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टिकैत अकेले नहीं, दुनिया भर के बड़े नेताओं के निकले हैं आंसू

राकेश टिकैत से पहले अगर बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अन्ना हजारे और बराक ओबामा सहित दुनियाभर के बडे नेताओं की आंखों से आंसू निकले हैं। आंसू पुरुषों की कमजोरी माना जाता है लेकिन भावुकता की अपनी जगह होती है।

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राकेश टिकैत  

Farmers Protest : राकेश टिकैत किसान आंदोलन में शुरुआत से ही सुर्खियाें में रहे हैं। उनकी अपनी रणनीति थी कि जिस मीडिया का बहिष्कार बाकी किसान नेताओं ने गोदी मीडिया कहकर किया था उसी मीडिया का इस्तेमाल राकेश टिकैत ने किसानों के साथ अपनी बातचीत रखने के लिए बखूबी किया।

लाल किला प्रकरण के बाद जब गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की कम संख्या का फायदा योगी सरकार ने उठाने की सोची तो राकेश टिकैत के आंसू बह निकले और देखते ही देखते पूरा पासा पलट गया। अब तब राकेश टिकैत अपनी अलग भाषण शैली से सुर्खियां बटोर रहे थे लेकिन इतने बड़े किसान नेता को रोता देखना यह सोचने के लिए विवश करता है कि क्यों बड़े- बड़े मजबूत नेताओं के आंसू निकलते हैं और इसके पीछे विज्ञान क्या है। राकेश टिकैत से पहले अगर बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अन्ना हजारे और बराक ओबामा सहित दुनियाभर के बडे नेताओं की आंखों से आंसू निकले हैं। आंसू पुरुषों की कमजोरी माना जाता है लेकिन भावुकता की अपनी जगह होती है। पुरुषों का रोना भी अस्वाभाविक नहीं है बल्कि इस पर तो बहुत शोध भी हुए हैं। पहले ये जान लेते हैं राकेश टिकैत से पहले कौन कौन से नेताओं के आंसू निकले हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार रो चुके

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंखों में कई बार आंसू निकले हैं और वो खुद को भावुक होने से नहीं रोक पाए हैं। मई 2015 प्रधानमंत्री बंगाल दौरे के दौरान मोदी पहली बार बेलूर मठ गए थे। वहां जब उनके लिए स्वामी विवेकानंद का कमरा खोला गया तो वे भावुक हो उठे थे। मोदी जब युवावस्था में साधु बनना चाहते थे, तब इसी मठ ने 3 बार उनकी अपील को नामंजूर कर दिया था। जनवरी 2016 में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह के दौरान छात्र रोहित वेमुला की मौत का जिक्र करते वक्त भी मोदी भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था कि एक मां ने अपना बेटा खोया है, इसका दर्द वह महसूस कर सकते हैं। सितंबर 2015 में जब मोदी फेसबुक हेडक्वॉर्टर में मार्क जुकरबर्ग के सवालों के जवाब दे रहे थे, तब अपनी मां से संबंधित सवाल का जवाब देते वक्त उनकी आंखें भर आई थीं। मां के संघर्ष के बारे में बताते-बताते वे भावुक हो गए थे।

भाजपा के संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद संसद के सेंट्रल हाल में लालकृष्ण आडवाणी के बयान (नरेंद्र भाई ने कृपा की) का जिक्र करते हुए मोदी के आंसू छलक पड़े थे। उन्होंने रूंधे गले से कहा था कि वह (आडवाणी) कृपा शब्द का प्रयोग न करें। मां की सेवा कभी कृपा नहीं होती। मेरे लिए भाजपा मां के समान है। मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी के लिए गुजरात विधानसभा में विशेष सत्र रखा गया था। इसमें मोदी ने विदाई भाषण में विपक्ष की तारीफ की थी। जब विपक्ष के नेता उन्हें शुभकामनाएं दे रहे थे, तब मोदी भावुक हो गए थे। इसके अलावा भी कई बार उनकी आंखों में आंसू देखे गए हैं।

