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पर्यटक अब कुल्लू में भी ले सकेंगे स्नो IGLOO का मजा

हिमाचल प्रदेश में घुमने जा रहे पर्यटकों के लिए खुशी की खबर है। पर्यटक अब इग्लू(बर्फ का घर) का मजा कुल्लू में भी ले सकते हैं। जिले मुख्यालय के साथ लगते ट्रैकिंग स्थल चंद्रखणी के साथ लगते सोइलांग पधर में दो इग्लू को निर्माण किया गया है।

पर्यटक अब कुल्लू में भी ले सकेंगे स्नो IGLOO का मजा
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल प्रदेश में घुमने जा रहे पर्यटकों के लिए खुशी की खबर है। पर्यटक अब इग्लू(बर्फ का घर) का मजा कुल्लू में भी ले सकते हैं। जिले मुख्यालय के साथ लगते ट्रैकिंग स्थल चंद्रखणी के साथ लगते सोइलांग पधर में दो इग्लू को निर्माण किया गया है। शुक्रवार को इन इग्लू को शुभारंभ लेखक गणेश गनी ने किया। वाइल्ड लैंड एडवेंचर कैंप की ओर से तैयार घाटी के पहले इग्लू से खराहल घाटी को नई पहचान मिलेगी।

अब बाहरी पर्यटकों के लिए मनाली की भांति यहां पर भी विंटर सीजन में मिलने वाली सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। क्रिसमस के मौके पर शुरू हुए इग्लू को खराहल घाटी के युवा गोविंद राम और उनके सहयोगियों ने तैयार किया। गणेश गनी ने कहा कि इस पहल से घाटी में पर्यटन के द्वार खुलेंगे और युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान होंगे। इग्लू में एक रात के ठहराव के लिए आठ हजार रुपये तय किए गए हैं। इसमें डिनर और सुबह का नाश्ता भी होगा।

ऐसे बनया जाता है बर्फ का घर

एक इग्लू बनाने के लिए जिस बर्फ का उपयोग किया जाता है उसमें पर्याप्त संरचनात्मक मजबूती होनी चाहिए ताकि उसे उचित तरीके से काटा और एक पर एक रखा जा सके। इस प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किए जाने के लिए ऐसी हिम उपयुक्त होती है जो हवा से उड़ाई गई हो और जो बर्फ के टुकड़ों को सघन बनाती है और जोड़ती है। बर्फ में छूटे हुए छेद, जहां से खण्डों को काटा जाता है उसे आमतौर पर आश्रय के निचले आधे हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कभी-कभी, प्रवेश द्वार पर एक छोटी सुरंग का निर्माण किया जाता है ताकि जब दरवाज़ा बंद हो तो हवा और ताप की हानि को कम किया जा सके। बर्फ के उत्कृष्ट रोधन गुण के कारण, बसे हुए इग्लू अन्दर से आश्चर्यजनक रूप से आरामदायक और गर्म होते हैं। कुछ मामलों में, बर्फ के एक खंड को डाला जाता है ताकि इग्लू में प्रकाश आ सके।

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