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मंडी हो या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, सभी प्रकार की फसलों पर हो एमएसपी, उजमा बैठक और किसान चैंबर्स आफ कॉमर्स ने परित किए 15 प्रस्ताव

भारत सरकार द्वारा लाये गए तीन नए कृषि अध्यादेशों के अवलोकन हेतु देश दुनिया में फैले हरियाणियों के संगठन उजमा बैठक ने किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स ऑनलाइन 5 घंटे 45 मिनट लम्बी कांफ्रेंस की।

मंडी हो या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, सभी प्रकार की फसलों पर हो एमएसपी, उजमा बैठक और किसान चैंबर्स आफ कॉमर्स ने परित किए 15 प्रस्ताव
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हरिभूमि न्यूज. रोहतक

भारत सरकार द्वारा लाये गए तीन नए कृषि अध्यादेशों के अवलोकन हेतु देश दुनिया में फैले हरियाणियों के संगठन उजमा बैठक ने किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स ऑनलाइन 5 घंटे 45 मिनट लम्बी कांफ्रेंस की। कांफ्रेस में 15 बिंदुओं पर देश-विदेश के कृषि एक्सपर्ट्स, अर्थशास्त्री, साइंटिफिक व कानून एक्सपर्ट्स, कृषि समाज के सामाजिक और खाप प्रतिनिधियों ने 15 प्रस्ताव पास किए| कांफ्रेंस की शुरुआत उज़मा बैठक की परम्परागत शैली के तहत दादा नगर खेड़े की जय और सर्वखाप की अनुमति से की गई| भारत सरकार के पूर्व कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कांफ्रेंस को प्रेजाइड किया|

कांफ्रेस में देश विदेश के करीब 30 वक्ताओं ने अपने विचार रखे। भारत से सरदार रमनदीप सिंह मान व सुरेश देशवाल, चौधरी रामकरण सौलंकी, चौधरी बलजीत सिंह मलिक, कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर भीम सिंह दहिया, डॉक्टर जगदीश चंद्र डागर, इंजीनियर एसएस संधू व डॉक्टर अनिल पंघाल, कृषि सामाजिक व मूवमेंट्स विशेषज्ञ कर्नल एमएस दहिया, राकेश कुमार बैंस, कृषि व्यापारिक विशेषज्ञ रविंद्र सिंह मलिक, वीरेंदर नरवाल, प्रदीप श्योराण, अधिवक्ता विनोद दहिया, सीनियर पत्रकार वीरेश तरार, हरवीर सिंह पंवार, शोधार्थी शालू पहल ने अध्यादेशों का नपा-तुला खाका खोला|

इनके साथ ही विदेशों से अमेरिकी जमींदार ब्रायन केलिहर के इंटरव्यू की वीडियो चलाई गई, जिससे समझा गया कि अमेरिका में किसानी की भारत की तुलना में क्या स्थिति है| इसके अतिरिक्त विदेशों में बसे व वहां से अपने देश के उदारवादी जमींदारी के पहलुओं व् हितों में गहन रुचि रखने वाले विभिन्न एनआरआई ने भी बड़े सलीके से अध्यन व शोध किए हुए विचार रखे, जिनमें अमेरिका से सविता धनखड़, इंग्लैंड से सरला चौधरी, कुलदीप अहलावत व योगिता बांगड़, ऑस्ट्रेलिया से महेंद्र चौधरी, फ्रांस से फूल कुमार और यूएई से नेपाल सिंह सहरावत ने मिलकर आंकलन कर के निम्नलिखित 15 प्रस्ताव पास किए। ये प्रस्ताव अब सरकार व कृषि से जुडे संगठन व संस्थाओं को पहुंचाए जाएंगे।

1. मंडी हो या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, फसल का एमएसपी हर सूरत में सुनिश्चित रखा जाए। किसी भी उपज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होनी चाहिए, चाहे खरीद मंडी परिसर में हो या किसी अन्य स्थान पर। सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रावधान हो। न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून लागू हो। न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे खरीद अपराध घोषित हो। फसलों का डेढ़ गुना मूल्य स्वामीनाथन फॉर्मूला के अनुसार घोषित हो, जिसके अन्तर्गत सी2 फैक्टर की सही तरीके से गणना की जाए|

