Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

चुनाव आते ही इलेक्शन स्ट्रेटजी बनाने वाली एजेंसियों की बढ़ी पूछ, बंगाल से लेकर उत्तराखंड के लिए ऐसे किया जा रहा काम

चुनाव जीतने के लिए सोशल मीडिया ही नहीं स्ट्रेटजिस्टों का सहारा भी ले रहे हैं प्रत्याशी। निकाय चुनाव से लेकर विधानसभा और संसदिय चुनावों में अपनी जीत दर्ज करने के लिए प्रत्याशी लेते हैं इलेक्शन स्ट्रेटजिस्टों की मदद। बंगाल से उत्तराखंड के चुनावों से पहले ही हुई संजग।

चुनाव आते ही इलेक्शन स्ट्रेटजी बनाने वाली एजेंसियों की बढ़ी पूछ, बंगाल से लेकर उत्तराखंड के लिए ऐसे किया जा रहा काम
X

इस देश में चुनाव को एक पर्व की तरह मनाया जाता है, लेकिन बदलते समय और हाईटेक होते जमाने के साथ चुनाव प्रचार का तरीके में भी बदलाव आया है। जहां पहले चुनाव जीत ने के लिए प्रत्याशी को वोट मांगने के लिए घर घर जाना या सभा करना ही एक विकल्प होता था। अब उस प्रत्याशी के पास एक या दो नहीं बल्कि कई तरीके इजाद हो गये हैं। इसके लिए अलग अलग राजनीतिक दल हो या फिर निर्दलिय चुनाव में खडे होने वाले प्रत्याशी इलेक्शन में जीत पाने के लिए इलेक्शन स्ट्रेटजिस्ट व दूसरी एजेंसियों का सहारा ले रहे हैं।

चुनाव में इस रह से काम रही स्ट्रेटजिस्ट एजेंसियां

चुनाव में प्रत्याशियों के लिए स्ट्रेटजी तैयार करने वाली एक कंपनी के फाउंडर आशिष गुप्ता ने बताया कि हर राजनेता को पब्लिक रिलेशन, इवेंट मैनेजमेंट, ऑनलाइन ब्रांड मैनेजमेंट एंड प्रमोशन की जरूरत होती है। उनकी ब्रांडिंग से लेकर जनता तक उनके इरादों को पहुंचाने के लिए स्ट्रेटजी तैयार की जाती है। गुप्ता के अनुसार, उत्तर प्रदेश का 2017 विधानसभा चुनाव हो या हरियाणा का विधान सभा चुनाव। इस चुनावी अखाडे में उतरने वाले कई प्रत्याशी स्ट्रेटजी बनाने वाली एजेंसियों को हायर करते हैं। स्ट्रेटजी बनाने वाली मेक यू बिग कंपनी ने भी कई प्रत्याशियों के लिए काम कर उन्हें विधानसभा और संसद तक पहुंचाया है। अब बंगाल और उत्तराखंड चुनाव आ गये हैं। ऐसे में प्रत्याशी भी स्ट्रेटजी बनाने वाली एजेंसियों से संपर्क कर रहे हैं। इसके साथ ही एजेंसियां भी पूरी टीम बनाकर अपनी क्लाइंट प्रत्याशियों को विधान सभा तक पहुंचाने के लिए अभी से काम में जुट गई हैं।

इस तरह से तैयार की जाती है रणनीति

चुनाव की स्ट्रेटजी बनाने वाली एजेंसियों की बाकायदा पूरी टीम होती है। इसके लिए कंपनियां सॉफ्टवेयर से लेकर मैन्युअल भी काम करती है। इसके लिए चुनाव से पहले ही काम शुरू हो जाता है। जिसमें बूथ लेवल से लेकर एक कॉल सेंटर, सर्वे और वॉर रूम स्तर पर काम होता है। यहां सबसे पहले एक कॉल सेंटर सेटअप करने से लेकर इसमें कुछ युवाओं का स्टाफ रखा जाता है। जो कॉल करने के साथ ही लोगों को मेल कर उनसे सीधे संपर्क कर अपने क्लाइंट प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाते हैं। लोगों से उनका रिव्यू लेने लेकर उनके आसपास की स्थिती के बारें में जानते हैं। इलेक्शन स्ट्रेटजिस्ट आशीष गुप्ता ने बताया कि प्रत्याशी चुनाव नजदीक आने पर किसी भी काम के लिए परेशान होने की बजाय इस कंपनी को प्रतिस्पर्धी दरों पर एकमुश्त सारा काम देकर राजनीति में ध्यान देते हैं। उन्होंने बताय कि हम अपनी बात करें तो हमारी कंपनी के पास बूथ मैनेजमेंट और वॉर रूम के अपने सॉफ्टवेयर हैं। इनकी मदद से हम प्रत्याशियों को सीधे मतदाताओं से कनेक्ट करते हैं। कंपनी प्रत्याशियों के लिए नए कार्यकर्ताओं की टीम भी हर बूथ पर खड़ी करती है।

बंगाल चुनाव पर चल रहा काम

इलेक्शन स्ट्रेटजिस्ट आशीष गुप्ता ने बताया कि हमारी कंपनी बंगाल में अभी तक 5 विधानसभाओं में काम कर रही है। प्रोफेशनल प्रत्याशी नेताओं को जनता से सीधा संपर्क कराने के लिए बूथ मैनेजमेंट में आये फीडबैक के आधार पर ही आगे की रणनीति बनाते है। साथ ही सर्वे के लिए ऐप की मदद ली जाती है।जिसमें सीधे हर बूथ पर समस्या के वीडियो अपलोड किये जा सकें। और रिसर्च और कंटेंट टीम उसी के आधार पर प्रत्याशी के कार्यक्रम, भाषण, सोशल मीडिया पोस्ट बनाती है। इसी तरह से दूसरी एजेंसियां भी नेताओं से लगातार संपर्क में जुट गई है।

Next Story