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अब प्लास्टिक, सोलिड व ई-वेस्ट से भरेगा खजाना

अब प्लास्टिक, सोलिड व ई-वेस्ट से भरेगा खजाना
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भिवानी : एमआरएफ सेंटर के अंदर प्लास्टिक , सोलिड व ई वेस्ट एकत्रित करने के लिए बनाए गए रूम। 

कुलदीप शर्मा: भिवानी

कहते हैं कि अगर किसी कार्य को करने का मन हो तो उसे कम संसाधन होते हुए भी पूरा किया जा सकता है तथा अगर संसाधनों की कमी नहीं हो तो किया हुआ कार्य सोने पर सुहागे जैसा कार्य करता है। ऐसा ही कुछ नगर परिषद के अधिकारियों ने कर दिखाया है।

भिवानी दादरी रोड पर डंपिंग प्वाइंट के पास बनाए गए एमआरएफ यानि (मैटीरियल रिकवरी फैसेलिटी) सेंटर के सौंदर्यकरण को देखने के लिए आस पास के लोग भी आ रहे हैं। सेंटर के बाहर अब से पहले तक कचरा ही कचरा नजर आता था अब उसके स्थान पर आने वाले कुछ महीनों के बाद हरे भरे पड़े नजर आएंगे जिससे एक तो राहगीरों को दुर्गंध से परेशान नहीं होना पड़ेगा दूसरा पर्यावरण को भी सुरक्षित करने में सहायता प्राप्त होगी। इतना ही नहीं सेंटर पर अब नगर परिषद प्लास्टिक वेस्ट, सोलिड वेस्ट व ई वेस्ट के माध्यम से अपना खजाना भरेगी। इसके लिए शहर के बाजारों से एकत्रित होने वाले सूखे कचरे का सेग्रीगेशन का कार्य भी शुरू हो चुका है।

नियुक्त किए गए कर्मचारी अलग अलग कमरों में अलग अलग कचरा एकत्रित कर रहे हैं तथा जब कमरा पूरी तरह से भर जाएगा तो उस कचरे को बेचा जाएगा जिससे नप की आमदनी होगी। इस कार्य को पूरा करवाने के लिए नगर परिषद के सफाई निरीक्षक विकास देशवाल तथा स्वच्छ भारत मिशन के शहरी टीम लीडर सन्नी शर्मा ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। कर्मचारियों के साथ मिलकर हर छोटे से छोटा कार्य जब दोनों अधिकारी करते गए तो देखते ही देखते न सिर्फ एमआरएफ सेंटर शुरू हुआ बल्कि उसका रूप ही बदल दिया गया।

अंदर की तरफ लगाई गई है ग्रीन नेट

एमआरएफ सेंटर के अंदर की तरफ दीवार के चारों तरफ ग्रीन नेट लगाई गई है। यह नेट इसलिए लगाई गई है ताकि अंदर कचरे के सेग्रीगेशन का कार्य तथा कचरा राहगीरों को दिखाई न दे क्योंकि कर्मचारी एमआरएफ सेंटर में सुबह से शाम तक कार्य करते हैं। नप अधिकारियों ने एमआरएफ सेंटर के बाहर जहां गड्ढे खोद कर पौधे रोपित किए हैं तो वहीं दूसरी तरफ सेंटर के अंदर भी गमलों में अलग अलग प्रकार के पौधे लगाए गए हैं। कुछ ही दिनों बाद यह पौधे जब बड़े होंगे तो एमआरएफ सेंटर की शोभा बढ़ाने के साथ साथ पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी अपनी भूमिका निभाएंगे।

चारों तरफ लोहे की लगवाई गई है तार

एमआरएफ सेंटर के बाहर गड्ढे खोद पौधे रोपित किए गए हैं। इन पौधों को बेसहारा पशु नुकसान पहुंचा सकते थे इस बात को ध्यान में रखते हुए नप के सफाई निरीक्षक विकास देशवाल ने जितनी दूरी में पौधे रोपित किए गए हैं उतनी दूरी में खंभे गाड़ कर लोहे की तार लगवाई गई है ताकि बेसहारा पशु पौधों तक न पहुंच सके। इतना ही नहीं एमआरएफ सेंटर की दीवार पर जल्द ही पेंटिंग भी बनवाई जाएगी फिलहाल दीवारों पर लाल रंग का पेंट करवाया गया है ।

एमआरएफ सेंटर पूरी तरफ तैयार

इस बारे में नगर परिषद के सफाई निरीक्षक विकास देशवाल ने बताया कि एमआरएफ पूरी तरह से तैयार हो चुका है। प्लास्टिक , सोलिड व ई वेस्ट को अलग अलग एकत्रित किया जा रहा है। सेंटर के बाहर लोहे तार लगवाकर पौधे रोपित किए गए हैं तथा जल्द ही दीवार पर सुंदर पेंटिंग बनवाई जाएगी।

अगस्त माह में हुआ था निर्माण कार्य शुरू

डंपिंग प्वाइंट पर बनकर तैयार हुए एमआरएफ सेंटर के लिए जुलाई माह में टेंडर लगाए गए थे तथा अगस्त माह में एक कंपनी द्वारा इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था। 17 लाख 29 हजार रुपये की लागत से तैयार हुए सेंटर को बनाने को मुख्य उद्देश्य रोजाना शहर से निकलने वाले कचरे का हर रोज ही छटनी करने का था जो सार्थक होता दिखाई दे रहा है। नगर परिषद की तरफ से एमआरएफ सेंटर पर छह कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है जो शहर से एकत्रित किए गए कचरे को सेग्रीगेशन करने का कार्य कर रही हैंं। जो कचरा खाद बनने लायक होता है उसकी खाद बनाने के लिए कंपोस्ट पीट में डाला जा रहा है तथा अन्य कचरे को अलग स्थान पर एकत्रित किया जा रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण में एमआरएफ सेंटर अपनी अहम भूमिका निभाएगा। इस बार सर्वेक्षण में इस बात पर भी खास ध्यान दिया जाएगा कि शहर से निकलने वाले कचरे का निस्तारण नगर परिषद कर रहा है या नहीं। वहीं दूसरी तरफ डंपिंग प्वाइंट पर पड़े हजारों टन कचरे को सेग्रीगेशन करने के लिए नगर परिषद की तरफ से पहले ही टेंडर लगाया हुआ है जिसका कार्य भी जल्द शुरू होने की संभावना है।

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