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किसान आंदोलन : वाटरप्रूफ शेड के नीचे तैयार होता है किसानों का लंगर

इस क्रम में ठहरने के लिए अधिक तंबू और लंगरों को वाटरप्रूफ करने का काम तेज हो गया है। रविवार को पटियाला के किसानों ने मेट्रो यार्ड के निकट नया वाटरप्रूफ पंडाल बना दिया।

किसान आंदोलन : वाटरप्रूफ शेड के नीचे तैयार होता है किसानों का लंगर
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हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़। कृषि कानूनों के विरोध में शहर के टीकरी बॉर्डर से लेकर बाईपास तक चल रहे आंदोलन में शामिल किसानों को बारिश से बचाने के लिए अलग-अलग कवायद तेज हो गई हैं।

इस क्रम में ठहरने के लिए अधिक तंबू और लंगरों को वाटरप्रूफ करने का काम तेज हो गया है। रविवार को पटियाला के किसानों ने मेट्रो यार्ड के निकट नया वाटरप्रूफ पंडाल बना दिया।

बता दें कि गत दिनों हुई बारिश से आंदोलनकारियों के टैंटों में पानी भर गया। किसानों के गद्दे और कंबल तक भीग गए। लंगर की रसोई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा इसके बाद किसान वाटरप्रूफ पंडाल बनाने में जुट गए हैं।

पटियाला जिले के वालंटियर्स की टीम ने शहर के बाईपास पर मेट्रो यार्ड के निकट सर्विस लेन में पक्का पंडाल तैयार कर लिया। जबकि पुराने पंडालों पर डबल तिरपाल डालकर वाटरप्रूफ बनाया जा रहा है। किसान आंदोलन को आज 45 दिन हो गए।

हर रोज की भांति सुबह किसानों ने हाईवे पर लंगर के आसपास फैली गंदगी को हटाने के लिए सफाई अभियान चलाया। वहीं सर्विस लेन में लंगरों को वाटरप्रूफ बनाने का काम तेज हो गया। इसके बाद लंगरों में खाना बनाने की तैयारी शुरू हुई।

किसानों का कहना है कि बारिश की संभावना को देखते हुए वाटर प्रूफ पंडाल बनाया गया है। जिन पंडालों में पानी आ गया था, सबसे पहले उनपर डबल तिरपाल डालकर उसे कवर किया गया। युवा किसान गुरजीत सिंह का कहना है कि लंगरों में बरसाती पानी से समस्या ज्यादा रहती है। इसीलिए पक्का पंडाल बनाया गया है। बारिश होने के बाद सड़क पर जलभराव और जगह-जगह गंदगी फैलने से किसानों को दिक्कत हुई। भविष्य में बारिश से किसानों को दिक्कत न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम कराया जा रहा है।



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