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Himachal Bird FLU: प्रदेश में बर्ड फ्लू का कहर, अब घरों की छतों पर गिरने लगे पक्षी

Himacha Bird FLU: हिमाचल प्रदेश में बर्ड फ्लू कहर बरपा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कांगड़ा के पौंग डैम में पिछले दो महीने से प्रवासी पक्षियों के मरने का सिलसिला जारी है। अब कांगड़ा में स्थिति यह है कि स्थानीय पक्षी में हवा में उड़ते-उड़ते मर रहे हैं।

Himachal Bird FLU: प्रदेश में बर्ड फ्लू का कहर, अब घरों की छतों पर गिरने लगे पक्षी
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प्रतीकात्मक तस्वीर

Himacha Bird FLU: हिमाचल प्रदेश में बर्ड फ्लू कहर बरपा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कांगड़ा के पौंग डैम में पिछले दो महीने से प्रवासी पक्षियों के मरने का सिलसिला जारी है। अब कांगड़ा में स्थिति यह है कि स्थानीय पक्षी में हवा में उड़ते-उड़ते मर रहे हैं। लोगों को अपने घरों की छतों पर भी मरे हुए पक्षी मिल रहे हैं।

क्षेत्र में कौए, मैना, कबूतर, घुग्गियां व अन्य पक्षी भी मर रहे हैं। इससे क्षेत्र में दहशत है। पालतू पक्षियों के मरने का मामला चौंकाने वाला है। इस तरह बर्ड फ्लू की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बर्ड फ्लू से मरने वाले पक्षियों का आंकड़ा 3500 से अधिक हो गया है। अन्य पक्षियों सहित दर्जनों मुर्गे भी बर्ड फ्लू का शिकार हो चुके हैं। पौंग झील के साथ सटे सुगनाड़ा गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी 45 में से 41 मुर्गियां अचानक मर गई।

माना जा रहा है कि कौवे मृत प्रवासी पक्षियों को खाने के बाद उड़कर झील किनारे बसे गांवों में आकर मर रहे हैं। नगरोटा सूरियां निवासी अश्वनी ने कहा कि गांवों में घरों के पास आकर मरने वाले कौवों पर विभाग नजर रखे हुए है। हालांकि, विभाग ने एहतियातन पौंग झील में प्रतिबंध लगाया है। उधर, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्य प्राणी विभाग अर्चना शर्मा ने कहा कि कौवों की मौत पर कार्रवाई करने का जिम्मा पशुपालन विभाग को दिया है।

पशुपालन विभाग पालमपुर के उपनिदेशक डॉ. संजीव धीमान ने कहा कि लोग घरों के पास किसी कौवे या अन्य पक्षी को मरा देखते हैं तो इसकी सूचना नजदीकी पशु चिकित्सालय में दें। पशु चिकित्सालय के अधिकारी मृत कौवों को दफनाने के लिए गांव वासियों का सहयोग करेगा। वेटरनेरी स्टाफ सतर्क है।

संक्रमित पक्षी की बीट में चार दिन से 28 दिन तक रहता है फ्लू

वहीं वन्य प्राणी विंग के डॉ. विपिन ने बताया कि फ्लू संक्रमित पक्षी की बीट में चार दिन से 28 दिन तक फ्लू का संक्रमण रहता है। यदि तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है तो बीट में चार दिन तक वायरस रहता है। अगर 22 डिग्री से कम तापमान है तो फ्लू का वायरस एच5एन1 28 दिन तक रहता है। देहरादून से आई टीम के विशेषज्ञ डॉ. सुरेश ने बताया कि पौंग झील में ऐसा पहली बार हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में बर्ड फ्लू से प्रवासी पक्षियों की मौत हो रही है।

पक्षियों पर नजर रखने के लिए विभाग ने बनाई 10 टीमें

वन्य प्राणी विभाग की प्रधान मुख्य अरण्यपाल अर्चना शर्मा ने बताया कि पौंग झील में बर्ड फ्लू से प्रभावित पक्षियों पर नजर रखने को विभाग ने 55 कर्मचारियों की 10 टीमें बनाई हैं। सुरक्षा के लिए 200 पीपीई किटें मुहैया करवाई हैं। संक्रमण टीम को प्रभावित न करे, इसके लिए टैमी फ्लू दवाई भी उपलब्ध करवाई है। पौंग झील में सतर्कता बढ़ाने को शीघ्र और टीमों का गठन किया जाएगा। पुलिस चौकी प्रभारी सुरिंदर सिंह ने बताया कि प्रशासनिक आदेशों के बाद झील क्षेत्र में नजर रखने के लिए पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है। पुलिस पौंग झील के आस पास पुरी नजर बनाए हुए है।

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