मजबूत वाजपेयी भी भावुक हुए थे

भाषण शैली, परमाणु परीक्षण से लेकर कारगिल तक कई ऐसी बातें हैं, जो बताती हैं भारत के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजयेपी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। बड़े फैसले लेते वक्‍त वाजपेयी कभी डरे नहीं, न ही कभी सत्‍ता के लिए सिद्धांतों से समझौता करते दिखे लेकिन एक दिन उनकी आंखों में भी लोगों ने आंसू देख ही लेिए। ऐसा ही एक किस्‍सा है 1996 का। जब वाजपेयी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे थे। इसी दौरान वरिष्‍ठ पत्रकार राजीव शुक्‍ला ने अटल बिहारी वाजपेयी का एक इंटरव्‍यू लिया। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि वाजपेयी इस इंटरव्‍यू में बात करते-करते रो पड़े थे। पत्रकार ने सवाल पूछा- इतनी सारी सिक्‍योरिटी, सारा तामझाम, सारे बंधन, मुलाकातियों की भीड़, इतना सब हो गया, आप बंधे-बंधे महसूस नहीं करते हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए वाजपेयी भावुक हो गए। बोले- मैं बहुत बंध हुआ महसूस करता हूं। इतना कहने के बाद वाजपेयी रो पड़े। इस पर पत्रकार राजीव शुक्‍ला ने कहा- आप इमोशनल हो रहे हैं। जवाब में वाजपेयी ने कहा, 'मैं जबसे आया हूं तब से ये कह रहा हूं कि इतनी सिक्‍योरिटी की क्‍या जरूरत है। रास्‍ते बंद हैं, सड़कें रुक जाएं, ऐसा लगता है जैसे हड़ताल हो रही हो। देशवासी इतने दूर खड़े कर दिए जाएं। हमारे अपने कार्यकर्ता हमारे अपने पास न आ सकें। उनको समझाना भी मुश्किल है। उचित प्रबंध ठीक है

संसद में फूट- फूटकर रोए थे योगी

राकेश टिकैत की आंखों में आंसू निकलने के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती का हाथ भले ही बताया जा रहा हो लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब खुद योगी आदित्यनाथ अपनी सुरक्षा की चिंता में संसद में फूट फूटकर रोए थे। योगी आदित्य‍नाथ एक बार लोकसभा में यूपी पुलिस की बर्बरता का वर्णन करते हुए रो पड़े थे। प्रखर एवं उग्र हिंदुत्व के पोषक माने जाने वाले आक्रामक बीजेपी नेताओं में गिने जाने वाले योगी आदित्यनाथ लोकसभा में जोर-जोर से रोने लगे थे। वर्ष 2006 में लोकसभा में पुलिस‍ की प्रताड़ना का जिक्र करते हुए योगी रोने लगे थे, तब मुलायम सिंह यादव यूपी के सीएम थे। पश्च‍िमी यूपी में चुनावी सभाओं के जरिए योगी आदित्यनाथ ने पूरे जोर-शोर से प्रचार किया. इसका नतीजा ये हुआ कि गोरखपुर की सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया. वहीं पूरे प्रदेश में पार्टी ने 325 सीटें हासिल कर केसरिया परचम लहराया। वर्ष 2006 में गोरखपुर से बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात रखने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से विशेष अनुमति ली थी। तब पूर्वांचल के कई कस्बों में सांप्रदायिक हिंसा फैली थी। जब आदित्यनाथ अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो फूट-फूट कर रोने लगे। कुछ देर तक वे कुछ बोल ही नहीं पाए और जब बोले तो कहा कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार उनके खिलाफ षड्यंत्र कर रही है और उन्हें जान का खतरा है।

लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी से योगी ने बताया था कि गोरखपुर जाते हुए उन्हें शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और जिस मामले में उन्हें सिर्फ 12 घंटे बंद रखा जा सकता था, उस मामले में 11 दिन जेल में रखा गया।

बापू की आंखों में भी निकले थे आंसू

पूरी दुनिया को महात्मा गांधी ने सत्य और अंहिसा का रास्ता दिखाया लेकिन वो खुद एक भावुक इंसान भी थे और उनकी आंखों में भी एक बार आंसू निकले थे। रेप की घटनाएं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को काफी विचलित करती थीं। एक बार तो वे ऐसी एक घटना सुनकर रो पड़े थे। सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय पूर्वी मेदिनीपुर के तमलुक में 'ताम्रलिप्त राष्ट्रीय सरकार' नाम से समानांतर सरकार का गठन किया गया था, जिसमें अजय मुखर्जी, सतीश चंद्र सामंत व सुशील कुमार धारा की महत्वपूर्ण भूमिका थी। गांधीजी को शिकायत मिली कि जिन लोगों ने ताम्रलिप्त सरकार का गठन किया है, वे पूरी तरह अहिंसक नहीं हो पा रहे हैं। बापू ने पूछा तो स्वतंत्रता सेनानियों ने कहा कि वे सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन महिला से रेप नहीं। अंग्रेजों की इस घिनौनी करतूत के खिलाफ उन्हें हिंसा का रास्ता अपनाना पड़ा। गांधीजी के साथ आई सुशीला नायर ने जब महिलाओं से इस बारे में पूछा तो सभी ने एक स्वर में इसे हकीकत बताया। महिलाओं की बात सुनकर बापू द्रवित होकर चले गए और थोड़ी देर बाद नम आंखों के साथ लौटे। स्वतंत्रता सेनानियों से कहा कि वे उन्हें दोषी नहीं मानते, लेकिन खुशी होती अगर इस तरह की घटना न होती।

