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Makar Sankranti : इस बार 15 जनवरी को भी मनेगी मकर संक्रांति, मांगलिक कार्य होंगे शुरू, जुलाई माह तक विवाह के 60 मुहूर्त

ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य अपनी नियमित गति से राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य के इसी राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। खगोलीय घटना के अनुसार सूर्य हर वर्ष धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है और हर बार यह समय लगभग 20 मिनट बढ़़ जाता है। इसलिए 72 साल बाद एक दिन का अंतर पड़ जाता है।

Makar Sankranti 2022 : मकर संक्रांति के दिन ना करें ये तीन काम, जानें क्या बरतें सावधानियां
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Makar Sankranti

हरिभूमि न्यूज : बहादुरगढ़

मकर सक्रांति इस बार पौष शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन 14 जनवरी को शुक्ल और ब्रह्म योग के मंगलकारी संयोग में मनाई जाएगी। वहीं मतमतांतर के साथ मकर संक्रांति का पर्वकाल 15 जनवरी को भी माना जाएगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र रहेगा। चूंकि हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देव कहा गया है। जो प्रतिदिन साक्षात दर्शन देकर सारे जगत में ऊर्जा का संचार करते हैं। मकर संक्रांति पर्व पर आसमान में पतंग उड़ाने और पैच लड़ाने का सिलसिला प्रारंभ होता है। तरह-तरह की पतंग बाजार में उपलब्ध है। पतंगबाजी को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य अपनी नियमित गति से राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य के इसी राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। खगोलीय घटना के अनुसार सूर्य हर वर्ष धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है और हर बार यह समय लगभग 20 मिनट बढ़़ जाता है। इसलिए 72 साल बाद एक दिन का अंतर पड़ जाता है। पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास यह संक्राति 10 जनवरी के आसपास पड़ती थी और अब यह 14 व 15 जनवरी को होने लगी है। वर्ष 2018 में 14 जनवरी और 2019 और 2020 में यह 15 जनवरी को पड़ी थी। गणना यह है कि पांच हजार साल बाद मकर संक्राति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनानी पड़ेगी।

दरअसल, 14 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में प्रवेश रात आठ बजकर 49 मिनट पर हो रहा है। इसका पुण्यकाल अगले दिन ( 15 जनवरी ) को दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। ऐसे में मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी दोनों की दिन मनाई जा सकेगी। साल में 12 संक्रांति तिथियां पड़ती हैं। जिनमें से मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण है। ज्योतिषियों का कहना है कि मकर सक्रांति का सामान्य फल विद्वान और शिक्षित के लिए लाभकारी रहेगा। अनिष्टकारी न होने के बावजूद भी डर और चिंता का वातावरण बनेगा।

जनवरी से लेकर जुलाई तक विवाह के 60 मुहूर्त

मकर संक्रांति के साथ ही मांगलिक कार्यों के सीजन का श्रीगणेश होगा। जनवरी से लेकर जुलाई तक विवाह के 60 मुहूर्त हैं।

जनवरी में 22, 23, 24, 25 और फरवरी में 5, 6, 7, 9, 10, 11, 12, 18, 19, 20, 22 को विवाह होंगे।

मार्च में 4 व 9 और अप्रैल में 14, 15, 16, 17, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 27 को शादियां होगी।

इसके अलावा मई में 2, 3, 9, 10, 11, 12,1 5, 17, 18, 19, 20, 21, 26, 27, 31 को शादियां होगी।

जून में 1, 5, 6, 7, 8, 9,10, 11, 13, 17, 23, 24 को शादियों के शुभ मुहूर्त हैं।

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