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कृषि विधेयकों के खिलाफ विरोध: पंजाब के किसान संगठनों ने केंद्र के साथ बातचीत का न्यौता स्वीकारा

पंजाब के किसान संगठनों ने केंद्र के बातचीत के न्यौते को स्वीकार करने फैसला लेते हुए कहा कि वे तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग करेंगे। यह बातचीत शुक्रवार को दिल्ली में होगी। केंद्रीय कृषि सचिव ने 10 नवंबर को किसान संगठनों को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेलमंत्री पीयूष गोयल से बातचीत का निमंत्रण दिया था।

कृषि विधेयकों के खिलाफ विरोध: पंजाब के किसान संगठनों ने केंद्र के साथ बातचीत का न्यौता स्वीकारा
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पंजाब किसान संगठन

पंजाब में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृष विधेयकों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन ने पूरे देश में सुर्खियां बटौर रखी हैं। इन विरोध प्रदशर्नों की वजह से पंजाब सरकार की परेशान दिख रही हैं। राज्य में रेल सेवाएं ठप होने की वजह से प्रदेश सरकार कई सवालों के घेरे में आ गई है। वहीं अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यह मुद्दा सुलझ सकता है। दरअसल पंजाब के किसान संगठनों ने केंद्र के बातचीत के न्यौते को स्वीकार करने फैसला लेते हुए कहा कि वे तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग करेंगे।

यह बातचीत शुक्रवार को दिल्ली में होगी। केंद्रीय कृषि सचिव ने 10 नवंबर को किसान संगठनों को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेलमंत्री पीयूष गोयल से बातचीत का निमंत्रण दिया था। भारतीय किसान यूनियन (कादियान) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियान ने यहां कहा कि हमने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि हम कल दिल्ली जायेंगे और बातचीत करेंगे। विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की यहां हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।कादियान ने कहा कि हम मांग करेंगे कि इन तीनों कानूनों को निरस्त किया जाए। हम उनसे कहेंगे कि ये कानून गलत हैं।

मालगाड़ियों की बहाली का मुद्दा उठाया जाएगा

उनके अनुसार दो केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान राज्य में मालगाड़ियों की बहाली का मुद्दा भी उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम पंजाब में मालवाहक ट्रेनों की बहाली का मुद्दा उठायेंगे।

कादियान ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान पहले ही रेल मार्गों पर से जाम हटा चुके हैं और उन्होंने मालवाहक ट्रेनों को अनुमति नहीं देने पर केंद्र पर सवाल उठाया। जब उनसे पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की इस अपील के बारे में पूछा गया कि यात्री ट्रेनें भी चलने दी जाएं तो उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन में लगातार ढील दी जाएगी तो कौन लड़ाई लड़ने आएगा। उन्होंने कहा कि हम एक कदम पीछे हट गये ताकि सरकार एक कदम आगे आए लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

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