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लालू यादव बोले - नीतीश कुमार द्वारा एपीएमसी बंद करने की वजह से बिहार में बढ़ गई गरीबी

बिहार में विपक्षी महागठबंध के सभी सियासी दल राज्यसभा में बीते दिन पारित हुये किसान बिल को लेकर एनडीए सरकार को कोस रहे हैं। राजद प्रमुख लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार सरकार द्वारा एपीएमसी 'APMC' बंद करने की वजह से बिहार में गरीबी बढ़ गई है।

लालू यादव बोले - नीतीश कुमार द्वारा एपीएमसी बंद करने की वजह से बिहार में बढ़ गई गरीबी
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सीएम नीतीश कुमार को लालू यादव ने किसान विरोधी बताया।

राज्यसभा में बीते दिन किसानों से संबंधित विधेयक पारित हुआ है। जिस पर बिहार में विपक्षी महागठबंधन के सभी सियासी दल कांग्रेस, राजद व रालोसा एक सुर में एनडीए सरकार को घेरने में जुटे हैं। साथ ही विधेयक को पूरी तरह से किसान विरोधी करार दे रहे हैं। मामले को लेकर बिहार के पूर्व सीएम एवं राजद प्रमुख लालू यादव ने नीतीश कुमार व भाजपा की सरकार को किसान व गरीब विरोधी बताया है।

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार और भाजपा ने मिलकर बिहार में 2006 में एपीएमसी 'APMC' को बंद कर दिया था। लालू यादव ने कहा कि उसके दुष्परिणाम यह सामने आया कि कि तब से बिहार सरकार के कुल खाद्यान्न लक्ष्य का एक प्रतिशत भी कभी एमएसपी 'MSP' पर नहीं खरीदा गया।

लालू यादव ने कहा कि एपीएमसी को बंद कर दिये जाने की वजह से बिहार में गरीबी भी बढ़ गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि एपीएमसी को बंद किया जाना ही बिहार में बढ़े पलायन का मुख्य कारण बना है। लालू यादव ने बताया कि आज बिहार में हर दूसरा परिवार पलायन करने पर मजबूर है।



कृषि बिल से नोटबंदी की तरह ही मिलेगा फायदा: डॉ. मदन मोहन झा

बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने भी ट्वीट के जरिये राज्यसभा में कल पारित हुये बिल के खिलाफ विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि कृषि बिल से किसानों को उतना ही फ़ायदा होगा। जितना नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को हुआ है।



चंद कॉरपोरेट घरानों के हाथों गुलाम बनने को मजबूर हुआ किसान: उपेंद्र कुशवाहा

रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी सोमवार को ट्वीट के जरिये संसद में पारित हुये किसानों से संबंधित विधेयक का विरोध जताया है। कुशवाहा ने कहा कि संसद में सरकारी तानाशाही एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को परे रखकर दोषपूर्ण 'कृषि बिल 2020' को पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़-सुखाड़, धूप-पसीने एवं प्राकृतिक आपदाओं को झेलकर भी 138 करोड़ देशवासियों का पेट पालने वाला किसान अब चंद कॉरपोरेट घरानों के हाथों गुलाम बनने को मजबूर हो चला है।




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