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किसानों को जल्द मिलेगी सरसों की हाइब्रिड किस्मों की सौगात

विश्वविद्यालय में लगातार शोध कार्य जारी हैं, जिनके अब तक लगातार सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2018 में विकसित किस्म आरएच-725 की लोकप्रियता हरियाणा प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के दूसरे प्रदेशों में भी बढ़ रही है।

किसानों को जल्द मिलेगी सरसों की हाइब्रिड किस्मों की सौगात
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Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University

हिसार : हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक जल्द किसानों को सरसों की अधिक पैदावार देने वाली हाइब्रिड किस्मों की सौगात देने वाले हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय में लगातार शोध कार्य जारी हैं, जिनके अब तक लगातार सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2018 में विकसित किस्म आरएच-725 की लोकप्रियता हरियाणा प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के दूसरे प्रदेशों में भी बढ़ रही है। इस किस्म के अग्रिम पक्ति परीक्षण राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार तथा हरियाणा के लगभग सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में लगे है और किसान भी इस किस्म को काफी पंसद कर रहे है।

अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत ने बताया कि वर्ष 1972-73 में राया व सरसों का उत्पादन 464 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर था जो वर्ष 2017-18 में बढकर 2018 किलोग्राम प्रति हेक्टयर पहुंच गया, ये सब विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उच्च कोटी की अधिक पैदावार देने वाली किस्मों की देन है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अब तक राया व सरसों की 20 किस्मों को विकसित किया है, जिसमें 11 राज्य व 9 राष्ट्रीय स्तर की हैं। मनुष्य के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए तेल की महत्ता व गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए अनुभाग की ओर से संकर किस्मों को विकसित करने का कार्य प्रगति पर है।

वैज्ञानिक निरंतर प्रयासरत : डॉ. छाबड़ा

कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता व आनुवांशिकी एवं पौद्य प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डॉ. ए.के. छाबड़ा ने बताया कि आरएच-725 बारानी व सिंचित क्षेत्र के लिए समय पर बिजाई के लिए उत्तम किस्म है। इसकी संभावित उपज 4.0 टन प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म लोकप्रिय किस्म आरएच-30 का विकल्प साबित हो रही है। राया तथा सरसों की पैदावार को ओर बढ़ाने के लिए तिलहन अनुभाग के वैज्ञानिक उन्नत किस्में व हाइब्रिड किस्मों को विकसित करने में निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की जा रही हाइब्रिड किस्मों की संभावित उपज पहले से विकसित किस्मों से ज्यादा तथा कम समय में पककर तैयार होने वाली है, जोकि विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

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