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सत्तापलट के बाद भी बाहर से समर्थन देने वाले विधायक बेचैन, इसी वजह से छोड़ा था कांग्रेस का दामन

नरोत्तम से मिले दो विधायक रामबाई, शेरा, नाराजगी का कारण जस का तस। पढ़िए पूरी खबर-

सत्तापलट के बाद भी बाहर से समर्थन देने वाले विधायक बेचैन, इसी वजह से छोड़ा था कांग्रेस का दामन
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भोपाल। बाहर से समर्थन देने वाले सपा, बसपा, निर्दलीय विधायक कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में बेचैन थे, भाजपा सरकार में भी उनका यही हाल है। बेचैनी की वजह जो पहले थी, वही अब है। बसपा की रामबाई एवं निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा कांग्रेस सरकार से इसलिए नाराज थे क्योंकि उनके मुताबिक आश्वासन देने के बावजूद उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया था। लिहाजा, भाजपा सरकार बनने की नौबत आई तो उन्होंने पाला बदलने में देर नहीं की। लेकिन अब भी इनकी नाराजगी का कारण जस का तस है। इस बेचैनी के बीच रामबाई एवं शेरा ने मंगलवार को प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की। हालांकि मुलाकात के बाद रामबाई के तेवर ठंडे दिखाई पड़े।

जयंत मलैया से तनातनी के बीच मुलाकात

रामबाई ने नरोत्तम मिश्रा से ऐसे समय मुलाकात की है, जब उनकी भाजपा के वरिष्ठ नेता जयंत मलैया एवं उनके बेटे सिद्धार्थ मलैया से तनातनी चल रही है। सिद्धार्थ दमोह में रामबाई के खिलाफ पत्रकार वार्ता कर चुके है। रामबाई भी सिद्धार्थ को मैदान में आकर निपटने की चुनौती दे चुकी हैं। रामबाई से परेशानी के कारण सिद्धार्थ सार्वजनिक तौर पर रो पड़े थे। हालांकि आज रामबाई जब नरोत्तम से मिलकर वापस आर्इं तो कहा कि उनके जयंत मलैया एवं सिद्धार्थ के साथ कोई मतभेद नहीं हैं।

मंत्री पद को लेकर बदल गए सुर

भाजपा की सरकार बनने के बाद रामबाई ने सार्वजनिक तौर पर बाकायदा नाम लेकर कहा था कि मुझे भाजपा के हर बड़े नेता ने मंत्री बनाने का आश्वासन दिया था। सरकार बन गई है तो उम्मीद है कि ये नेता अपना वादा पूरा करेंगे और मुझे मंत्रिमंडल में शामिल करेंगे। पर मंत्रिमंडल में उन्हें जगह नहीं मिली। हालांकि अब रामबाई के तेवर इस मामले में भी नरम हैं। उनका कहना है कि शिवराज सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा एवं भूपेंद्र सिंह चाहेंगे तो मुझे मंत्री बनाएंगे। नहीं बनाएंगे तो मैं क्या कर सकती हूं। इससे बसपा विधायक की पीड़ा झलकती है।

मंत्री न बनने पर शेरा ने छोड़ा था कांग्रेस का हाथ

निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने कांग्रेस का हाथ इसीलिए छोड़ा था क्योंकि उन्हें कमलनाथ द्वारा मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था। कांग्रेस सरकार के खिलाफ जब पहले चरण में एक दर्जन विधायकों ने बगावत की थी, उसमें शेरा भी शामिल थे। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर बगावत का ऐलान नहीं किया था लेकिन वे बिसाहूलाल सिंह आदि के साथ दूसरे राज्य में होटल में थे। बाद में इन्होंने खुलकर भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया। राज्यसभा चुनाव में भी एक को छोड़कर सभी अन्य विधायकों ने भाजपा का समर्थन किया। लेकिन मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर ये परेशान हैं। शेरा की नरोत्तम तथा भाजपा के अन्य नेताओं से मुलाकात को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

भाजपा में भी सिर्फ जायसवाल को तवज्जो

कांग्रेस सरकार को बसपा के दो, सपा के एक एवं 4 निर्दलीय विधायक समर्थन दे रहे थे लेकिन मंत्री सिर्फ एक प्रदीप जायसवाल को बनाया गया था। भाजपा सरकार में जायसवाल मंत्री नहीं बने लेकिन खनिज विकास निगम का अध्यक्ष बनाकर केबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया। मतलब कांग्रेस की तरह भाजपा ने भी सिर्फ जायसवाल को तवज्जो दी। बसपा, सपा को न पहले जगह मिली थी, न अब मिली। यही हाल शेरा सहित अन्य निर्दलीयों का है। ऐसे में इनका बेचैन होना अस्वाभाविक नहीं है। भाजपा को फिलहाल इनके समर्थन की जरूरत भी नहीं है। सदस्य संख्या के लिहाज से भाजपा के पास सरकार चलाने के लिए पर्याप्त बहुमत है। हां, उप चुनावों के बाद क्या समीकरण बनते हैं, इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।

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