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रोशनी ने बेटियों के लिए जगाई शिक्षा की अलख

रोशनी ने पिछड़े दबके में शिक्षा का अलख जगाई। एक शिक्षक के रूप में शैक्षणिक सेवा कार्य शुरू करने वाली रोशनी शर्मा ने पर्यावरण, जनसंख्या, साहित्यिक गतिविधियो के लिए भी लगातार अभियान चलाया है। उनके प्रयासों से विशेष रूप से उन बालिकाओं को शिक्षा के अवसर मिले व जीवन में आगे बढ़ने के मुकाम मिले जो उपेक्षित, दबे वर्गों से संबंध रखती हैं।

रोशनी ने बेटियों के लिए जगाई शिक्षा की अलख
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रोशनी शर्मा 

प्रवीण शर्मा : चरखी दादरी

शिक्षाविद रोशनी शर्मा का जीवन भर शिक्षा की रोशनी जलाने, समाज के हर तबके तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचाने के लिए जीवन समर्पित रहा है। रोशनी ने पिछड़े दबके में शिक्षा का अलख जगाई। एक शिक्षक के रूप में शैक्षणिक सेवा कार्य शुरू करने वाली रोशनी शर्मा ने पर्यावरण, जनसंख्या, साहित्यिक गतिविधियो के लिए भी लगातार अभियान चलाया है। उनके प्रयासों से विशेष रूप से उन बालिकाओं को शिक्षा के अवसर मिले व जीवन में आगे बढ़ने के मुकाम मिले जो उपेक्षित, दबे वर्गों से संबंध रखती हैं। रोशनी शर्मा का मानना है कि समाज में बदलाव, व्यवस्था परिवर्तन, समानता, समता के लिए विशेष रूप से महिला शिक्षा का तेजी से प्रसार करना होगा। शिक्षा भी उन तबकों तक पहुंचे जिन्हें वर्षों तक उपेक्षित रखा गया है।

रोशनी ने सन 1976 में दादरी नगर की शिक्षण संस्था डीआरके आदर्श विद्या मंदिर से एक शिक्षिका के रूप में अपने सेवाकाल की शुरुआत की तथा खंड शिक्षा अधिकारी तक का सफर तय किया। सन 1989 में मुख्याध्यापिका के रूप में हरियाणा शिक्षा विभाग में नियुक्त हुई। उन्होंने बतौर मुख्य अध्यापिका अटेला कलां, मोरवाला, समसपुर, तिवाला इत्यादि गांव में कन्या शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयास किए। उन्होंने उन परिवारों से संपर्क साधा जो आम तौर पर लड़कियों को स्कूलों में भेजने या महज प्राथमिक शिक्षा तक ही रखते थे।

उन्होंने लड़कियों के लिए विशेष वजीफे, प्रोत्साहन, सहायता व प्रेरणा देकर उन्हें उच्च शिक्षा देने के लिए निरंतर प्रयास किए। सन 2001 में रोशनी शर्मा ने दादरी के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्या के तौर पर कार्य संभाला तथा लगातार 9 वर्षों तक यहां काम किया। इस दौरान उन्होंने नगर की पिछड़ी बस्तियों, कालोनियों के परिवारों की कन्याओं को 12वीं तक शिक्षा देने, उनकी प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें विभिन्न गतिविधियों में आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास किया। उनके सेवाकाल के दौरान सामान्य व आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की सैकड़ों छात्राओं ने प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल की। कन्याओं की शिक्षा के साथ साथ रोशनी शर्मा पर्यावरण संरक्षण, साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ाने, सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए निरंतर प्रयासरत रही है।

मिला सम्मान

सन 2006 में प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी महेंद्र सिंह मलिक ने रोशनी शर्मा को छात्राओं के खेलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष सम्मान से नवाजा। सन 2007 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने उन्हें पर्यावरण क्षेत्र में जन चेतना उत्पन्न करने के लिए किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया। इसके अलावा जनगणना, समाज में कुरीतियां मिटाने, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समय समय पर विभिन्न मंचों से उन्हें सम्मानित किया जाता रहा।

साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय

रोशनी शर्मा एक शिक्षिका, शिक्षाविद के साथ साथ साहित्यिक गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय रही हैं। विभिन्न कवि सम्मेलनों में उनकी रचनाएं श्रोताओं को भाव विभोर करती रही हैं। खंड शिक्षा अधिकारी रूप में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने शिक्षा सेवा कार्य से अपना संबंध बनाए रखा, जो आज भी निरंतर जारी है। उनके जीवन का लक्ष्य मरते दम तक ज्ञान व शिक्षा की लौ को जलाए रखना है।

महिला शिक्षा के लिए चेतना आंदोलन की जरूरत : रोशनी

रोशनी शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी साधनों, वेतन, सुविधाओं को महत्व नहीं दिया। उनके जीवन का आनंद उन छात्राओं के उज्जवल भविष्य के साथ जुड़ा रहा है जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल की हैं। रोशनी शर्मा ने अपने शैक्षणिक सफर के कुछ संस्मरण सांझे करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे परिवारों को काफी समीप से देखा है जो सामाजिक परंपराओं, आर्थिक हालातों के कारण अपनी बेटियों को स्कूलों में भेजना तो दूर उन्हें घरों से बाहर निकालने में भी संकोच करते रहे हैं। उनका प्रयास रहा है कि ऐसे परिवारों की लड़कियों में शिक्षा से ही जागरूकता संभव है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचेगा राष्ट्र निर्माण का सपना पूरा नहीं होगा। इसमें भी महिलाओं की समान रूप से भागेदारी जरूरी है। केवल सरकारी प्रयासों से यह सपना पूरा नहीं होगा। समाज के जागरूक, साधन सम्पन्न लोगों, स्वयं सेवी संस्थाओं से जुड़े लोगों को आगे आना होगा। महिला शिक्षा को राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर हमें नीति और नियत निर्धारित करनी होगी।

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