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पूर्व विधायक किताब सिंह मलिक का निधन, सीएम मनोहर लाल ने जताया दुःख

छत्तीसगढ़ में हुए सड़क दुर्घटना में पूर्व विधायक किताब सिंह मलिक की 9 पसलियां टूट गई थी। जिसके बाद से उनका इलाज चल रहा था।

पूर्व विधायक किताब सिंह मलिक का निधन, सीएम मनोहर लाल ने जताया दुःख
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पूर्व विधायक किताब सिंह मलिक (फाइल फोटो)

गोहाना विधानसभा से दो बार विधायक रहे किताब सिंह मलिक (83) का स्वर्गवास हो गया। मंगलवार को उनका पैतृक गांव आंवली में अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता व ग्रामीण पहुंचे। मलिक अक्टूबर, 2020 में बरोदा विधानसभा के उपचुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं उनके निधन पर सीएम मनोहर लाल समेत अनेक राजनेताओं और धार्मिक संगठनों के लोगों ने भी शोक जताया है।

मुख्यमंत्री ट्वीट कर लिखा गोहाना से पूर्व विधायक किताब सिंह मलिक के निधन का समाचार दुःखद है। मैं ईश्वर से इस दुःख की घड़ी में शोक संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करने एवं दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ।

किताब सिंह छत्तीसगढ़ में खेती करते थे। 13 मार्च को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मोटरसाइकिल से गिरने से मलिक की दायीं पसलियां टूट गई थीं। तब से न वे बोल पा रहे थे और न खाना खा पा रहे थे। रविवार को स्वजन उन्हें रायपुर से कुरुक्षेत्र उनके भतीजे के पास लाए थे। सोमवार की रात को उनका स्वर्गवास हो गया। मंगलवार सुबह उनके पैतृक गांव आंवली में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में कांग्रेस से गोहाना हलका के विधायक जगबीर सिंह मलिक, बरोदा हलका के विधायक इंदुराज नरवाल, दीनबंधु छोटूराम स्मारक समिति के अध्यक्ष डा. कपूर सिंह नरवाल, इनेलो नेता ठेकेदार प्रेम सिंह मलिक, जजपा नेता भूपेंद्र सिंह मलिक, भाजपा नेता पहलवान योगेश्वर दत्त, गोहाना जाट महासभा के अध्यक्ष बलवान सिंह पन्नू आदि पहुंचे।

गोहाना से 7 बार विस लड़ा चुनाव

किताब सिंह मलिक का जन्म 1938 में गांव आंवली में हुआ था। बीए पास 1970 में राजनीति में सक्रिय हो गए थे। उन्होंने गोहाना विधानसभा से सात बार चुनाव लड़ा और दो बार जीते। 1977 में गोहाना विधानसभा से जनता पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 1982 में उन्होंने लोकदल की टिकट पर चुनाव जीता। 1987 में एलकेडी (ए) की टीम पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 1991 में निर्दलीय विधायक बने। उन्होंने 1996, 2000 और 2009 में निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। मलिक 2009 का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए थे। बरोदा हलका के उपचुनाव के दौरान करीब छह माह पहले भाजपा में शामिल हुए थे।

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