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कंडेला महापंचायत में बोले टिकैत- राजा जब डरता है तो किलेबंदी करता है, गरीब की रोटी तिजोरी में बंद नहीं होने देंगे

किसान महापंचायत में 100 से ज्यादा खापें, तपों तथा बाहरा के प्रतिनिधियों के अलावा राजस्थान, पंजाब व यूपी के किसान संगठन भी शामिल हुए।

कंडेला महापंचायत में बोले टिकैत- राजा जब डरता है तो किलेबंदी करता है, गरीब की रोटी तिजोरी में बंद नहीं होने देंगे
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हरिभूमि न्यूज. जींद

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सीधे-सीधे सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर सरकार ने किसानों की पगड़ी की तरफ हाथ किया तो उनका अच्छे से इलाज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीनों बिलों को रद्द करने के अलावा किसान मानने वाला नहीं है। राकेश टिकैत गांव कंडेला में सर्वजात सर्वखाप पंचायत द्वारा आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व महापंचायत में पांच प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किए गए।

जिसमें तीन कृषि कानून को रद्द करने, एमएसपी को अमलीजामा पहनाए जाने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, किसानों के कर्जे माफ करने, 26 जनवरी को दिल्ली में पकड़े गए किसानों और उनके वाहनों को छोडऩे तथा दर्ज मुकद्दमों को रद्द किया जाना शामिल था। किसान महापंचायत में 100 से ज्यादा खापें, तपों तथा बाहरा के प्रतिनिधियों के अलावा राजस्थान, पंजाब व यूपी के किसान संगठन भी शामिल हुए। राकेश टिकैत ने कहा कि राजा जब डरता है तो किलेबंदी करता है। मोदी सरकार किसानों से डर के मारे किलेबंदी करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि उनकी कमेटी का ना तो कोई मेम्बर बदला जाएगा और न ही कार्यालय बदला जाएगा।


अपने खेत की मिट्टी और पानी की पूजा करें

उनहोंने कहा कि जो भी फैसला होगा यही 40 सदस्यीय कमेटी फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि युद्ध में कभी घोड़े नहीं बदले जाते। हम इन्हीं घोड़ों के बल पर किसानों की लड़ाई जीतने में कामयाब होंगे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने खेत की मिट्टी और पानी की पूजा करें। युवा जब तक खेत की मिट्टी और पानी की पूजा नहीं करेंगे तो उन्हें आंदोलन का अहसास नहीं होगा। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि अभी तो किसानों ने सिर्फ बिल वापसी की बात कही है। अगर किसान गद्दी वापसी की बात पर आ गए तो उनका क्या होगा। इस बात को सरकार को भलिभांति सोच लेना चाहिए। दिल्ली में बॉर्डरों पर किलेबंदी करने पर टिकैत ने कहा कि सरकार ने कीलें गाडी, तार लगवाई लेकिन ये किसान को रोक नहीं सकते। किसान इन्हें उखाड़ कर अपने घरों में लाएंगे और अपने-अपने गांवों की चौपालों में रखेंगे और आने वाली नस्लों को बताएंगे कि किस प्रकार सरकार ने उनका रास्ता रोकने के लिए प्रोपगंडे रचे थे। उन्होंने कहा कि यह किलेबंदी सरकार का एक नमूना है, आने वाले दिनों में गरीब की रोटी पर किलेबंदी होगी।

सरकार को अक्टूबर तक का वक्त दिया

उन्होंने कहा कि किसी भी गरीब की रोटी तिजोरी में बंद न हो, इसीलिए किसानों ने यह आंदोलन शुरू किया है। उन्होंने कहा कि अभी सरकार को अक्टूबर तक का वक्त दिया गया है। आगे जैसे भी हालात रहेंगे, उसी मुताबिक आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले 35 साल से किसानों के हित में आंदोलन करते आ रहे हैं। हमने संसद घेरने की बात भी कही पर लाल किले की बात तो कभी नहीं कही और न ही किसान वहां कभी गए। लाल किले पर जो लोग गए वो किसान नहीं थे। यह किसानों को बदनाम करने के लिए साजिश रची थी। किसान महापंचायत में यूनियन के राष्ट्रीय सचिव युद्धवीर सिंह, भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, रत्नमान, पंजाब से बलबीर सिंह राजेवाल, कंडेला खाप के अध्यक्ष टेकराम कंडेला समेत कई खाप चौधरियों ने तीन कृषि कानून का विरोध किया और आंदोलन पर अटल रहकर तीन कृषि कानून को रद्द करने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।

भीड़ बढने से मंच टूटा

जिस मंच से राकेश टिकैत किसानों को संबोधित कर रहे थे, वह गिर गया। मंच पर कई अन्य किसान नेता भी मौजूद थे। हादसे में टिकैत समेत कुछ नेताओं को मामूली चोट आई है।



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