2. डिस्प्यूट रेसोलुशन में किसान व् कांट्रेक्टिंग ट्रेडर दोनों को देश के हर स्तर के न्याय मिलने की व्यवस्था हो| किसान को इस मामले में सिर्फ एसडीएम या कलेक्टर तक न्याय की अपील लगाना निहायत गैर-व्यवहारिक व उसके मौलिक अधिकारों का हनन है| देश के कानून में सब बराबर हैं, के मौलिक अधिकार के तहत किसान को भी हर स्तर पर कानूनी मदद लेने की बराबर की छूट हो| जहाँ किसान गरीब हो, वहां उसको कानून खर्चों में विशेष तरजीह दी जाए|

3. आपातकालीन स्थिति में निर्यात स्टॉक भी देश की जनता के लिए देश हित में उपलब्ध हो|

4. आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत काला बाजारी रोकने के उद्देश्य से स्टॉक लिमिट लागू की जाए। जैसे कि पेरिशेबल वस्तुओं के स्टॉक की अनुमति 100% प्राइस बढ़ोतरी तक नहीं अपितु 50% तक रखी जाए व ऐसे ही नॉन-पेरिशेबल की 50 प्रतिशत की बजाए 25 प्रतिशत रखी जाए|

5. किसी भी खरीद संबंधी वाद-विवाद से बचने के लिए त्रिपक्षीय समझौता होना चाहिए जिसमें किसान, सरकार या सरकार का प्रतिनिधि और खरीदने वाला पक्ष शामिल हो|

6. किसान को वैधानिक और सामाजिक संरक्षण प्राप्त हो, जिसमें ग्राम पंचायत, सामाजिक संस्थाएं जैसे कि खाप पंचायत के प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक लोग शामिल हों| देश में जहां खाप पंचायत ना हों, वहां उनके समानांतर जो संस्थाएं हों वो शामिल हों|

7. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के अन्तर्गत आनुवंशिक विविधता का संरक्षण होना चाहिए। कॉरपोरेट या औद्योगिक समूह की विकास कार्य हेतु आर्थिक सामाजिक एवम् नैतिक जिम्मेदारी तय की जाए, जैसे कि सीएसआर का पैसा उसी क्षेत्र के विकास हेतु लगे जहाँ कॉर्पोरेट का कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का करार हो|

8. किसान उत्पादक संगठन योजना की समीक्षा होनी चाहिए।

9. हर घर में भंडारण की व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण की सुविधा होनी चाहिए

10. जमींदार फसल विविधकरण अपनाए, साथ में डेयरी मछलीपालन अपनाकर आमदनी बढ़ाए।

11. सामाजिक, राजनैतिक एवम् धार्मिक नेताओं पर किसानों के हितों के संरक्षण के मुद्दे पर समर्थन देने के लिए दवाब बनाए। इन तीनों ही प्रकार के प्रतिनिधियों से किसान-जमींदार वर्ग मदद के लिए मिलें व समर्थन में आने को कहें|

12. किसान-जमींदार व् देश की तरक्की में सबसे बड़े बाधक जातिवाद, वर्णवाद व धर्मवाद गैर-कानूनी व आपराधिक घोषित किये जाएं।

13. जमीदारों को फार्मिंग एंड मार्केटिंग स्किल से ले अन्य प्रोफेशनल कारोबारों व नौकरियों में उत्तम दर्जे की शिक्षा गाम स्तर पर उपलब्ध करवाई जाए।

14. किसानों के ऊपर से लैंड-होल्डिंग का बैरियर हटाया जाए व उनको भी कॉर्पोरेट वालों की तरह सैंकड़ों-हजारों एकड़ की जमीन रखने की छूट हो|

15. जैसे कि एक दुकान का न्यूनतम किराया 10000 हजार रूपये हो परन्तु दुकानदार को उम्मीद या निर्धारित टारगेट से डबल लाभ होता है तो उसको दुकान के मालिक के साथ बढ़ी हुई आमदनी में भी हिस्सा देना होता है, ऐसे ही कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में निर्धारित प्राइस पर व्यापारिक तर्ज पर बढ़े हुए प्राइस में भी किसान का हिस्सा हो।

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