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पूर्व मंत्री तेजेंद्र मान के बेटे की हार्ट अटैक से मौत, 2014 में कांग्रेस की टिकट पर कलायत से लड़ा था विधानसभा चुनाव

परिजनों ने बताया कि बॉबी एक दिन पहले ही अपने दोनों बेटे व भतीजे के साथ करनाल स्थित घर में लौटे थे। परिवार के साथ बातचीत के बाद रात को सोने चले गए। सुबह जब उन्हें खाना खाने के लिए उठाया तो वे बेसुध मिले। उन्हें लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचे तो वहां पर डॉक्टरों ने बताया कि बॉबी की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है।

पूर्व मंत्री तेजेंद्र मान के बेटे की हार्ट अटैक से मौत, 2014 में कांग्रेस की टिकट पर कलायत से लड़ा था विधानसभा चुनाव
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रणबीर उर्फ बॉबी मान का फाइल फोटो

हरिभूमि न्यूज : करनाल/ कैथल

पूर्व मंत्री तेजेंद्र पाल मान (तेजीमान) के छोटे बेटे रणबीर उर्फ बॉबी मान की आकस्मिक मौत हो गई। तबीयब बिगड़ने पर परिजन बॉबी मान को डॉक्टर के पास लेकर गए। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए शवगृह में भेज दिया। बॉबी मान ने 2014 में कांग्रेस की टिकट पर कलायत विधानसभा से चुनाव भी लड़ा था। परिजनों ने बताया कि बॉबी एक दिन पहले ही अपने दोनों बेटे व भतीजे के साथ करनाल स्थित घर में लौटे थे।

परिवार के साथ बातचीत के बाद रात को सोने चले गए। सुबह जब उन्हें खाना खाने के लिए उठाया तो वे बेसुध मिले। उन्हें लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचे तो वहां पर डॉक्टरों ने बताया कि बॉबी की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। करीब 49 वर्षीय मान निरंतर विभिन्न गतिविधियों के जरिये लोगों से जुड़े रहते थे। हरियाणा विधानसभा के वर्ष 2014 में हुए चुनाव के दौरान कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने रणवीर मान को कलायत से पार्टी टिकट दिया था। उस दौरान उनका चुनावी रण में आजाद उम्मीद जयप्रकाश जेपी, भाजपा से धर्मपाल शर्मा और प्रदेश के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा से हुआ था। भले ही मान चुनाव हार गए बावजूद इसके उनका जुड़ाव निरंतर क्षेत्र के हर वर्ग से बना रहा।

परिवार की पहचान को रखा था बरकरार

मूलरूप से गांव घोघडीपुर के निवासी तेजेंद्र पाल मान के तीसरी पीढ़ी के पूर्वज राय बहादुर बंस गोपाल का अंग्रेजी शासन में पूरा डंका बजता था। इनके बाद रणधीर सिंह मान ने बडे़ उद्योगपति और क्रिमिनल केसों के माने हुए एडवोकेट के तौर पर अपने परिवार की पहचान को ओल्ड पंजाब से लेकर नवीन हरियाणा तक बरकरार रखा था।

पिता रहे मंत्री

वर्ष 1991 में तेजेंद्र पाल मान हलका पाई से विधायक बने। वह तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल की सरकार में राज्य मंत्री रहे। 2005 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बावजूद निर्दलीय पाई हलका से चुनाव जीतकर विधायक बने और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार का बाहर से समर्थन किया। तेजेंद्र पाल मान ने वर्ष 2009 में कलायत विधानसभा से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा था। पाई विधानसभा को परिसीमन में समाप्त कर दिया गया था। इसके मद्देनजर मान ने कलायत विधानसभा क्षेत्र की डगर पकड़ी। उस दौरान वे कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भी रहे हैं। कलायत के विकास की बड़ी कसक हमेशा मान परिवार को रही है।

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