बराक ओबामा भी रोए हैं

दुनिया भर को अपना निशाना बना रही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस भले ही चीन से निकला था, लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिला अमेरिका में। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा इसी को लेकर भावुक हुए और उनकी आंखों में आंसू बह निकले। तब बराक ओबामा ने कोरोना वायरस से निपटने को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तरीकों पर सवाल उठाए थे और उनकी जमकर आलोचना की थी। पूर्व राष्ट्रपति के मुताबिक, वर्तमान सरकार ने समय रहते इस महामारी की गंभीरता को नहीं समझने की बड़ी चूक की है जिसका खामियाजा अब देश को भुगतना पड़ रहा है। अमेरिका की स्थिति को देखते हुए ओबामा इस दौरान काफी इमोशनल हो गए थे और उनकी आंखों में आंसू आ गए।

भगत सिंह को याद कर रोए थे अन्ना हजारे

समाजसेवी अन्ना हज़ारे भी शहीदे आजम भगत सिंह के पैतृक गाँव खटकर कलां पहुँचकर रो पड़े थे। ब्रितानी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह करने वाले भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी। भगत सिंह के गाँव में अन्ना हज़ारे ने कहा था कि आज पूरा देश भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे लाखों लोगों को याद कर रहा है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए कुर्बानियां दीं लेकिन कुछ गद्दार देश के लिए कुर्बानी देने वाले इन लोगों को भूल गए हैं। अन्ना ने यह भी कहा कि भले ही कुछ लोग रास्ता भटक गए हों लेकिन कई युवक इन शहीदों को याद करके अपने जीवन में कुछ ना कुछ करते हैं।

आचार्य बालकृष्ण के बह निकले थे आंसू

काला धन संबंधी आंदोलन के समय कुछ दिन लापता रहने के बाद जब स्वामी रामदेव के प्रमुख सहयोगी आचार्य बालकृष्ण प्रेस के सामने आए थे तो खूब फूट फूटकर रोए थे। कॉन्फ्रेंस के दौरान फूट पड़े थे और उनकी आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने सरकार पर क्रूरता का आरोप भी लगाया था। आज वो पंतजलि योगपीठ के होली शोली हैं और भारत के अमीर लोगों में उनकी गिरती होती है। उन्होंने तब रोते हुए बालकृष्ण ने कहा कि घायल लोगों की हालत देखकर वे उस वक्त भी खूब रोए और तय किया कि जो लोग बाबा रामदेव की एक आवाज पर इतनी दूर-दूर से आए हैं वे उन्हें इस हालत में छोड़कर नहीं जाएंगे। काला धन को लेकर तब आंदोलन चल रहा था और उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि हजारों मासूमों पर डंडे बरसाए गए, लेकिन पीड़ितों को देखने सरकार की ओर से कोई नहीं गया। आचार्य ने कहा कि जो लोग इतने क्रूर हो सकते हैं वो देश के लिए क्या करेंगे।

प्रवीण तोगडिया भी रोए थे

हिंदू नेता प्रवीण तोगडिया भी एक बार फूट फूटकर रोए थे। उनके रोने पर भी तब लोगों ने आश्चर्य जताया था क्योंकि अक्सर वो धर्म को लेकर बहुत आक्रामक होते थे और कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था वो यूं रोएंगे।

क्यों निकलते हैं पुरुषों के आंसू

आमतौर पर आंसू को पुरुषों की कमजोरी और महिलाओं से ही जोडकर देखा जाता है लेकिन रोना स्वाभाविक है। महिलाएं ही नहीं पुरुष भी रो सकते हैं। इसको लेकर बहुत से शोध भी हुए हैं। कहते हैं कि रोने से मन हल्का हो जाता है, लेकिन अगर कोई लड़का रोए तो उसे बस यही सुनने को मिलता है- क्यों लड़कियों की तरह रो रहा है. बच्चों की तरह रोने लग जाते हो. तो क्या कोई लड़का या यूं कहें कि मर्द रो नहीं सकता? क्या मर्द को रोना नहीं चाहिए? अगर ऐसा है तो फिर पीएम मोदी क्यों कई बार अपनी बात कहते-कहते रो पड़ते हैं? अपनों से मिला दर्द, उम्मीद का टूटना, संघर्ष के दिन, फिल्में, किसी अपने का जाना ऐसे क्षण होते हैं जब बडे बडे लोग भी रो ही पड़ते हैं। वैसे आंसू कई प्रकार के होते हैं। आंसू भी तीन प्रकार के होते हैं, रेफलेक्सिव, कंटीनिअस, इमोशनल, क्या आपको पता है कि केवल इंसान ही तीसरी तरह से रो सकते हैं। डॉ. फ्रे के मुताबिक, यह जरूरी है कि हम कभी-कभार रोएं. इससे तनाव कम होता है और हार्ट और मस्तिष्क को क्षति नहीं पहुंचती है।

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