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हरियाणवी कॉमेडियन दरियाव सिंह मलिक का निधन, ऐसी रही चुटकुले के बादशाह की लाइफ

86 साल के दरियाव सिंह मलिक अपनी हाजिरजवाबी और चुटकुले सुनाने के लिए मशहूर थे और चंद्रावल फिल्म में रूंडा के किरदार ने उनको हरियाणा में पहचान की वो ऊंचाइयां दी जो बहुत कम लोगों को नसीब होती है। उनके साथ ही रूंडा के रूप में नसीब सिंह कुंडू भी स्थापित हो गए थे।

हरियाणवी कॉमेडियन दरियाव सिंह मलिक का निधन, ऐसी रही चुटकुले के बादशाह की लाइफ
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हरियाणा की पहली सुपरहिट फिल्म चंद्रवाल ने कई कलाकारों को नाम और शोहरत दी थी और उन्हीं में से एक थे अभिनेता और कॉमेडियन दरियाव सिंह मलिक। हरियाणवी संस्कृति का ये सितारा अपने अंतिम सफर पर निकल गया है और हरियाणवी सिनेमा में कॉमेडियन दरियाव सिंह मलिक का नाम सबसे पुराने और पॉप्युलर लोगों में हमेशा गिना जाता रहेगा।

86 साल के दरियाव सिंह मलिक अपनी हाजिरजवाबी और चुटकुले सुनाने के लिए मशहूर थे और चंद्रावल फिल्म में रूंडा के किरदार ने उनको हरियाणा में पहचान की वो ऊंचाइयां दी जो बहुत कम लोगों को नसीब होती है। उनके साथ ही रूंडा के रूप में नसीब सिंह कुंडू भी स्थापित हो गए थे।

फिल्मी दुनिया भी दरियाव सिंह की कायल थी। दरियाव सिंह मलिक को पहला 1983 में हरियाणवी भाषा में बनी राज्य की पहली सुपरहिट फिल्म चंद्रावल मिला था। रंगमंच के इस जिंदादिल ऑलराउंडर ने कुल 19 हरियाणवी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवाया और दरियाव सिंह मलिक ने बड़े बजट की हरियाणवी फिल्म जाट में अंकल का रोल निभाने पर खूब प्रसद्धि हासिल की। दरियाव सिंह मलिक पानीपत के गांव उग्राखेड़ी के रहने वाले थे और उन्हें हंसी ठिठोली करने का शौक बचपन से ही रहा। उन्होंने ने पहले आकाशवाणी से चलने वाले कार्यक्रम से अपने कैरियर की शुरुआत की थी।

दरियाव सिंह ने बताते थे कि बात उन दिनों की है जब उनके गांव उग्राखेड़ी में ग्रामोफोन मशीन आई थी। यह मशीन सबसे पहले उनके घर ही आई। उस समय वो तीसरी कक्षा में पढ़ते थे।उनके गुरु सरदार गुरदयाल सिंह बेदी ने उनको एक गाना सुनाने को कहा। मैंने उन्हें भजन सुनाया। गाना सुनते ही उन्होंने मेरी पीठ थप थपाकर कहा, शाबाश, एक दिन तू जरूर बड़ा कलाकार बन देश में नाम रोशन करेगा। उसी थपथपी ने मुझे इस मुकाम तक पहुंचा दिया।पहले ग्रामोफोन द्वारा रिकॉर्ड किए गए प्रोग्राम रेडियो पर प्रसारित किए जाते थे. साल 1969 में उन्हें रेडियो में होने वाले ऑडिशन का पता चला और वह दिल्ली चले गए, इनका सिलेक्शन हो गया। रात 10 बजे के बाद इन्हें रोहतक की आकाशवाणी से कार्यक्रम करने का मौका मिला। वह इतने फेमस हो गए कि लोग उनके प्रोग्राम सुनने के लिए बेताब रहते थे।

दरियाव सिंह मलिक को 28 मिनट के कार्यक्रम के लिए ₹450 हर महीने मिलते थे. इसके बाद उन्हें हरियाणवी फिल्म चंद्रावल में हास्य कलाकार खूंडा का किरदार करने का मौका मिला. उन्होंने यह नहीं सोचा था कि यह हरियाणवी फिल्म इस तरह सुपर डुपर हिट होगी और खूंडे और रूंडे की जोडी वर्षों तक लोगों को हंसाती रहेगी।

हरियाणवी फिल्म चंद्रावल में हास्य कलाकार के किरदार निभाने के बाद उन्हें एक के बाद एक कई फिल्मों से रोल मिलने लगे. इसके बाद उन्होंने फिर बॉलीवुड इंडस्ट्री कदम रखा. उन्होंने यश चोपड़ा द्वारा बनाई गई फिल्म मेरे डैड की मारुति में बड़े साहब का रोल निभा चुके हैं।

मैट्रिक पास दरियाव सिंह मलिक हिंदी, पंजाबी, इंग्लिश सभी भाषाओं को बड़ी बखूबी तरीके से बोलते थे. फिल्मों में काम करने के बाद उन्हें पब्लिक रिलेशन विभाग में लगाया गया. वह अपने समय में वॉलीबॉल खेल के स्टेट लेवल के खिलाड़ी भी रहे थे।

फिल्मों में हास्य कलाकार का किरदार निभाने और हास्य कला में शोहरत बटोरने पर सरकार की तरफ से उन्हें 2006 में राष्ट्रपति अवार्ड के लिए उनका नाम भेजा गया था और तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित किया।

बड़े-बड़े कलाकार गुरदास मान और अन्य पंजाबी हास्य कलाकार भी उन्हें मिलने आते रहते थे। दरियाव सिंह मलिक बताते हैं कि आर्ट में आज तक किसी भी जाट को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया और वह पहले ऐसे जाट हैं जिन्हें कला में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया, इतना ही नहीं उन्हें हरियाणा का बेस्ट हास्य कलाकार के लिए भी सम्मानित किया गया था। मेरे सोजा मुन्ना रे, मुन्ना सोजा रे नाम की लोरी वो खूब सुनाते थे। अभिनेता और हरियाणवी फिल्मों के प्रसिद्ध गायक गजेंद्र फौगाट से बहूत लाड रखते थे और अक्सर वो मलिक साहब से वो लोरी सुनते थे। आइए उन्हीं की आवाज में सुनते हैं वो लोरी।



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