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गऊ सेवा : सांड के टूटे सींग को देखकर मन पसीजा तो इस सख्स ने असहाय गोवशों के लिए खोल दी गौशाला

कहते हैं ''खुदा भी अपनी रहमतों की उस पर बरसात करता है, जो जरूरतमंद की मदद के लिए आगे हाथ करता है'' कुछ इसी प्रकार की सोच बनाकर बवानीखेड़ा के हरिकेश शर्मा के मन में आई और असहाय पशुओं के लिए यकायक मंशा पैदा हुई और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

गऊ सेवा : सांड के टूटे सींग को देखकर मन पसीजा तो इस सख्स ने असहाय गोवशों के लिए खोल दी गौशाला
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 बवानीखेड़ा में असहाय गोवंश की सेवा करते हुए हरिकेश शर्मा व अन्य सहयोगी।

बवानीखेड़ा ( भिवानी )

कहते हैं ''खुदा भी अपनी रहमतों की उस पर बरसात करता है, जो जरूरतमंद की मदद के लिए आगे हाथ करता है'' कुछ इसी प्रकार की सोच बनाकर बवानीखेड़ा के हरिकेश शर्मा के मन में आई और असहाय पशुओं के लिए यकायक मंशा पैदा हुई और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। देखते ही देखते उनका सहयोग करने वालों का कारवां जुड़ता गया और आज उनकी मीनी गोशाला में तीन दर्जन से अधिक गोवंश शामिल है जिनकी दिनरात सेवा करके पूरा परिवार जी जान से जुटा है।

ऐसे हुई भावना उत्पन्न

बवानीखेड़ा के वार्ड आठ मंे सुशीला शर्मा व सतपाल शर्मा के घर पांच संतानों में सबसे छोटे हरिकेश शर्मा ने जीवन में अलग हटकर मिसाल पैदा करने का काम किया है। पिता सतपाल शर्मा की मानें तो उसके दो पुत्र व तीन पुत्रियां हैं जिनमें संजय शर्मा, सीमा, मंजू, पूजा हैं और 22 वर्षीय सबसे छोटा है हरिकेश। वर्ष 2010 में साइकिल चलाते समय एक सांड के सींग टूटे होने और उसके सींग से टपकते खून व आंखों से निकलते आंसू ने उसका झकझोर कर रख दिया और अपने ताऊ गो सेवक सतबीर शर्मा को वाक्या बताया जिससे सभी ने मिलकर उनका उपचार किया।

नहीं रूके कदम ओर जीवन का बनाया लक्ष्य

हरिकेश शर्मा ने बताया कि सांड के टूटे हुए सींग में परिवार के पूर्ण सहयोग करने पश्चात उनके मन में असहाय गोवंशों की सेवा करने की भावना जागृत हो गई ओर नगर पालिका के पूर्ण सहयोग से 4 कनाल भूमि में उन्हें तोशाम के गांव दरियापुर की बाबा सोमवारपुरी विकलांग सेवाधाम ट्रस्ट से मीनी गोशाला की स्थापना की। जहां पर घायल, अपाहिज, बीमार गोवंश की सेवा कर कार्य शुरू किया। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके पिता गो सेवक सतपाल शर्मा ने भी कदम कदम पर उनका हौंसला बढ़ाया।

अकेले कदम बढ़ाए और बन गया कारवां

हरिकेश शर्मा की मानें तो उन्होंने पहले अकेले कदम बढ़ाए जिसमें परिजनों ने सहयोग किया ओर देखते ही देखते उनके सहयोगियों का एक कारवां बन गया है जिसमें प्रवीण, हेमंत, भक्ता, उमेश, शिंपी, गौरव, ऋषि सहित अनेक साथियों का सहयोग बना हुआ है। हालांकि इस कार्य में प्रतिमाह 40 से 50 हजार का खर्च आता है जिसमें दवाई सहित चारा भी शामिल है जिसमें वे सभी मिलकर सहयोग करते हैं। इस कार्य में राजकीय पशु अस्पताल के चिकित्सकों की भी सेवा लेकर उपचार करने में सहयोग करते हैं।

विभाग से और सहयोग की अपील

हरिकेश शर्मा सहित मीनी गोशाला से जुड़े सदस्यों ने बताया कि नपा के सहयोग से उन्हें भूमि दी गई है यदि इसे पूर्णतया से उन्हें समर्पित कर दिया जाए और यहां पर गोवंश के लिए शैड सहित अन्य सहायता के लिए सहयोग किया जाए ताकि इन असहाय गोवशों की सेवा की जा सके।

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