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पगड़ी बांधने में माहिर हरिकेश पपोसा को मिला सम्मान तो रो पड़े पिता, पढें पूरी खबर

अपनी मेहनत और ईमानदारी सहित पगड़ी बांधने की कला सहित अनेक सामाजिक कार्यों के चलते हरिकेश पपोसा सभी की आंखों के तारे बने हुए हैं।

पगड़ी बांधने में माहिर हरिकेश पपोसा को मिला सम्मान तो रो पड़े पिता, पढें पूरी खबर
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मंच पर सम्मानित होते हरिकेश पपोसा।

दीपक कुमार डुमड़ा : बवानीखेड़ा

कहते हैं ''कोई कुछ भी कहे ये बात पक्की होती है, पिता की डांट में ही बेटे की तरक्की होती है''' ऐसे ही हल्की फुल्की पिता की लाड प्यार की डाट और प्यार ने हरिकेश पपोसा को ऊँचाईयों तक ले जाने का काम किया और सभी का दिवाना बना दिया। अपनी मेहनत और ईमानदारी सहित पगड़ी बांधने की कला सहित अनेक सामाजिक कार्यों के चलते हरिकेश पपोसा सभी की आंखों के तारे बने हुए हैं। अनेक कुरितियों को समाप्त करने को लेकर इन्हें कुरूक्षेत्र में हरियाणा सरकार के कला परिषद ने कोरोना काल में की गई सांस्कृति सेवा के लिए सम्मानित किया गया। हालांकि इस मौके पर इनके पिता जगदीश पपोसा भी मौजूद रहे।

हालांकि इस मौके पर इनके पिता जगदीश पपोसा भी मौजूद रहे। मंच पर हरिकेश पपोसा द्वारा उन्हे मंच पर बुलाकर अपने पिता के हाथों सम्मान ग्रहण किया। उन्होंने पिता से सम्मानित होकर आज की युवा पीढ़ी को करारा जवाब दिया है जो अपने वृद्ध माता पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं। वहीं उन्हें प्रदेश के शिक्षा मंत्री कवंर पाल गुर्जर के सौजन्य से डॉ. रामेन्द्र विद्या भारत शिक्षा संस्थान के निदेशक एवं सदस्य संस्कृति मंत्रालय भार सरकार, मदन मोहन छाबड़ा मानद सचिव कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड, कला परिषद हरियाणा सरकार के निदेशक संजय भसीन के हाथों होने का सम्मानित होने का मौका मिला।

पगड़ी पहनाने में है महारत हासिल

हरिकेश पपोसा ने चंद सैकिंडों में देखते ही देखते सिर पर पगड़ी पहनाई जाती है। सिर पर पगड़ी को व्यक्ति के सिर का मान, इज्जत माना जाता है और इनके द्वारा कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में डॉ. महासिंह पूनिया के रत्नावली में पंच साल पहले पगड़ी के प्रचार प्रसार से एक तूफान सा ला दिया और जीवन का लक्ष्य हरियाणवी संस्कृति का प्रचार प्रसार करना बन गया।

कुछ यूं चलाए अभियान

इनके द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में पर्यावरण सुरक्षा पोलिया उन्मूलन कार्यक्रम, सफाई स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान, जल सेवा राष्ट्र विकास में युवाओं की भागीदारी पर कार्यक्त्रम, एड्स व नशीले पदाथोंर् पर जागरूकता शिविर का आयोजन, गांव में बच्चों का सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास, देश भक्ति गीत भावना पैदा करना, राष्ट्रीय युवा उत्सव में प्रतिभागीता, अनेक राष्ट्रीय एकता शिविर में प्रतिभागीता, वर्तमान में हरियाणवी संस्कृति का बढ़ावा देने के लिए पगड़ी का प्रचार प्रसार, हरियाणवी कविताएं, नाटक जो समाज में सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता पैदा करती है, पानी से भरी टोकनी को दातों से उठाने की कला आदि शामिल हैं।

यहां हुए सम्मानित

हरिकेश पपोसा को कुरूक्षेत्र राहगीरी मंच, 1997 में गणतंत्र दिवस, 1998 में कॉलेज कलर रोल ऑफ रोल आफॅ ऑनर अवार्ड, 1999 में जिला सर्वश्रेष्ठ युवा अवार्ड, 2000 नेहरू येवा केन्द्र जिला सर्वश्रेष्ठ अवार्ड, 2001 खेल एवं युवा कार्यक्त्रम विभाग में, वर्ष 2002 में शिक्षा विभाग हिसार, 2004 में स्वास्थ्य विभाग हिसार, 2004 में राज्य सर्वश्रेष्ठ युवा अवार्ड, 2003 में भिवानी रेडक्रास, 2013 में ग्रीन आइडियल राज्य स्तरीय अवार्ड, 2015 में इंटरनेशनल युवा पुरस्कार, हरियाणा कला परिषद, हरियाणवी लेखक का पुरस्कार सहित अन्य जिलों में अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। हालिया प्रतिष्ठित संसथा प्रेरणा वृद्ध आश्रम में जयभगवान सिंगला व रेणू खुग्गर के नेतृत्व में कार्य कर रहे हैं। हरिकेश पपोसा को चीफ जस्टिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट स्पेशल सम्मानित किया गया तो वर्ष 2006 में फोरेस्ट विभाग द्वारा भी सम्मान से नवाजा गया।

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