फिर इन दोनों के मिले-जुले रूप में कंज्यूमर्स को उठाना पड़ सकता है।  

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