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FIR के 3 माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, वन रक्षक पर 23 लाख के गबन का आरोप

2014 में पदस्थ लोरमी लोकमनी त्रिपाठी द्वारा ग्राम विकास के नाम पर 23 लाख रुपये के गबन का आरोप। पढ़िए पूरी खबर-

FIR के 3 माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, वन रक्षक पर 23 लाख के गबन का आरोप
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लोरमी। मुंगेली जिले में पदस्थ वन रक्षक के खिलाफ 23 लाख रुपये के गबन के मामले में FIR किया गया है लेकन 3 माह के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है। वहीं इस मामले में सवाल पूछने पर अधिकारियों द्वारा गोलोमोल जवाब दिए जा रहे हैं। मामले में कार्यवाही नहीं होने पर आरोपी वन रक्षक के हौसले बुलंद हैं।

यह मामला वन विभाग के अंतर्गत खुड़िया रेंज का है, जहां पदस्थ लोकमनी त्रिपाठी के ऊपर 23 लाख रुपये गबन को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि 2014 में पदस्थ लोरमी लोकमनी त्रिपाठी द्वारा ग्राम विकास के नाम पर 23 लाख रुपये का गबन किया किया और निर्माण सिर्फ कागजों में किया गया। जिससे सरकारी पैसे का बंदरबाट किया गया। इसकी जानकारी आरटीआई के जरिये हुई, जिसमें सामने आया कि लोकमनी त्रिपाठी ने निर्माण कार्य के दस्तावेज पेश कर फर्ज़ी बिल व्हाउचर लगा कर पैसे का आहरण किया है।

बड़ी मशक्कत के बाद RTI से मिली जानकारी

आवेदक साजिद खान द्वारा लगातार पत्र व्यवहार करने पर विभाग के द्वारा कोई जानकारी नही दी गई तब शिकायत कर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत राज्य सूचना आयोग के समक्ष जानकारी मांगी। राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद भी एक साल तक विभाग द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई। राज्य सूचना आयोग के सख्ती से जानकारी देने को आदेश देने के बाद विभाग ने एक साल बाद जानकारी दी। दिये गए जानकारी के हिसाब से जब निर्माण कार्य की जांच की गई तो लोकमनी त्रिपाठी के द्वारा किये गए गबन की जानकारी मिली।

विभाग के एसडीओ डड़सेना के द्वारा 23 लाख रुपए का गबन की पुष्टि की गई। इसके साथ ही विभाग के अधिकारी ने एक जांच टीम गठित कर जांच कर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें दोषी वन प्रबन्धन समिति अध्यक्ष संत राम बैगा तथा वन प्रबन्धन समिति के सचिव वनरक्षक लोकमनी त्रिपाठी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें धारा 409,420,467,468,471 के तहत कार्यवाही की बात की गई है।

इस पूरे मामले में एसडीओपी क़ादिर खान का कहना है कि- 'वन विभाग द्वारा अभी तक कोई दस्तावेज की मूल प्रति नहीं दी गई है। फ़ोटोकापी के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।'

इस संबंध में वन विभाग के डीएफओ केके डड़सेना का कहना है कि- 'दस्तावेज अभी मिले नहीं हैं, दस्तावेज ढूंढ रहे हैं।'

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