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बीटेक करने बाद शुरू किया मधुमक्खी पालन, आज कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक झज्जर के शहद की मिठास

मैकेनिकल से बीटेक करने वाले विनय ने जब मधुमक्खी पालक बनने का निर्णय लिया तो शुरू-शुरू में उसकी मां ने इस कार्य का विरोध किया। अब उसका शहद हरियाणा के अलावा दिल्ली, तमिलनाडू, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र गुजरात, केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि में कोरियर के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। वर्तमान में वह इंजीनियर की नौकरी से मिलने वाली आय का लगभग पांच गुणा कमा रहे हैं।

बीटेक करने बाद शुरू किया मधुमक्खी पालन, आज कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक झज्जर के शहद की मिठास
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मधुमक्खी पालन,

कुमार राकेश कायत : झज्जर

यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ निश्चय कर ले और उसे पाने का अथक प्रयास करें तो रास्ते में आने वाली बाधाएं भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाती। वह एक ना एक दिन अपने लक्ष्य को हासिल करके ही छोड़ता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है झज्जर जिले के गांव मलिकपुर के रहने वाले युवा किसान विनय फौगाट ने।

मैकेनिकल से बीटेक करने वाले विनय ने जब मधुमक्खी पालक बनने का निर्णय लिया तो शुरू-शुरू में उसकी मां ने इस कार्य का विरोध किया। उन्हें अच्छा नहीं लग रहा था कि उसका बेटा इंजीनियर जैसे प्रतिष्ठित पद की नौकरी छोड़ कर मधुमक्खी पालन जैसे व्यवसाय में अपने कदम बढ़ाए। बाहर के लोगों में भी कुछ दिनों तक उसके फैसले का मजाक उड़ाया गया, लेकिन विनय की अथक मेहनत व निरंतर किए जा रहे प्रयासों का परिणाम यह रहा कि अब उसके द्वारा बनाए गए शहद की मिठास भारत के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पहुंचने लगी है। उसकी मधुमक्खियों का शहद पहले शहर व जिले के आस-पास के क्षेत्रों तक ही समिति था। लेकिन जब उसने अपने उत्पाद को आनलाइन कर मार्केटिंग करनी शुरू की तो उसे बाहरी राज्यों से भी आर्डर मिलने लगे। अब उसका शहद हरियाणा के अलावा दिल्ली, तमिलनाडू, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र गुजरात, केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि में कोरियर के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। वर्तमान में वह इंजीनियर की नौकरी से मिलने वाली आय का लगभग पांच गुणा कमा रहे हैं।

मुख्य उत्पाद

विनय के अनुसार वे वर्तमान में जहां बी-पोलन, मोम व मधुमक्खी कालोनियों का उत्पादन कर रहे हैं वहीं एक एकड़ में अमरूद का बाग व अन्य सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस व्यवसाय में कदम रखा तब सरकार द्वारा कोई सब्सिडी नहीं मिली थी लेकिन यदि अन्य कोई किसान इस व्यवसाय को शुरू करना चाहे तो प्रदेश सरकार उन्हें प्रोत्साहन के रूप में अब 85 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है।

2012 से की शुरुआत

मलिकपुर गांव के मैनपाल फौगाट के पुत्र विनय ने बताया कि उसने गुरूग्राम की तीन मल्टीनेशनल कंपनियों में इंजीनियर की नौकरी की लेकिन उसके मन में कुछ अलग से कर दिखाने और स्वरोजगार के साथ दूसरे लोगों को रोजगार प्रदान करने की इच्छा जागृत हुई। इसी के चलते वर्ष 2012 में उसने इस व्यवसाय में कदम रखा। मधु मक्खियों के 200 बॉक्स से व्यवसाय शुरू करने वाले विनय के पास वर्तमान में जहां 1150 बॉक्स है वहीं बी-हट नाम से प्रतिवर्ष करीब 44 टन शहद का उत्पादन किया जा रहा है। विनय को जहां मार्च 2018 में हुए तृतीय एग्री लीडरशिप शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा शहद रत्न अवॉर्ड व एक लाख रुपये की प्रोत्साहिन राशि से नवाजा गया वहीं जिले में गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों में भ्ाी कई बार सम्मानित किया जा चुका है। विनय के अनुसार वे हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में अपनी मधुमक्खियों का माइग्रेशन कर प्रकार का शहद निकालते हैं। उनके इस कार्य के चलते करीब 20 अन्य लोगों को रोजगार मिलता है।

सरकार से उम्मीद : शहद उत्पादक विनय फौगाट का कहना है कि रॉयल जैली तथा बी-वेनम पर भ्ाी काम होना चाहिए। कैसे इनका निष्कर्ष किया जाए व कैसे इनको पाउडर शेप में कन्वर्ट किया जाए तथा कैसे इनका भंडारण किया जाए इसकी सही तकनीक हमारे देश में अभी तक किसी को नहीं पता। इस पर काम होना चाहिए।

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