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रोहतक : सिसकियां तोड़ती हैं टिटौली और घिलौड़ की खामोशी, 36 लोगों की मौत से सदमे में गांव

टिटौली में तो शायद ही कोई घर ऐसा बचा हो, जिसका कोई न कोई सदस्य बुखार, खासी-जुकाम की चपेट में न हो। टिटौली में हो रही मौतों की जानकारी प्रशासन के कानों तक पहुंची है।

रोहतक :  सिसकियां तोड़ती हैं टिटौली और घिलौड़ की खामोशी, 36 लोगों की मौत से सदमे में गांव
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रोहतक : गांव टिटौली में सोशल डिस्टेंस के साथ मातमपुर्सी के लिए बैठे लोग। 

अमरजीत एस गिल : रोहतक

यह टिटौली और घिलौड़ कलां गांव की बड़ी त्रासदी है। बीते पांच सात दिन में इन गांव में 36 लोगों की मौत हो गई है। टिटौली में 27 और घिलौड़ में 9 लोग काल का ग्रास बने हैं। घिलौड़ के लोग कहते हैं कि उनके गांव में कोरोना की बजाय दूसरी बीमारियों की वजह से मौत हुई हैं। लोग बुखार और हर्ट अटैक काे लोग मौत का कारण बता रहे हैं। इस गांव में अभी भी लोग बीमार हैं, लेकिन टिटौली के लोग कहते हैं कि उनके गांव मेंं हुई मौतों को कारण कोरोना है। पीड़ित परिवारों में कुछ ऐसे हैं, जिनके सामने रोजी का संकट खड़ा होगा। ऐसेमें प्रशासन ने फौरी आर्थिक मदद करनी चाहिए।

टिटौली में तो शायद ही कोई घर ऐसा बचा हो, जिसका कोई न कोई सदस्य बुखार, खासी-जुकाम की चपेट में न हो। टिटौली में हो रही मौतों की जानकारी प्रशासन के कानों तक पहुंची है। गत एक मई को पंचायत विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे और सेनिटाइजेशन करवाया। स्वास्थ्य विभाग ने भी 75 लोगों की कोरोना जांच की। इतनी मौत के बाद भी यहां दिक्कत यह है कि लोग भय के मारे कोविड-19 का टैस्ट नहीं करवा रहे हैं। लोगों का तर्क है कि पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद बीमारी का कोई इलाज तो है नहीं,फिर टैस्ट करवाने का फायदा क्या। इनका तर्क है कि पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद बीमारी को लेकर इतना भय हो जाता है कि आदमी मानसिक रूप से टूट जाता है।

25 से शुरू हुई मनहूसी

बताया जा रहा है कि टिटौली गांव में मौतें होने का सिलसिला बीती 25 अप्रैल को शुरू हुआ। एक के बाद एक 23 लोगों की जान गत शनिवार तक चली गई। लोगों के मुताबिक किसी को एक तो किसी दो दिन बुखार हुआ और चला बसा। कुछ लोगों पर तो घंटों में ही मौत ने झपटा मार दिया। छह दिनों में हालात इतने भी खराब हुए कि एक व्यक्ति का दाह संस्कार करके लोग घर लौटते तो दूसरे की माैत हो जाती। लोगों ने चाैबीस घंटे में चार-चार अर्थियों को कंधा दिया।

हर गली में रोने की आवाज

टिटौली की गिनती बड़े गांव में होती है, लेकिन मौत के आंकड़ों ने गांव को इतना छोटा कर दिया है कि अब हर गली में खामोशी है। प्रियजनों के चले जाने के बाद महिलाओं और बच्चों के रोने की आवाजें आती हैं। ये आवाजें कठोर से कठोर ह्दय वाले व्यक्ति का भी कलेजा फट जाए। कोरोना को लेकर इतना भय है कि लोग एक दूसरे के यहां मातपुर्सी भी डरे-सहमे से जा रहे हैं। गांव में दो दर्जन के करीब मौत हो गई हैं।

स्वास्थ्य लाभ लेना बूते से बाहर

मौत कितनी भी क्रूर क्यों न हो, लेकिन वह लोगों के हौसले को नहीं तोड़ पाई है। टिटौली गांव में किसी व्यक्ति के गम्भीर अवस्था में होने की जानकारी मिलते ही गांव के मौजिज व्यक्ति उसके घर हौसला बढ़ाने के लिए पहुंच जाते हैं। लेकिन लोगों के सामने यह कितनी बड़ी विडम्बना है कि वे बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को इलाज के लिए कहीं ले नहीं जा सकते। एक तो कोरोना का कोई इलाज नहीं है। दूसरे अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह भी नहीं हैं। अगर अस्पताल में किसी तरह से भर्ती भी हो जाएं तो यहां का प्रतिदिन खर्च वहन करना ग्रामीणों के बूते की बात नहीं है।

जिन परिवारों में मौत हुई है, उनमें से कई आर्थिक स्थिति काफी खराब है। प्रशासन को तुरंत ऐसे परिवारों की फौरी मदद करनी चाहिए। संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं। -चांद सिंह कुंडू, सदस्य पूर्व पंचायत समिति लाखनमाजरा

टिटौली और घिलौड़ में हो रही मौतों पर प्रशासन की पूरी नजर है। गत 1 मई को गांव टिटौली में मैं खुद गया था। गांव में सेनिटाइजेशन करवा दिया गया है। मैं लोगों से अनुरोध करूंगा कि वे मॉस्क हर हाल में लगाएं और एक दूसरे से दो गज की दूरी बनाए रखें। - राजपाल चहल, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी लाखनमाजरा एवं रोहतक

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