Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

अब पशुओं में फैला रोग : बहादुरगढ़ में खच्चर और हिसार में दो घोड़ियों में मिला ग्लैंडर्स, जानें इस बीमारी के बारे में

यह एक जीवाणुजनित रोग है, जो हर नस्ल और उम्र के गधे-घोड़ों के अलावा मनुष्यों में भी फैल सकता है। इसके बाद नाक लगातार बहती रहती है और शरीर पर जगह-जगह फोड़े निकल आते हैं।

अब पशुओं में फैला रोग : बहादुरगढ़ में खच्चर और हिसार में दो घोड़ियों में मिला ग्लैंडर्स, जानें इस बीमारी के बारे में
X

बहादुरगढ़ शहर में एक स्थान पर मौजूद घोड़े। (फाइल फोटो)

मनीष कुमार. बहादुरगढ़

एक तरफ जहां कोरोना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, वहीं अब पशुओं में भी एक वायरस (ग्लैंडर्स) सामने आया है। हिसार में दो घोड़ियों और बहादुरगढ़ में एक एक खच्चर ग्लैडर्स बीमारी से ग्रसित मिले हैं। यह एक जीवाणुजनित रोग है, जो हर नस्ल और उम्र के गधे-घोड़ों के अलावा मनुष्यों में भी फैल सकता है। इसके बाद नाक लगातार बहती रहती है और शरीर पर जगह-जगह फोड़े निकल आते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में संक्रमित पशु को वैज्ञानिक तरीक से मारना ही पड़ता है।

बहादुरगढ़ के गांव बामड़ोली स्थित एक ईर्ंट भट्ठे पर काम में लगाए गए खच्चर की ग्लैंडर्स रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। केस मिलने के बाद पशु पालन विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने इलाके में घोड़ों, गधों और खच्चरों का डाटा जुटाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा बामड़ोली के पांच किलोमीटर के दायरे में हरेक घोड़े, गधे और खच्चर की जांच होगी। यह प्रक्रिया शनिवार को शुरू हो सकती है।

दरअसल, इन दिनों घोड़ों की प्रजातियों के पशुओं में ग्लैंडर्स नाम का संक्रमण फैल रहा है। इस संक्रमण की चपेट में आने से पशु गले में दर्द, नाक बहना, गले में सूजन, भूख न लगना व तनाव आदि से ग्रस्त हो जाते हैं। बहादुरगढ़ के गांव बामड़ोली स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम में लगाए गए खच्चर में भी इस तरह के लक्षण नजर आए थे। इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग ने जांच की थी। इस सस्पेक्टेड केस को लुवास स्थित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में जांच के लिए भेजा गया। इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही विभाग भी हरकत में आया है। अधिकारियों ने बामड़ोली गांव का दौरा किया है। यह खच्चर किसी अन्य पशु के संपर्क में भी आया होगा। इसलिए विभाग द्वारा भट्ठे सहित आसपास तमाम पशुओं के सेंपल लिए जाएंगे। पशु पालकों का भी स्वास्थ्य जांचा जाएगा। इस सिलसिले में शुक्रवार को विभाग के अधिकारियों ने पशु चिकित्सकों की मीटिंग ली।

आज से होगी सेंपलिंग

पशु पालन विभाग के एसडीओ रवींद्र ने बताया कि इलाके में एक केस की पुष्टि हुई है। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब न केवल उस ईंट भट्ठे बल्कि बामड़ोली समेत आसपास के पांच किलोमीटर के एरिये में घोड़े की प्रजाति के हरेक पशुओं की जांच की जाएगी। सभी के सेंपल लिए जाएंगे। यदि कोई संदिग्ध केस मिलता है जो जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा अन्य इलाकों में भी इस संबंध में जांच अभियान जारी रहेगा। इस संबंध में चिकित्सकों की बैठक ली गई है। इलाके में मौजूद गधों-घोड़ों का डाटा जुटाया जाएगा। शनिवार से सेंपलिंग शुरू कराने की कोशिश रहेगी। पशु चिकित्सकांे से भी यह रिपोर्ट मांगी है। पशु पालक भी मामले को गंभीरता से लें और सहयोग दें। अपने पशुओं का ख्याल रखें। यदि कुछ शंका हो तो अपने इलाके के पशु अस्पताल में जाकर जांच कराएं।

ग्लैंडर्स बीमारी क्या है

ग्लैंडर्स घोड़ों की प्रजातियों का एक जानलेवा संक्रामक रोग है। इसमें घोड़े की नाक से खून बहना, सांस लेने में दर्द, शरीर का सूखना, शरीर पर फोड़े या गाठें आदि लक्षण हैं। यह संक्रामक बीमारी दूसरे पालतू पशुओं में भी पहुंच सकती है। यह बीमारी बरखोडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है। ग्लैंडर्स होने पर घोड़े को वैज्ञानिक तरीके से मारना ही पड़ता है। घोड़ों के संपर्क में आने पर मनुष्यों में भी यह बीमारी आसानी से पहुंच जाती है। जो लोग घोड़ों की देखभाल करते हैं या फिर उपचार करते हैं, उनको खाल, नाक, मुंह और सांस के द्वारा संक्रमण हो सकता है। मनुष्यों में इस बीमारी से मांस पेशियों में दर्द, छाती में दर्द, मांसपेशियों की अकड़न, सिरदर्द और नाक से पानी निकलने लगता है।

मनुष्यों पर ग्लैंडर्स का प्रभाव

घोड़ों के संपर्क में आने पर मनुष्यों में भी यह बीमारी आसानी से पहुंच जाती है। जो लोग घोड़ों की देखभाल करते हैं या फिर उपचार करते हैं, उनको खाल, नाक, मुंह और सांस के द्वारा संक्रमण हो सकता है। मनुष्यों में इस बीमारी से मांस पेशियों में दर्द, छाती में दर्द, मांसपेशियों की अकड़न, सिरदर्द और नाक से पानी निकलने लगता है।

Next Story