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गली-मोहल्ले में बिक रहे बर्फ के गोले, सेहत के लिए नुकसानदेह

गर्मी बढ़ने के साथ शहर की सड़कों पर खड़े शिकंजी, नींबू पानी, बर्फ के गोले और मटका कुल्फी की बिक्री बढ़ गई है। जिसमें बर्फ के गोलों में नुकसानदेह कलर का इस्तमाल किया जा रहा है। यह कलर बच्चों और बड़ों के लिए नुकसानदेह है।

गली-मोहल्ले में बिक रहे बर्फ के गोले, सेहत के लिए नुकसानदेह
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गली-मोहल्लों मे खड़े पेय पदार्थों के ठेलों की होगी जांच

भोपाल। गर्मी बढ़ने के साथ शहर की सड़कों पर खड़े शिकंजी, नींबू पानी, बर्फ के गोले और मटका कुल्फी की बिक्री बढ़ गई है। जिसमें बर्फ के गोलों में नुकसानदेह कलर का इस्तमाल किया जा रहा है। यह कलर बच्चों और बड़ों के लिए नुकसानदेह है। इसको देखते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इन ठेलों की जांच शुरु करने का प्लॉन बनाया है। रोजाना टीम शहर की सड़कों पर खडेÞ ठेलों से पेय पदार्थों के सैंपल लेकर जांच करेगी।

गर्मी के मौसम में बर्फ के गोले, कुल्फी, आईस्क्रीम व अमानक पानी के पाउच लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। जूस सेंटर, गन्ने का रस, नीबू पानी, केरी पना सहित अन्य पेय पदार्थों में विक्रेता बर्फ का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन यह बर्फ खाने योग्य नहीं है, इसकी जांच नहीं की जा रही है। शहर के लिंक रोड नं. एक, लिंक रोड नं. दो, मंत्रालय के सामने, न्यू मार्केट, 10 नं. मार्केट, 7 नं. या पुराने भोपाल के विभिन्न चौक चौराहों पर इन दिनों गन्ने की चर्खी, नीबू पानी के ठेले दिखाई देते हैं। इसके साथ ही स्लम बस्तियों में बर्फ के गोले के ठेले देर रात तक घूमते रहते हैं, लेकिन इनकी जांच नहीं हो रही है। खाद्य अफसरों के मुताबिक बर्फ के गोले में कई प्रकार के रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। बर्फ के ठेले वाले खाने का रंग छोड़ इंडस्ट्री में उपयोग होने वाले रंग का इस्तेमाल करते हैं, जो हानिकारक होता है। ठेले वालों को खाने में इस्तेमाल होने वाला रंग ही इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन सस्ता होने के कारण अधिकतर ठेले वाले इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाला रंग ही इस्तेमाल करते हैं। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र दुबे ने बताया कि पेय पदार्थों की जांच का प्लॉन बनाया गया है। सैपल लेकर जांच कराई जाएगी।

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