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राजस्थान संकट : राज्यपाल बोले- संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं, दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए

राजस्थान में राजनीतिक हलचल जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच तकरार बढ़ती ही जा रही है। इसी बीच राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता है और किसी प्रकार की दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

राजस्थान संकट : राज्यपाल बोले- संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं, दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए
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कलराज मिश्र

जयपुर। राजस्थान में राजनीतिक हलचल जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच तकरार बढ़ती ही जा रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बहुमत साबित करने के लिए सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल कलराज मिश्र पर आरोप भी लगाया कि राज्यपाल केन्द्र के दबाव के चलते सत्र बुलाने की इजाजत नहीं दे रहे हैं। वहीं इसी बीच राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता है और किसी प्रकार की दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए। राजभवन की ओर से राज्यपाल मिश्र का यह बयान शुक्रवार की रात को जारी किया गया।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस और उसके समर्थक विधायक विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार की दोपहर राज्यपाल से मिले और राजभवन में धरने पर भी बैठे। राज्यपाल के बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

इस बयान के अनुसार, 'राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए।' बयान के अनुसार, 'राज्य सरकार ने 23 जुलाई, 2020 की रात को विधानसभा के सत्र को अत्यन्त ही अल्प नोटिस के साथ आहूत किये जाने की पत्रावली पेश की। पत्रावली में गुण दोषों के आधार पर राजभवन द्वारा परीक्षण किया गया तथा विधि विशेषज्ञों द्वारा परामर्श प्राप्त किया गया। इसके बाद राजभवन ने कुछ बिंदु उठाते हुए राज्य सरकार के संसदीय कार्य विभाग से कहा कि वह इन बिंदुओं के आधार पर स्थिति पेश करे। बयान के अनुसार राजभवन द्वारा जिन छह बिंदुओं को उठाया गया है उनमें से एक यह भी है कि राज्य सरकार का बहुमत है तो विश्वास मत प्राप्त करने के लिए सत्र आहूत करने का क्या औचित्य है? इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि विधानसभा सत्र किस तिथि से आहूत किया जाना है, इसका उल्लेख कैबिनेट नोट में नहीं है और न ही कैबिनेट द्वारा कोई अनुमोदन प्रदान किया गया है।

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