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Bharat Bandh Live : राजस्थान में बंद का शुरुआती असर मिला जुला रहा, दिल्ली कूच कर रहे किसानों को हरियाणा बॉर्डर पर फिर रोका

किसान संगठनों द्वारा आहूत 'भारत बंद' का मंगलवार को राजस्थान के अनेक इलाकों में शुरुआती असर मिला जुला रहा। राज्य में अभी अनाज मंडियां एवं प्रमुख बाजार बंद रहे, लेकिन कई जगह बाजारों में कुछ दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुली रहीं।

Bharat Bandh Live : राजस्थान में बंद का शुरुआती असर मिला जुला रहा, दिल्ली कूच कर रहे किसानों को हरियाणा बोर्डर पर फिर रोका
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राजस्थान में भारत बंद का असर

जयपुर। किसान संगठनों द्वारा आहूत 'भारत बंद' का मंगलवार को राजस्थान के अनेक इलाकों में शुरुआती असर मिला जुला रहा। राज्य में अभी अनाज मंडियां एवं प्रमुख बाजार बंद रहे, लेकिन कई जगह बाजारों में कुछ दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुली रहीं। केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों ने 'भारत बंद' की घोषणा की है, जिसे राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस भी समर्थन दे रही है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास अपने समर्थकों के साथ बंद के समर्थन में जयपुर के अनेक इलाकों में ट्रैक्टर एवं अन्य वाहनों पर घूमे। किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि गांवों एवं कस्बों में बंद का स्पष्ट असर है। राज्य में सभी मंडियां बंद हैं। बंद शांतिपूर्ण ही रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र के किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ किसान सड़कों पर हैं और इन कानूनों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। राजस्थान की राजधानी जयपुर में कई जगहों पर सुबह दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुलीं। बंद को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी हालात पर निगाह लगातार रखे हुए हैं।

किसान संगठनों ने प्रशासन को दी चेतावनी

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में शाहजहांपुर में जारी महापड़ाव के छठे दिन राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने अपने समर्थकों के साथ पहुंच आंदोलन का समर्थन किया। रामपाल जाट ने राज्यभर से आए किसानों से बीच चर्चा कर दिल्ली कूच के लिए हरियाणा सीमा की ओर निकले। किसान महापंचायत के किसान व राजाराम मील के साथ आए समर्थकों के हरियाणा सीमा पर पहुंचने पर हरियाणा पुलिस ने क्रेन के हाइवे के बीचों बीच लगाकर, बेरिकेट व पत्थर लगाकर किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया। जिस पर दोनो नेताओं ने प्रशासन का सहयोग स्वरूप आगे नहीं बढ़ने व वापस शाहजहांपुर महापडाव स्थल पर लौटने पर सहमत हुए। किसान नेताओं ने हरियाणा प्रशासन को चेतावनी देते हुए बताया कि 9 दिसम्बर को केन्द्र सरकार व किसान संगठनों के बीच होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही तो निश्चित रूप से दिल्ली कूच किया जाएगा।

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