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राजस्थान में कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों ने केंद्र सरकार को दी चेतावनी, कहा - विधेयक वापस नहीं लिया तो सांसदों की गांव में नहीं होने देंगे एंट्री

राजस्थान में विरोध जता रहे किसानों ने अब कृषि विधेयकों को समर्थन देने वाले प्रदेश के 25 लोकसभा सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। इस क्रम में सांसदों को गाँवों में प्रवेश नहीं देने के लिए अभियान चलाने का फैसला लिया गया है।

राजस्थान में कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों ने केंद्र सरकार को दी चेतावनी, कहा - विधेयक वापस नहीं लिया तो सांसदों की गांव में नहीं होने देंगे एंट्री
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राजस्थान किसान

कृषि क्षेत्र से जुड़े दो महतवपूर्ण विधेयक संसद से पारित होने के बाद राजस्थान में भी किसानों द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध की लहर दौड़ रही है। हर तरफ से किसान इन विधेयकों के पारित होने का बाद से विरोध करते नजर आ रहे हैं।

वहीं राजस्थान के किसानों के एक तबके में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। विरोध जता रहे किसानों ने अब कृषि विधेयकों को समर्थन देने वाले प्रदेश के 25 लोकसभा सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। इस क्रम में सांसदों को गाँवों में प्रवेश नहीं देने के लिए अभियान चलाने का फैसला लिया गया है।

किसान नेता हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा है कि कृषि अध्याधेश से जुड़े कई पहलू किसान विरोधी हैं। ऐसे में इसका संसद से पारित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों ने तय किया है कि वे किसान विरोधी इस अध्यादेश के ख़िलाफ़ संघर्ष करेंगे। प्रदेश के जिन 25 सांसदों ने किसान विरोधी बिल का समर्थन किया है, उनका सार्वजनिक रूप से बहिष्कार किया जाएगा। उन्हें गांवों में घुसने नहीं देने का अभियान चलाया जाएगा।

आज किसान विरोधी अध्यादेश के खिलाफ संघर्ष के साथियों के साथ ज्ञापन दिया गया। सभी किसान भाइयों ने संघर्ष का निर्णय हैं। प्रदेश के 25 सांसदों ने किसान विरोधी बिल का समर्थन किया हैं इनका सार्वजनिक रूप से बहिष्कार करेंगे। गाँव में घुसने न देने का अभियान चलायेंगे।

हिम्मत सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि दूसरे लोग जब सरकार से नाराज होते हैं तो कानून तोड़ते हैं, लेकिन जब किसान नाराज होगा तो कानून ही नहीं तोड़ेगा, सरकार की पीठ भी तोड़ देगा। मोदी सरकार ने वर्तमान हालत इसी तरह पैदा कर दिए हैं। प्रदेश के 25 सांसदों ने किसान विरोधी बिल का समर्थन किया हैं। जिसके बाद अब सांसदों का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार करेंगे। उन्हें गांव में घुसने न देने का अभियान चलाएंगे।

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